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पीपीली लाइव के सह निर्देशक महमूद फारूकी को SC ने दी राहत, वकील से पूछा- रेप के बाद 'आई लव यू' कौन कहता है?

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नई दिल्‍ली। अमेरिका की एक स्‍टूडेंट से बलात्‍कार के मामले में बरी हो चुके बॉलीवुड फिल्‍म 'पीपली लाइव' के सह-निर्देशक महमूद फारूकी को एक और बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी स्‍टूडेंट की याचिक को खारिज को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले की तारीफ की है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जोर-जबरदस्‍ती का कोई सबूत नहीं था। कोर्ट ने लड़की के ईमेल का हवाला देते हुए पीड़ित पक्ष के वकील से यह भी पूछा कि आपने ऐसे कितने मामले देखे हैं जब वारदात के बाद पीड़ित 'आई लव यू' बोले। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यह काफी अच्छे तरीके से लिखा गया फैसला है। सितंबर 2017 में दिल्ली की हाईकोर्ट ने कमाल फारुकी को बरी कर दिया था। विस्‍तार से जानिए पूरा मामला

पहले जान लीजिए क्‍या था पूरा मामला

पहले जान लीजिए क्‍या था पूरा मामला

19 जून 2015 को एक महिला ने फारूकी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि फारूकी ने 28 मार्च 2015 को सुखदेव विहार स्थित अपने आवास पर उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस को दर्ज कराए गए बयान में महिला ने खुद को कोलंबिया विश्वविद्यालय में शोध कर रही छात्रा बताया था। महिला के आरोपों के बाद फारूकी को हिरासत में लिया गया था। पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई पूछताछ में फारूकी ने रेप की घटना से साफ इनकार कर दिया था।

साकेत कोर्ट ने पहले सुनाई थी 7 साल की सजा

साकेत कोर्ट ने पहले सुनाई थी 7 साल की सजा

फिल्म 'पीपली लाइव' के सह निर्देशक महमूद फारूकी को विदेशी महिला से रेप (376) के जुर्म मे साकेत कोर्ट ने 7 साल सजा सुनाई गई थी। साथ ही दोषी पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था। सरकारी वकील ने कोर्ट से गुजारिश की थी कि इस मामले में फारूकी को अधिकतम उम्रकैद की सजा दी जाए क्योंकि दोषी ने पीड़िता को शारीरिक ही नहीं बल्कि वो मानसिक आघात दिया है जो उसे ताउम्र झेलना पड़ेगा।

क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में

क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि फारूकी और रेप का आरोप लगाने वाली महिला के बीच का संबंध दोस्त से कहीं ज्यादा था। सबूत दिखाते हैं कि दोनों एक अंतरंग रिश्ते में थे और महिला ने स्वीकार किया है कि उसने पहले फारूकी को चूमा था और उनके साथ शराब भी पी थी। हालांकि बेंच ने यह भी साफ किया कि साथ बैठकर पीने का मतलब यह नहीं कि महिला ने अपनी सहमति दी, लेकिन ऐसा होना दोनों के बीच के संबंधों की प्रकृति को जरूर दिखाता है।

हाई कोर्ट ने क्‍या कहा था फैसले में

हाई कोर्ट ने क्‍या कहा था फैसले में

हाई कोर्ट ने फारूकी के मामले फैसला सुनाते हुए कहा था कि हर बार नो का मतलब नो नहीं होता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे भी कई उदाहरण हैं, जब महिला द्वारा एक कमजोर 'नो' का मतलब 'यस' भी हो सकता है। कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह बात अब भी संदेह के दायरे में है कि महिला द्वारा बताया गया वाकया हुआ भी था या नहीं। और यदि हुआ भी था तो इस पर भी संदेह है कि ऐसा महिला की मर्जी के बगैर हुआ था।'

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English summary
The Supreme Court today said the Delhi HC acquitting the film 'Peepli Live' director of rape was an "extremely well decided case" and dismissed an appeal challenging that verdict.
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