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मणिपुर: मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने वाली महिला पुलिस ऑफ़िसर गिरफ़्तार होने वाली थीं?

By दिलीप कुमार शर्मा

पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा
Dilip Kumar Sharma/BBC
पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर एक ड्रग माफ़िया को छोड़ने के लिए 'दबाव' डालने का आरोप लगाने वाली महिला पुलिस अधिकारी को मंगलवार तड़के पुलिस ने करीब दो घंटे हिरासत में रखा. महिला पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा की कार में उस समय मौजूद दो और लोगों को भी हिरासत में लिया गया था.

पुलिस अधिकारी बृंदा के साथ हुई इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग मणिपुर पुलिस की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे महिला पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ जानबूझ कर परेशान करने वाली कार्रवाई बता रहें हैं. हालांकि मणिपुर पुलिस ने एक बयान जारी कर बृंदा पर उस रात इंफाल वेस्ट ज़िले के संगाईप्रो इलाके में कथित तौर पर लॉकडाउन प्रोटोकॉल उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

दरअसल मणिपुर पुलिस सेवा की अधिकारी बृंदा का यह मामला इसलिए सुर्ख़ियों में है क्योंकि इस महिला पुलिस अधिकारी ने 13 जुलाई को मणिपुर हाई कोर्ट में एक हलफ़नामा दाख़िल कर मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और सत्ताधारी भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मोइरंगथम अशनीकुमार पर ड्रग माफ़िया मामले में कई गंभीर आरोप लगाए थे.

बृंदा का कहना है कि उसे हिरासत में इसलिए लिया गया क्योंकि उसने ड्रग माफ़िया वाले मामले में मुख्यमंत्री का नाम लिया था. साथ ही वह कहती हैं कि उस रात अगर मणिपुर के मानव अधिकार कार्यकर्ता बबलू लॉईथांगबाम वहां नहीं पहुंचते तो पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती.

पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा
Thounaojam Brinda @Facebook
पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा

मणिपुर पुलिस द्वारा हिरासत में लेने की घटना का जिक्र करते हुए बृंदा अपने फ़ेसबुक पर लिखा, "इंफाल वेस्ट पुलिस ने उस रात क़रीब 12 बजकर 40 मिनट पर क्वकैथेल एफ़सीआई चौराहे पर मुझे और मेरे साथ सोनिया फैरेम्बा और तेनाओ को हिरासत में ले लिया. पुलिस क़र्फ्यू का उल्लंघन करने के आरोप लगा रही थी. जबकि उस समय सड़कों पर कई वाहन चल रहे थे."

"मेरे पति और मानव अधिकार कार्यकर्ता बबलू भी वहां पहुंच गए थे. मेरे पति क़र्फ्यू उल्लंघन करने के एवज में जुर्माना भरने के लिए सहमत हो गए थे और पुलिस से आग्रह किया कि रात बहुत हो चुकी है लिहाजा महिलाओं को घर जाने दिया जाए लेकिन पुलिस वाले नहीं माने."

"पुलिसवालों को मैंने अपना परिचय दिया था लेकिन उन्होंने पहचानने से मना कर दिया. भारी हथियारों से लैस वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों ने हमें घेर रखा था. पुलिस वाले कह रहे थे कि लामफेल थाने की पुलिस मुझे गिरफ़्तार करने आ रही है."

बृंदा ने आगे लिखा,"पुलिस ने हमारा बयान लिया तथा मेरे दोस्तों की तस्वीर ली. ह्यूमन राइट्स अलर्ट के कार्यकर्ता बबलू द्वारा लंबे समय तक किए गए तर्क के बाद हमें मंगलवार तड़के 2 बजकर 40 मिनट पर छोड़ा गया."

पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा
Thounaojam Brinda @Facebook
पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा

मणिपुर में बडे़ पैमाने पर हुए फ़र्ज़ी एनकाउंटर के ख़िलाफ़ लंबे समय से काम करते आ रहें जानेमाने मानव अधिकार कार्यकर्ता बबलू भी स्वीकार करते हैं कि पुलिस ने जानबूझकर बृंदा को परेशान करने के लिए डिटेन किया था.

उस दिन की घटना का जिक्र करते हुए बबलू ने बीबीसी से कहा, "यह कोई चरमपंथी वाला क़र्फ्यू नहीं है. कोविड के कारण क़र्फ्यू लगाया गया है और मैंने खुद नोटिस किया था कि उस रात कई और वाहन भी चल रहे थे. क़र्फ्यू तोड़ने के लिए क़ानून है लेकिन पुलिस ने चालान काटने में दो घंटा लगा दिया."

"रात के दो बज रहे थे और जिस तरह उन लोगों को डिटेन किया गया वो सही नहीं है. मुझे लगता है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस के लोग किसी दबाव में यह सबकुछ कर रहे थे. क्योंकि बृंदा को गिरफ़्तार करने की योजना थी."

बृंदा के फ़ोन करने के बाद घटना स्थल पहुंचे बबलू आगे कहते है, "उस समय पुलिस के कई शीर्ष अधिकारियों को संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया. आख़िर में मैंने आधी रात को मानवाधिकार रक्षकों के लिए मौजूद नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के फोकल पॉइंट में फ़ोन कर मदद मांगी."

"कमीशन की तरफ से डीजीपी के घर के नंबर पर फ़ोन किया गया. ज़िले के एसपी को भी फ़ोन किया. लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया. बाद में ह्यूमन राइट्स कमीशन ने पुलिस अधिकारियों को मैसेज भेजे तब जाकर बृंदा को छोड़ा गया. यह सबकुछ किसी के निर्देश पर किया जा रहा था. वरना एक एडिशनल एसपी को थाना इंचार्ज कैसे डिटेंन कर सकता है?"

मानव अधिकार कार्यकर्ता यह मानते है कि बृंदा पर इस तरह की कार्रवाई आगे भी हो सकती है क्योंकि महिला पुलिस अधिकारी ने ड्रग माफ़िया वाले मामले में प्रदेश के मुखिया का नाम लिया है. वो कहते है कि बृंदा के साथ काम करने वाले कई और लोगों को भी परेशान किया जा रहा है. हाल ही में बृंदा के साथ काम कर चुके मणिपुर पुलिस के एक कांस्टेबल को भी कई लोगों ने घर पर जाकर कथित तौर पर धमकाया था. उस घटना के बाद हार्ट अटैक में उनके पिता की मौत हो गई.

पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा
Thounaojam Brinda @Facebook
पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा

क्या मणिपुर के लोग इस महिला पुलिस अधिकारी का समर्थन कर रहे हैं?

इस सवाल का जवाब देते हुए बबलू कहते है,"मणिपुर के काफ़ी लोग बृंदा के समर्थन में है क्योंकि उन्होंने ड्रग्स माफिया के ख़िलाफ़ बड़ी कार्रवाई की है. लेकिन कुकी जनजाति के लोग ड्रग्स के इस मामले को लेकर बृंदा के ख़िलाफ़ है क्योंकि उनमें कई लोगों को ड्रग्स से फ़ायदा हो रहा है. मणिपुर में यह करोड़ो रुपए का धंधा बन गया है."

मणिपुर पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में जांच के दौरान महिला अधिकारी द्वारा सहयोग नहीं करने के आरोप लगाए है.

पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा
Dilip Kumar Sharma/BBC
पुलिस अधिकारी थौनाओजम बृंदा

इंफ़ाल वेस्ट ज़िले के पुलिस अधीक्षक के मेघाचंद्र सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए बताया, "पहली बार काकचिंग थाने की टीम ने सोमवार रात 10 बजकर 20 मिनट पर सफेद रंग की एक वरना कार को रोककर उसकी जांच की थी. जिसकी जानकारी मुझे वहां के एसपी और कंट्रोल रूम ने देते हुए सभी जिले की सीमाओं पर अलर्ट करने का आग्रह किया था. हमने उसी अनुसार अपनी सभी चौकियों को अलर्ट कर दिया."

"उसके बाद उसी कार को लामफेल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रात 12 बजकर 50 मिनट पर देखा गया. कार पर टिंटेड शीशे लगाए हुए थे. पूछताछ के दौरान वे लोग अपने ट्रैवल से संबंधित किसी तरह की जानकारी पुलिस को नहीं दे रहे थे. इस तरह एक घंटे बाद वहां अतिरिक्त पुलिस की टीम बुलाई गई. उन लोगों ने इंफ़ाल ईस्ट से काकचींग तक ट्रैवल करने में चार घंटे का वक्त लगाया था जो कि महज डेढ़ घंटे का सफ़र है. वे खुद एक पुलिस अधिकारी होते हुए कोरोना संकट के समय अपने दोस्तों के साथ इस लॉकडाउन में पांच ज़िले में घूमती रही."

पुलिस अधिकारी बृंदा का हाल ही में नार्कोटिक्स एंड अफ़ेयर्स ऑफ़ बार्डर ब्यूरो से तबादला कर दिया गया था लेकिन उन्हें अभी तक कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी गई है.

BBC Hindi
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English summary
Manipur: Women police officers accusing the Chief Minister were about to be arrested?
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