मणिपुर में फिर हालात खराब, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, भेजी जाएंगी CAPF की 50 और कंपनियां
मणिपुर में एक बार फिर जातीय हिंसा के चलते अशांति की स्थिति बन गई है। इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व में कर्फ्यू लगाए जाने के साथ मणिपुर सरकार, सचिवालय उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों सहित संस्थानों, कॉलेजों को मंगलवार तक बंद रखने की घोषणा की है। इस बीच गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद हिंसक गतिविधियों को लेकर सख्त एक्शन लिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 50 और कंपनियां भेजने का निर्णय लिया है।
केंद्र ने मणिपुर को लेकर यह फैसला जिरीबाम में हिंसा भड़कने के बाद लिया है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने बीते हफ्ते ही केंद्रीय बलों की 20 टुकड़ियां भी भेजी थी। जिनमें 15 टुकड़ी सीआरपीएफ जवानों की और 5 टुकड़ी बीएसएफ जवानों की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में सीआरपीएफ की 50 अतिरिक्त कंपनियां भेजने का फैसला किया है। ये अतिरिक्त टुकड़ियां अगले सप्ताह मणिपुर भेजी जा सकती हैं। इससे पहले गृह मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी एक निर्देश के बाद एजेंसी ने इन मामलों को मणिपुर पुलिस से अपने हाथ में ले लिया। बता दें कि मणिपुर में हाल हुई तीन हिंसक गतिविधियों के कारण फिर से हालत खराब हुए हैं।
पहला मामला 8 नवंबर, 2024 को जिरीबाम इलाके में सशस्त्र आतंकवादियों द्वारा एक महिला की हत्या के संबंध में जिरीबाम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। जबकि दूसरा मामला 11 नवंबर, 2024 को बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जो सशस्त्र आतंकवादियों द्वारा जिरीबाम के जकुराधोर करोंग में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पोस्ट (ए-कंपनी, 20 वीं बटालियन) पर हमले से जुड़ा था। जबकि तीसरा मामला 11 नवंबर, 2024 को बोरोबेक्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जो बोरोबेक्रा क्षेत्र में घरों को जलाने और नागरिकों की हत्या से जुड़ा था।
इससे पहले रविवार को, मणिपुर में जारी हिंसा एक बार फिर बढ़ गई, जिसके कारण मणिपुर पुलिस को इंफाल पश्चिम और इंफाल पूर्व दोनों जिलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। छह शव मिलने के बाद कर्फ्यू घोषित कर दिया गया। इसके अलावा सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं।
वहीं मणिपुर हिंसा को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हित साधने के लिए हिंसा को नियंत्रित करने के लिए केंद्र के ओर से पूरे प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने मीडिया से कहा, "सभी जानते हैं कि मणिपुर में क्या हो रहा है। प्रधानमंत्री अभी तक वहां नहीं गए हैं. मैं मणिपुर गया हूं. हमने सरकार से हिंसा रोकने को कहा है, क्योंकि हम प्यार, भाईचारा की बात करते हैं, जबकि किसी के पास निहित स्वार्थ है। गृह मंत्री को अपना काम करना चाहिए, लेकिन किसी कारण से वह अपना काम नहीं कर रहे हैं। बीजेपी के लोग नफरत फैलाते हैं, इसलिए आग लगती है।"












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