मणिपुर सरकार का बड़ा फैसला, हिंसाग्रस्त राज्य में 25 जून तक इंटरनेट सेवाएं बंद
Manipur Violence: मणिपुर में 3 मई को भड़की दो समुदायों में आरक्षण को लेकर हिंसा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब तक इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
Manipur Violence: मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय में आरक्षण को शुरू हुई हिंसा की आग डेढ़ महीने से लगातार भड़क रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अपील का भी कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हिंसाग्रस्त राज्य में अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर लगा प्रतिबंध 25 जून तक बढ़ा दिया है।
आपको बता दें कि मणिपुर हिंसा की आग को शांत करने के लिए हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य का दौरा भी किया था। उस वक्त शाह ने प्रदर्शनकारियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की थी। हालांकि, शाह की अपील की कुछ असर शुरुआत में हुआ। करीब 140 प्रदर्शनकारियों ने हथियार सरेंडर किया था। लेकिन, आग बुझने का नाम नहीं ले रही है।

10 विपक्षी राजनीतिक दलों ने पीएम को लिखा खत
वहीं, हिंसा को लेकर कांग्रेस समेत कुल 10 विपक्षी राजनीतिक दलों ने पीएम मोदी को एक लेटर लिखा है। जिसमें इस जातीय हिंसा को शांत करने और हल तलाशने की मांग की गई है। साथ ही आरोप लगाए गए हैं कि बांटो और राज करो की राजनीति पर बीजेपी काम कर रही है। राज्य के सीएम को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
अब तक 110 से अधिक की मौत
मालूम हो कि इस जातीय हिंसा की आग में 110 से ज्यादा लोग जलकर जान गंवा चुके हैं। बीती 3 मई को मेइती समुदाय ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला। जिसमें हिंसक झड़प हुई। इस हिंसा में 110 से ज्यादा की मौत हुई, जबकि 250 से ज्यादा घायल हुए।












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