चुनावी दाल में ममता बनर्जी ने लगाया ग्लैमर का तड़का

Mamata Banerjee brings glamour in Election war
लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के साथ ही पूरे देश की नजरें अब देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका जवाब तलाशने में लग गई हैं। सभी पार्टियां अपने-अपने तरीकों से वोटर्स को लुभाने में लग गई हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और सत्‍ताधारी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी भी अब बदलते दौर के साथ अपने वोटर्स को लुभाने की सभी तरह कोशिशें कर रही हैं। पहले ममता बनर्जी अन्‍ना हजारे को अपने साथ लेकर आईं और उन्हें अपनी पार्टी का ब्रांड अम्बेसडर बनाया, अब वह अपने वोट बैंक को पश्चिम बंगाल के मई मशहूर नामों के साथ अपनी ओर खींचने की तैयारी में हैं।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी हुई 42 उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट तो कम से कम यही कहती है। साल 2011 में जब ममता ने यहां हुए विधानसभा चुनावों में तीन दशकों से ज्‍यादा समय से सत्‍ता पर काबिज मार्क्‍सवादी पार्टी को हराया, तो एक इतिहास बन गया था। दीदी की इस बार फिर से इतिहास को दोहराना चाहती हैं और इस मकसद को पूरा करने के लिए कभी जनता का चेहरा रही दीदी अब जनता के बीच मशहूर लोगों का सहारा ले रही हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्‍या इस बार लोकसभा चुनावों में वोटर्स पर दीदी का वही जादू नजर आए गा या फिर वह दीदी की पार्टी के लिए वोट करते समय थोड़ा सोचेंगे।

फिर से इतिहास बनाने की तैयारी

मशहूर फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया, एक जाने-माने एकेडमिक, कलाकारों, बंगाली गायकों और कुछ और नामों से सजी इस लिस्‍ट के साथ ही दीदी को लोकसभा चुनावों के दौरान सफलता मिलेगी यह 16 मई को पता चलेगा। पिछले कई सालों का राजनीतिक इतिहास खुद में समेटे ममता ने इस लिस्‍ट में कई ऐसे नामों को जगह दी है जिन्‍हें राजनीति का जरा भी अनुभव नहीं है, लेकिन उनकी लो‍कप्रियता जनता में कहीं ज्‍यादा है। साफ है कि उन्‍होंने इस लिस्‍ट के जरिए चुनावी माहौल को एक नया रंग देने का प्रयास तो किया ही है।

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पांच चरणों में चुनाव

पश्चिम बंगाल में पांच चरणों के तहत अप्रैल 17, 24, 30 और मई की 7 और 12 तारीख को पांच चरणों के तहत जनता वोट डालने जाएगी। यूं तो यह पहली बार नहीं है कि लोकसभा चुनावों में मशहूर हस्तियों के जरिए वोट हासिल करने की एक सोच किसी राजनीतिक पार्टी में नजर आई है बल्कि इससे पहले साल 2009 में बॉलीवुड की कई सेलिबब्रिटीज को वाटर्स के सामने पेश किया गया था। इससे अलग देश के सदर्न हिस्‍से में यह परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है। ऐसे में कहीं न कहीं यह बात तो साफ है कि इस कदम के जरिए दीदी वोटर्स के बीच अपनी पहुंच को और बड़े स्‍तर पर दर्ज करा एक नया इतिहास बनाने का सपना देख रही हैं।

बाकी पार्टियों के बराबर का स्‍तर

दीदी की पार्टी में भाजपा की तरह न तो ज्‍यादा लोकप्रिय नेताओं की भरमार है और न ही उनके पास कांग्रेस या फिर समाजवादी या फिर दूसरी पार्टियों की तरह वोटर्स का एक मजबूत आधार मौजूद है। पश्चिम बंगाल में जरूर ममता की पक मजबूत है, लेकिन देश के दूसरे हिस्‍सों में उन्‍हें संघर्ष करना पड़ सकता है। ऐसे में वह बड़े नामों पर थोडा भरोसा कर सकती है। हालांकि हो सकता है कि यह उनके लिए एक रिस्‍क फैक्‍टर भी साबित हो। इन सभी उम्‍मीदवारों ने दीदी के लिए अपनी वफादारी मीडिया के सामने जाहिर कर दी है।

जो नाम ममता बनर्जी की ओर से लिस्‍ट में जारी किए गए हैं उनमें से कुछ को लोग काफी अच्‍छे से पहचानते हैं, लेकिन कुछ की पहचान सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित है। सबसे खास बात है कि इन उम्‍मीदवारों को जिस संसदीय सीट से पार्टी की ओर से चुनाव लडाने की तैयारी की गई है वह अपने क्षेत्र का सही मायनों में नेतृत्‍व क रते हैं। इसका सबसे बडा उदाहरण है फुटबॉलर बाइचु्ंग भुटिया का दार्जिलिंग से चुनाव लडा जाना। भूटिया दार्जिलिंग के जरिए पिछले कई सालों से जारी गोरख जनमुक्ति मोर्चा की आवाज को और मुखर कर सकते हैं।

जयललिता से नहीं कोई समस्‍या

दीदी के इस कदम से पार्टी के कुछ नेता अंसतुष्‍ट नजर आ रहे हैं क्‍योंकि कहीं न कहीं इन हैं। बड़े नामों की वजह से उनका प्रभाव कम हो सकता है। कुछ दिनों पहले जब दीदी की ओर से कोलकाता की एक गायिका को उत्‍तरी जिले से उम्‍मीदवार बनाने का ऐलान किया गया था तो इसे लेकर कई नेताओं में नाराजगी की बात सामने आई थी। इन नेताओं का मानना है कि सेलिब्रिटीज शायद साधारण तबके के बीच जाकर एक बड़ा उदाहरण पेश नहीं कर पाऐंगे।

साथ ही कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर यह बड़े नाम चुनावों में जीत दर्ज नहीं करा पाए तो फिर पार्टी का प्रभाव भी कम हो सकता है। इस से अलग ममता बनर्जी को हमेशा से ही एक आम सोच वाली राजनेता के तौर पर माना जाता था और अपनी इस सोच को उन्‍होंने पार्टी के आदर्शों में भी ढालने का प्रयास किया है। लेकिन अब लगता है कि सेलिब्रिटीज के नाम का सहारा लेकर उन्‍होंने अपने ही आदर्शों को शायद थोडा पीछे छोड़ दिया है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने साल 2012 में खुद को यूपीए से अलग कर लिया था लेकिन राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एक लोकप्रिय नेता की महत्‍तवाकांक्षा को उन्‍होंने हमेशा ही जाहिर किया है।

ममता इस बात को भी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि उन्‍हें दूसरी लोकप्रिय महिला नेताओं जैसे जे जयललिता और मायावती या फिर दूसरी पार्टियों के साथ आने में भी कोई समस्‍या नहीं है। ममता ने ए क टीवी इंटरव्‍यू के दौरान यह बात कहकर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने का दावा भी शायद कर दिया था। विशेषज्ञ इस बात की भी आशंका लगा रहे हैं कि ममता का अति आत्‍मविश्‍वास पार्टी के लिए खतरकनाक हो सकता है। वहीं दीदी इस बार लोकसभा चुनावों में कुछ बदले-बदले तेवरों के साथ पार्टी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर चुकी हैं।

Did You Know: ममता बनर्जी की उम्र 9 साल थी जब उनके पिता का देहांत हो गया। उन्होंने कांग्रेस (आई) पार्टी तभी ज्वाइन कर ली थी, जब वो स्कूल में पढ़ती थीं। यही नहीं कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते पार्टी में वो कई पदों पर काबिज हो चुकी थीं।

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