'धनखड़ को अंपायर की तरह निष्पक्ष रहना चाहिए, हमे बोलने का मौका नहीं मिलता',अविश्वास प्रस्ताव पर खड़गे का बयान
Mallikarjun Kharge's Reaction On No-Confidence Motion: राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। खड़गे ने कहा, "अध्यक्ष को किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए, वे एक अंपायर की तरह होते हैं। जब सदन में नेता प्रतिपक्ष जेपी नड्डा बोलते हैं, तो उन्हें 5-10 मिनट का समय मिलता है, वहीं हम लोग बोलने के लिए हाथ उठाते हैं और हमारी माइकें बंद कर दी जाती हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं अकेला नहीं हूं जिसने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन अगर केवल मुझे दोषी ठहराया जाता है तो यह अन्याय है।" खड़गे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी पहले से तैयार होकर आती है ताकि सदन को स्थगित किया जा सके।

खड़गे ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "मैं अपनी आत्म-सम्मान और संविधान के तहत हमें जो हक मिलना चाहिए, उसके लिए लड़ता रहूंगा।"
#WATCH | Delhi | On the No-Confidence motion against Rajya Sabha Chairman Jagdeep Dhankhar, Rajya Sabha LoP and Congress National President Mallikarjun Kharge says, “The Chairman is an umpire and he should not take anyone’s side. When the Leader of the House JP Nadda speaks, he… pic.twitter.com/ngW1egOJT6
— ANI (@ANI) December 13, 2024
राज्यसभा में हुआ जोरदार हंगामा, विपक्ष ने दिया अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस
शुक्रवार को संसद में संविधान पर पक्ष-विपक्ष की चर्चा शुरू होने से पहले राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिसे भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर जवाब दिया। इसी बीच, धनखड़ और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस हुई।
धनखड़ का बयान: विपक्ष ने संविधान की धज्जियां उड़ा दी हैं
सभापति जगदीप धनखड़ ने गुस्से में आकर कहा, "मैंने बहुत सहा है। मैं किसान का बेटा हूं, मैं झुकता नहीं हूं। विपक्ष ने संविधान की धज्जियां उड़ा दी हैं।"
खड़गे का जवाब: "आप सम्मान नहीं करते, तो हम भी नहीं करेंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा, "आप हमारी पार्टी के नेताओं का अपमान करते हैं। आपका काम सदन चलाना है, हम यहां आपकी तारीफ सुनने के लिए नहीं आए। आप किसान के बेटे हैं, तो मैं मजदूर का बेटा हूं। आप सम्मान नहीं करते तो मैं आपका सम्मान क्यों करूं?"
सदन स्थगित, खड़गे को बुलाया गया केबिन में
इसके बाद, सभापति ने राज्यसभा को सोमवार, 16 दिसंबर सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दोपहर 12:15 बजे अपने केबिन में मिलने के लिए बुलाया।
अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास: दूसरी बार पेश हुआ नोटिस
धनखड़ के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव दूसरा नोटिस है। इससे पहले, 4 अगस्त 2022 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई थी। 2022 में वह देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने थे और इससे पहले पश्चिम बंगाल के गवर्नर रहे थे।
विपक्षी दलों ने 60 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ दिया नोटिस
विपक्षी दलों ने 60 सांसदों के दस्तखत से यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें कांग्रेस, टीएमसी, आप, सपा, डिमके, सीपीआई, सीपीआई-एम और आरजेडी जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि सभापति जगदीप धनखड़ पक्षपाती तरीके से सदन चलाते हैं और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं देते।
पार्टी लाइन से ऊपर खड़गे-धनखड़ की बहस
शीतकालीन सत्र के पहले दिन भी राज्यसभा में सभापति और लीडर ऑफ अपोजिशन मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बहस हो चुकी थी। उस समय धनखड़ ने खड़गे से कहा था कि "हमारे संविधान को 75 साल पूरे हो रहे हैं और उम्मीद है कि आप इसकी मर्यादा बनाए रखेंगे।" इस पर खड़गे ने जवाब दिया था, "इन 75 सालों में मेरा भी योगदान 54 साल का है, तो आप मुझे मत सिखाइए।"
अगस्त में मानसून सत्र में भी हुआ था हंगामा
इसके पहले, अगस्त में मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी की थी। उस समय सपा सांसद जया बच्चन और जगदीप धनखड़ के बीच बहस हुई थी, जिसमें जया बच्चन ने सभापति की टोन पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद, विपक्षी दलों ने धनखड़ को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की योजना बनाई थी। उस समय 87 सदस्यों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।
कांग्रेस और विपक्षी दलों की बढ़ी नाराजगी
राज्यसभा में यह ताजा विवाद और हंगामा दर्शाता है कि विपक्षी दलों की नाराजगी राज्यसभा के सभापति से बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि धनखड़ अपनी भूमिका में निष्पक्ष नहीं रह पा रहे हैं और सदन के संचालन में पक्षपाती रवैया अपना रहे हैं।












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