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UP के नेता मंत्री कनेक्शन के चलते मथुरा का जवाहर बाग बना खूनी बाग

लखनऊ। अवैध कब्जा उत्तर प्रदेश के हर शहर की समस्या हैं। लेकिन जिस तरह से मथुरा में 280 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने को लेकर दो पुलिसकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है उसने अवैध कब्जें की समस्या को लोगों के सामने बड़े स्तर पर खोल कर रख दिया है।

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Mathura encroachment was a complete failure of UP Police

यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह अवैध कब्जा पिछले दो वर्षों से चल रहा था। बावजूद इसके संबंधित विभाग ने इन कब्जेधारियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की। स्थानीय लोगों की मानें तो इस कब्जे के पीछे समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता का है। स्थानीय सपा नेता ने इस जवाहर बाग में कब्जेधारियों को अपनी मदद दे रखी थी।

सपा नेता और बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के चलते संबंधित विभाग इस अवैध कब्जे के खिलाफ कोई कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस अवैध कब्जे की जानकारी बड़े अधिकारियों को पिछले 15-20 दिनों से थी।

मथुरा में इस अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस मामले की जानकारी प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा, डीजीपी जावीद अहमद, एडीजी एलओ दलजीत सिंह, मथुरा के डीएम राजेश कुमार और एसएसपी डॉ. राकेश सिंह को इस मामले की जानकारी पिछले दो तीन हफ्ते से थी। बावजूद इसके इस मामले की गंभीरता को नहीं समझा गया।

हाईकोर्ट ने जब इस अवैध कब्जे को खाली कराये जाने का आदेश दिया था तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इसे खाली कराने की योजना बनाने में जुट गये थे। प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा औ डीजीपी जावीद अहमद ने मथुरा के अधिकारियों से इस मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात भी की थी। यही नहीं एसएसपी से इस अभियान के लिए जरूरी फोर्स की जानकारी भी ली गयी थी।

कहां हुई गलती?

  • जवाहर बाग में अवैध कब्जे का विवाद लंबे समय से चल रहा था। इस मामले के पीछे बड़े लोगों का हाथ होने की भी जानकारी पुलिस को पहले से थी। इसी को ध्यान मे रखते हुए कोर्ट के आदेश के बाद डीजीपी सहित आला अधिकारियों ने इस कब्जे को हटाने के लिए कांफ्रेंसिंग भी की थी।
  • इन सब के बावजूद पुलिस ने बिना पूरी तैयारी के मौके पर कूच कर गयी।
  • पुलिस यहां बिना भारी फोर्स के पहुंची थी, पुलिस स्थिति का आंकलन कराने में पूरी तरह से विफल रही
  • आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस अवैध कब्जे की पहले से सही जानकारी नहीं दी।
  • स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह से विफल रहा।
  • कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस मजबूत योजना बनाने में विफल रही।
  • स्थानीय नेताओं के दबाव के चलते नहीं हुआ एक्शन, बढ़ता गया विवाद।

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