अब 'शिक्षा मंत्रालय' के नाम से जाना जाएगा मानव संसाधन विकास मंत्रालय, मोदी सरकार ने बदला नाम
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। हालांकि सरकार की ओर इस बारे में कोई बयान नहीं आया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी, इसकी घोषणा आज की जाएगी। फिलहाल रमेश पोखरियाल निशंक मानव संसाधन विकास मंत्री हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय यूजीसी और एआईसीटीई को एक साथ मिलाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा, राज्यों में 'राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण' बनाने का प्रस्ताव है जो स्कूल फीस जैसे विवादित विषयों से लेकर सभी मुद्दों पर नजर रखेंगे।छात्रों के मुताबिक कोर्स चुनने की आजादी हो सकती है। स्किल पर खास ध्यान दिया जाएगा।
बता दें कि बुधवार को हो रही कैबिनेट की बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी मिल जाएगी। नई नीति के प्रस्ताव में उच्च शिक्षा के लिए एक ही रेग्यूलेटरी बॉडी बनाने का प्रस्ताव है। इससे उच्च शिक्षा क्षेत्र में कई तरह की अलग-अलग रेग्यूलेटरी व्यवस्थाओं से निजात मिलेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक प्राधिकरण (NHERA) या भारतीय उच्च शिक्षा आयोग बनाने की बात कही है।
नई नीति में त्रिभाषा फॉर्मूले को ही जारी रखने पर जोर है। पांच वर्ष की उम्र तक शिक्षा से जुड़े विषयों का दायित्व महिला और बाल विकास मंत्रालय के पास रहेगा और उसके बाद एचआरडी मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा विभाग देखेगा। क्लासिकल लैंग्वेज पर सरकार जोर दे सकती है। स्कूलों में संस्कृत के अलावा उड़िया, तेलुगू, तमिल, पाली और मलयालम भाषाओं को शामिल किया जा सकता है। यह प्रावधान क्लास 6 से 8 तक किया जा सकता है।












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