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बुआ मायावती चुप-चुप बैठी हैं जरूर कोई बात है...

By Yogender Kumar
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    नई दिल्‍ली। बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह आज पटना में हैं। एनडीए के साथी नीतीश कुमार के साथ गुरुवार सुबह का नाश्‍ता हो चुका है। अब डिनर पर चर्चा होनी बाकी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि नाश्‍ते के बाद नीतीश कुमार मुस्‍कुराते हुए बाहर निकले मतलब सब ठीक-ठाक है। वैसे पता किसी को कुछ नहीं है पर कहने के लिए कह रहे हैं तो सुनने में बुराई भी क्‍या है। गनीमत इतनी भी क्‍या कम है कि कम से कम कुछ कहा-सुना तो जा रहा है? गठबंधन के बुरे दिनों के इस दौर में कई ऐसे भी कई घटनाक्रम चल रहे हैं, जहां कहा-सुनी भी बंद है। कर्नाटक में जेडी-एस और कांग्रेस के गठबंधन का हाल बुरा है। शिवसेना-बीजेपी गठबंधन में तो वेंटिलेटर पर है, बस सांसें रुकने का औपचारिक ऐलान ही बाकी है। गठबंधन से जुड़ी इन बुरी खबरों के बीच भविष्‍य में होने महागठबंधन का तो और बुरा हाल है। गोरखपुर-फूलपुर और कैराना में जीत के झंडे गाड़ने के बाद अति उत्‍साहित लग रहे बुआ-भतीजे के बीच हाल फिलहाल में कोई बातचीत ही नहीं हुई है।

    कैराना के बाद से मायावती ने साधा हुआ है मौनव्रत

    कैराना के बाद से मायावती ने साधा हुआ है मौनव्रत

    गोरखपुर-फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के बाद मायावती ने जिस प्रकार से बयान दिए थे, उससे भतीजे अखिलेश को काफी खुशी हुई थी। उन्‍होंने तो यूपी में महागठबंधन के फार्मूले पर मीडिया के सामने ही चर्चा कर डाली। सीटों के बंटवारे पर भी बात की, लेकिन कैराना उपचुनाव के नतीजे के बाद मायावती ने उस प्रकार से उत्‍साह नहीं दिखाया, जैसा गोरखपुर-फूलपुर के वक्‍त दिखाया था। खबर तो यहां तक है कि अखिलेश यादव ने बुआ से मिलने के लिए प्रयास किया था, लेकिन वह असफल रहे। बात यहीं तक होती तो संयोग मानकर छोड़ देते, लेकिन मायावती ने तो कैराना से चुनाव जीतने वाली तबस्‍सुम हसन तक को मिलने का समय नहीं दिया।

    बसपा को सता रहा सपा के वोट ट्रांसफर का डर

    बसपा को सता रहा सपा के वोट ट्रांसफर का डर

    बबुआ अखिलेश यादव को मायावती के इस बर्ताव से दुख तो हुआ ही होगा, लेकिन सवाल यह है कि आखिर बुआ ऐसा कर क्‍यों कर रही हैं? इस बारे में दो तरह की बातें निकलकर सामने आ रही हैं। पहली- बसपा को भरोसा नहीं है कि सपा का वोट उसे ट्रांसफर होगा। दूसरी- सपा नहीं चाहती है कि कांग्रेस गठबंधन में शामिल हो। मायावती कांग्रेस को एकदम से छोड़ने के हक नहीं हैं। हालांकि, सपा का अपना दर्द है। कांग्रेस संग 'यूपी के लड़कों' पंचलाइन के साथ उसका क्‍या हश्र हुआ, यह सभी जानते हैं।

    मायावती जल्‍दी से नहीं खेलती हैं पत्‍ते, इस बार भी करेंगी चौंकाने वाला ऐलान

    मायावती जल्‍दी से नहीं खेलती हैं पत्‍ते, इस बार भी करेंगी चौंकाने वाला ऐलान

    मायावती की बात करें तो वह बिना राजनीतिक मोल-भाव किए गठबंधन करने में यकीन नहीं रखती हैं। इसका ताजा उदाहरण कर्नाटक विधानसभा चुनाव में दिखा, जहां मायावती ने जेडी-एस के साथ समझौता करके चुनावी बाजी को बीजेपी-कांग्रेस दोनों के हाथों से छीन लिया। मायावती ने कर्नाटक में कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाया, लेकिन यूपी में वह महागठबंधन में कांग्रेस की एंट्री चाहती है। यूं तो कांग्रेस मायावती के साथ मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान में भी गठबंधन करना चाहती हैं, लेकिन एमपी में बसपा ने इनकार कर दिया और राजस्‍थान में सचिन पायलट ने बसपा को गैरजरूरी करार दे दिया। इन सब घटनाक्रमों के बीच एक भी वाकया ऐसा नहीं हुआ, जिससे मायावती ने भविष्‍य की रणनीति का संकेत दिया हो। वैसे चौंकाने की मायावती की आदत पुरानी है, इस बार कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा।

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    English summary
    Mayawati's silence over alliance increasing heartbeat of Akhilesh Yadav.

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