2013 में मनमोहन सिंह की सरकार ने ही VVIP की समाधि स्थल बनाने के लिए लागू किये थे नए नियम, फिर क्यों मचा बवाल?
Manmohan Singh: देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पंचतत्व में विलीन होने के कुछ घंटे बाद ही शनिवार 28 दिसंबर को दिल्ली में उनके स्मारक के लिए जगह को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने निगमबोध घाट श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार करवाकर देश के पहले सिख पीएम का अपमान किया है।
केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए जगह चुन ली थी और उनके परिवार को भी इस बारे में सूचित कर दिया था। हालांकि जेपी नड्डा ने प्रस्तावित स्मारक के स्थान का खुलासा करने से परहेज किया। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किसान घाट के पास एक स्थान है, वहीं मनमोहन सिंह का भी स्मारक बनाया जा सकता है।

2013 में मनमोहन सरकार ने VVIP की समाधि को लेकर क्या लिया था फैसला?
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर मनमोहन सिंह के सरकार में 2013 में लिया गया एक फैसला सुर्खियों में आ गया है। 2013 में मनमोहन सिंह ने राजघाट परिसर में समाधि स्थल बनाने के लिए नीति में बदलाव किया था। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने ही 2013 में फैसला किया था कि दिल्ली में वीवीआईपी के लिए अलग से कोई स्मारक नहीं होगा और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों जैसे दिवंगत राष्ट्रीय नेताओं के स्मारकों के लिए एक साझा परिसर बनाने का फैसला किया था।
मनमोहन सरकार 2013 में एक प्रस्ताव लेकर आई थी। यूपीए सरकार ने राजघाट के पास अलग-अलग समाधियों के निर्माण पर रोक लगाने का फैसला लिया था। इसमें सभी VVIP समाधियों के लिए एक साझा स्थल राष्ट्रीय स्मृति स्थल का प्रस्ताव पारित हुआ था। यूपीए सरकार ने इस फैसले को जगह की कमी और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सही ठहराया था। इस नीति के लागू होने के बाद राजघाट परिसर के आसपास नई समाधियां बनाने की परंपरा खत्म हो गई है।
यूं तो देश में अंत्येष्टि वाली जगह पर ही समाधि बनाने का कोई संवैधानिक नियम नहीं है। लेकिन यह एक प्रथा बन गई है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कई पीएम की समाधियां अंत्येष्टि वाली जगह पर बनाई गईं। यही वजह है कि कांग्रेस ने मनमोहन सिंह के लिए एक अलग से जगह मांगी थी।
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