Milind Deora: 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' से पहले कांग्रेस से क्यों तोड़ा 55 साल पुराना नाता, इनसाइड स्टोरी?
Milind Deora resignation inside story: मिलिंद देवड़ा कांग्रेस छोड़ने की तैयारी कर चुके हैं, इसकी भनक पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पहले से थी। शनिवार को पूरे दिन और देर रात तक पार्टी के कर्ता-धर्ता एक तरफ राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' को अंतिम रूप देने में लगे थे तो दूसरी तरफ देवड़ा का मान मनौव्वल चल रहा था।
हालांकि, जब मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस पार्टी के साथ '55 साल पुराना पारिवारिक रिश्ता' तोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया तो इंफाल में पार्टी महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने इसका भी ठीकरा बड़े ही आसानी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फोड़ दिया।

यह प्रधानमंत्री ने तय किया है-कांग्रेस
जयराम रमेश ने कहा, 'यह प्रधानमंत्री ने तय किया है, इसके बारे में कोई शक नहीं है।' हालांकि, देवड़ा की ओर से कांग्रेस को अलविदा कहने का संकेत खुल कर मिल चुका था और पार्टी ने उन्हें समझाने के लिए कोई कसर भी नहीं उठा रखी थी।
देवड़ा के शिवसेना में जाने की अटकलें लगातार चल रही थीं
जानकारी के अनुसार देवड़ा को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से मुंबई साउथ से टिकट मिलने या फिर राज्यसभा में भेजे जाने की अटकलें भी आम थीं और कांग्रेस आलाकमान इससे भी वाकिफ न रहा हो, ऐसा मानने की कोई वजह नहीं है।
इस वजह से मिलिंद देवड़ा का हुआ मोहभंग!
दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री के करीबियों करीबियों की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस मुंबई में पार्टी की परंपरागत सीटें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सामने सरेंडर करने को तैयार हो गई है।
जानकारी के मुताबिक मिलिंद को सबसे ज्याद तकलीफ इस बात को लेकर थी कि कांग्रेस यूबीटी और एनसीपी के दबाव की वजह से खुद के लिए सिर्फ मुंबई नॉर्थ सीट पर राजी हो रही है, जो कि पार्टी के लिए बहुत ही मुश्किल सीट है।
जबकि, मुंबई में अपनी जनाधार वाली सभी सीटें पार्टी महा विकास अधाड़ी (एमवीए) के सहयोगियों को देने के लिए तैयार दिख रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजरअंदाज करते हुए भी पार्टी नेतृत्व की ओर यह दलील दी गई थी कि शिवसेना में टूट की वजह से मुंबई में सहानुभूति का फायदा उद्धव ठाकरे गुट को मिल सकता है
2019 में दोनों सीटों पर कैसा रहा कांग्रेस का प्रदर्शन?
2019 में मुंबई साउथ सीट पर मिलिंद देवड़ा कांग्रेस के उम्मीदवार थे। यहां तब शिवसेना (तब संयुक्त) जीती थी। पार्टी के अरविंद गनपत सावंत को 52.62% वोट मिले थे। वहीं देवड़ा को भी 40.14% आए थे। शिवसेना में टूट की वजह से देवड़ा यहां कांग्रेस की दावेदारी मजबूत मान रहे थे।
जहां तक मुंबई नॉर्थ को लेकर जो देवड़ा की आपत्ति की बातें सामने आ रही हैं, वहां पिछली बार कांग्रेस की स्टार उम्मीदवार उर्मिला मातोंडकर को भी महज 24.39% वोट मिल पाए थे।
जबकि, बीजेपी के उम्मीदवार गोपाल शेट्टी 71.38% वोट लेके संसद पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से इंडिया ब्लॉक में सीटों की ऐसी साझेदारी मिलिंद देवड़ा पचाने के लिए तैयार नहीं थे।
कांग्रेस की गुटबाजी ने भी किया निराश!
कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि पार्टी के दो गुटों में आपसी खींचतान ने भी शायद देवड़ा के मोहभंग होने में बड़ा योगदान दिया है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले के गुट ने आला कमान को यह समझाने में सफलता प्राप्त कर ली है कि मुंबई और आसपास की सीटें सहयोगियों को देने के बदले दूसरे क्षेत्रों में पार्टी अपनी ज्यादा दावेदारी दिखा सकती है।
इसके लिए विदर्भ क्षेत्र का उदाहरण दिया जा रहा है, जहां कांग्रेस को लग रहा है कि वह ज्यादा सीटों पर लड़कर अधिक सीटें जीत सकती है। शायद इसके पीछे शहरी वोटरों पर भाजपा की अच्छी पकड़ को वह वजह मानकर चल रही है।
राज्य में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) गुट के बीच जो सीट-शेयरिंग की बातचीत चल रही है, उसकी जानकारी रखने वालों के मुताबिक फिलहाल राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से क्रमश: 20+18+10 की बात चल रही है। इसमें से कांग्रेस 20 में से 2 सीटें प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी और राजू शेट्टी की पार्टी के लिए छोड़ सकती है।












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