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मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017: अब आत्महत्या की कोशिश को नहीं माना जाएगा अपराध

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      BJP Government ने इस जुर्म के लिए बदला Law, अब नहीं मिलेगी सजा | वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली: आत्महत्या की कोशिश करना अब देश में अपराध नहीं माना जाएगा। हेल्थ मिनिस्ट्री ने 29 मई को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 को नोटिफाई करते हुए ये स्पष्ट किया है। ये अधिसूचना सदन में इस बिल के पास होने के एक साल बाद जारी की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पिछले साल लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा था कि इस विधेयक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात ये है कि इसमें आईपीसी की धारा को दरकिनार किया गया है।

      Mental Healthcare Act 2017 attempting suicide no longer a crime in India Health ministry notifies

      जेपी नड्डा ने कहा था कि अब आत्महत्या के प्रयास के मामलो को आईपीसी प्रावधानों के तहत नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति अवसादग्रस्त होकर इस प्रकार के कदम उठाता है तो उसे मानसिक बीमारी माना जायेगा न कि अपराध।

      मिनिस्ट्री ने इस ड्राफ्ट पर सितंबर महीने तक लोगों से राय मांगी

      मिनिस्ट्री ने इस ड्राफ्ट पर सितंबर महीने तक लोगों से राय मांगी

      मेंटल हेल्थकेयर बिल में मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति की केयर करने वाले के प्रतिनिधि की नियुक्ति भी की जाएगी और उनकी मानसिक स्थिति पर नजर रखी जाएगी। देशभर में करीब 6-7 फीसदी इस प्रकार के मामले आते हैं जिनमें 1-2 फीसदी ही वास्तव में मानसिक बीमारी के होते हैं। हेल्थ मिनिस्ट्री ने इस ड्राफ्ट पर सितंबर महीने तक लोगों से राय भी मांगी है।

      मानसिक तौर से बीमार लोगों को इलाज का अधिकार

      मानसिक तौर से बीमार लोगों को इलाज का अधिकार

      मेंटल हेल्थकेयर बिल सभी सरकारी अस्पतालों में मानसिक तौर से बीमार लोगों को इलाज का अधिकार देता है। इस बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियम और कानून बनाने के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स की एक टीम गठित की। मेंटल हेल्थकेयर बिल के तहत किसी भी तरह के नियम तोड़ने पर छह महीने जेल या 10000 रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है। अपराध दोहराने पर दो साल जेल और 50000 रुपये से 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है।

      मानसिक रूप से बीमार बच्चे को इलेक्ट्रिक शॉक देने पर भी प्रतिबन्ध

      मानसिक रूप से बीमार बच्चे को इलेक्ट्रिक शॉक देने पर भी प्रतिबन्ध

      इस कानून के अंतर्गत मानसिक रूप से बीमार बच्चे को इलेक्ट्रिक शॉक देने पर भी प्रतिबन्ध है वयस्कों को जबकि एनेस्थीसिया के तहत ऐसा किया जा सकता है। बिल में मानसिक तौर पर बीमार शख्स को यह अधिकार दिया गया है कि वह लिखित देकर यह बता सकता है कि उसकी देखभाल और इलाज किस तरह किया जाना चाहिए।

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      English summary
      Mental Healthcare Act 2017 attempting suicide no longer a crime in India Health ministry notifies

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