'लोगों के चेहरे पर डर, मणिपुर में भयानक स्थिति', हिंसा पीड़ितों से मिला विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल
मणिपुर में हिंसा का दौर जारी है। इस बीच शनिवार को विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा, जिसमें 16 दलों के 21 सांसद शामिल हैं। वो इंफाल पहुंचने के बाद दो टीमों में बंटे और जमीनी हालात का जायजा लिया।
एक टीम चुराचांदपुर जिले में स्थित राहत कैंप में पहुंची और वहां मौजूद लोगों का हाल जाना। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन के मुताबिक वहां लोगों का चेहरा देखकर पता चलता है कि वे डरे हुए हैं। इन लोगों को सरकार पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है। राज्य में बहुत भयानक स्थिति पैदा हो चुकी है।

वहीं टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि लोग सोच रहे हैं कि हम घर कब जाएंगे। भारत सरकार को एक प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए था, उन्होंने मना कर दिया इसलिए विपक्षी दलों के गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल यहां आया है।
बदलाव का दिया आश्वासन
शिविर का दौरा करने के बाद आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि हमने यहां राहत शिविर में कई लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि स्थिति में बदलाव आएगा और हम सभी काम कर रहे हैं।
पूर्व सीएम रहे मौजूद
वहीं मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। साथ ही उनको हालात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोग तीन महीने से अपने घरों से बाहर हैं। सरकार को इस पर स्थिति साफ करनी चाहिए। वो चाहते हैं कि मणिपुर के सीएम इस्तीफा दें।
सीबीआई ने शुरू की जांच
वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार भी एक्शन में है। दो महिलाओं को नग्न घुमाने के मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जो शनिवार से शुरू हो गई। केंद्र ने 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई को जांच सौंपने की जानकारी दी थी। इस मामले में कोर्ट भी राज्य और केंद्र सरकार को फटकार लगा चुका है। चीफ जस्टिस ने साफतौर पर कहा था कि अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती, तो कोर्ट की ओर से सख्त कदम उठाया जाएगा।












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