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महाराष्‍ट्र: सीएम उद्वव ठाकरे एनसीपी प्रमुख शरद पवार की क्यों कर रहे इतनी बटरिंग? जानें वजह

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बेंगलुरु। महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे आज कल एनसपी प्रमुख शरद पवार की जमकर तारीफ कर रहे हैं। हर मौके पर ठाकरे शरद पवार के नाम की माला जप रहे हैं। विगत बुधवार को मराठा साम्राज्य के संस्‍थापक छत्र‍पति शिवाजी महाराज के 390 वीं जयंती के अवसर पर सीएम ठाकरे ने कहा कि शिवसेना और राकांपा को पहले ही साथ आना चाहिए था। उन्‍होंने कहा कि जनता के विकास के लिए हम एकजुट हुए हैं।

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इतना ही नहीं सीएम ठाकरे ने कहा कि ,'हम, अजीत-दादा (पवार) और मैं (शिवसेना) अनावश्यक रूप से कई वर्षों से अलग क्यों रहे? हमें पहले बहुत एकजुट होना चाहिए था। लेकिन अब जब हम एक साथ हैं, मैं लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हम (महाविकास अघाड़ी सरकार) तब तक आराम नहीं करेंगे, जब तक कि हम राज्य का विकास नहीं करते हैं।" अब ऐसे में सवाल उठता हैं कि महाराष्‍ट्र के सीएम शरद पवार की अचानक बटरिंग क्यों कर रहे हैं, क्या इसके पीछे उन्‍हें कोई डर सता रहा हैं या कोई उनका स्‍वार्थ हैं ?

तीनों दलों के बीच मचा हुआ है घमासान

तीनों दलों के बीच मचा हुआ है घमासान

बता दें महाराष्ट्र में शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर सरकार तो बना लिया लेकिन तीनों दलों में कई मुद्दों को लेकर मतभेद साफ दिखाई दे रहा है। कुछ मुद्दों को सरकार में एक बार भी घमासान शुरु हो चुका हैं। सीएए और एनपीआर समेत कई मुद्दों पर अब शिवसेना से कांग्रेस के एनसीपी भी नाराज चल रही हैं। पिछले कुछ दिनों में सीएम उद्वव ठाकरे द्वारा लिए गए कई निर्णयों के कारण शिवसेना का एनसीपी से मतभेद और बढ़ चुका हैं।

सीएम ठाकरे को सता रहा ये डर

सीएम ठाकरे को सता रहा ये डर

वो चाहे भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच हो या डाटा संशोधन कानून पर उद्धव ठाकरे का रुख या स्वतंत्र वीर सावरकर का मुद्दा हो, इन विषयों को लेकर शिवसेना का एनसीपी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच एनआईए को सौंपने का शरद पवार विरोध कर चुके हैं तो वही एनसीपी और कांग्रेस के विपरीत उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून और एनपीआर का समर्थन किया है। कांग्रेस पहले ही कई मुद्दों पर गठबंधन से बाहर होने के लिए शिवसेना को धमका चुकी हैं। लेकिन शिवसेना को भी पता हैं कि शरद पवार के कारण ही कांग्रेस अभी तक टिकी हुई हैं। चूंकि उद्वव ठाकरे को पता हैं कि उन्‍होंने राज्य में सीएए और एनपीआर लागू करके कांग्रेस के साथ एनसीपी प्रमुख को भी नाराज कर दिया हैं। इस नाराजगी के चलते एनसीपी भी गठबंधन से बाहर न हो जाएं यह डर हर पल सीएम ठाकरे को सता रहा हैं। ये बहुत बड़ा कारण हैं कि वो शरद पवार की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं।

ये है शिवसेना का स्‍वार्थ

ये है शिवसेना का स्‍वार्थ

गौरतलब हैं कि अप्रैल महीने में महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटें खाली हो जाएंगी इन 7 सीटों पर अपने अपने दल से राज्यसभा सांसद भेजने के लिए सभी पार्टियां कोशिश कर रही हैं। महाराष्ट्र में राज्यसभा की कुल 19 सीटें हैं। महाराष्ट्र विधानसभा की 288 विधायकों वाली सदन में एक राज्यसभा सदस्य को चुनने के लिए 37 विधायकों की वोट की जरूरत होती हैं। इस वक्त महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के पास 105 विधायक हैं। भाजपा के 105 विधायक और अन्य छोटे दलों के विधायकों के साथ भाजपा 3 लोगों को राज्यसभा भेज सकती है। वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के 56 विधायक, एनसीपी के 54 विधायक जबकि कांग्रेस के 44 विधायक हैं। इन तीनों दलों सहित छोटे दलों को मिलाकर बना महाराष्ट्र विकास आघाडी कुल 4 लोगों को राज्यसभा भेज सकता है। मौजूदा समीकरण के मुताबिक शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के 1-1 राज्यसभा सांसद होंगे लेकिन चौथा राज्यसभा सांसद महाराष्ट्र विकास आघाडी के किस दल का होगा इस पर खींचतान जारी है। शिवसेना की ये कोशिश हैं कि वो गठबंधन में शामिल एनसीपी को मना कर अपनी पार्टी को राज्यसभा भेजे।

शरद पवार की इस बात को नहीं कर सकते नजरंदाज

शरद पवार की इस बात को नहीं कर सकते नजरंदाज

उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा कि सीएए और एनआरसी अलग हैं। इससे किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा था कि वे एनपीआर पर रोक नहीं लगाएंगे। इसमें कुछ भी विवादित नहीं है। ठाकरे ने साफ किया कि राज्य में एनआरसी लागू नहीं किया जाएगा। इसके बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि यह उद्धव का नजरिया हो सकता है। जहां तक हमारा सवाल है हमने इसके खिलाफ वोट किया था। राज्य में गठबंधन की सरकार है। पार्टियों के विचार में अंतर हो सकता है, लेकिन जहां तक फैसला लेने का सवाल है, तो तीनों पार्टियां बैठकर किसी मुद्दे पर फैसला लेंगी। बता दें कि पिछले साल दिसंबर में संसद के शीतकालीन शत्र के दौरान लोकसभा में सीएए के पक्ष में वोट दिया था, वहीं राज्यसभा में उसने वॉकआउट कर दिया था।

भीमा कोरेगांव मामला

भीमा कोरेगांव मामला

महाराष्ट्र सरकार ने भीमा कोरेगांव मामले की जांच केंद्र सरकार को सौंपने के इच्छुक थी। वह चाहती थी कि इस मामले की जांच एनआइए करे, लेकिन दबाव के कारण बाद में उसे झुकना पड़ा। पवार ने उद्धव ठाकरे के इस फैसले के खिलाफ सार्वजनिक तौर नाखुशी जाहिर की। इसके बाद ठाकरे को अपना फैसला बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह मामला दलितों के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में हम इसकी जांच केंद्र को नहीं करने देंगे। यलगार परिषद केस और भीमा कोरेगांव अलग-अलग हैं। एनआइए केवल यलगार परिषद केस की जांच करेगी, भीमा कोरेगांव मामले की नहीं।

इंदिरा गांधी को लेकर जीतेंद्र अव्हाड और अशोक चह्वाण भिड़े

इंदिरा गांधी को लेकर जीतेंद्र अव्हाड और अशोक चह्वाण भिड़े

पिछले महीने बीड जनपद में सीएए के विरोध में एक रैली को संबोधित करते हुए एनसीपी के नेता जीतेंद्र अव्हाड ने आपातकाल को लेकर इंदिरा गांधी की आलोचना की थी। अशोक चह्वाण ने इसे लेकर कहा था कि उनकी पार्टी के नेताओं का अपमान करनेवालों को उचित जवाब दिया जाएगा। अव्हाड ने कहा था कि इंदिरा ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की थी। बाद में उन्हें इसे लेकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरह से पेश किया गया।

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English summary
Maharashtra: Why is Uddhav Thackeray NCP chief Sharad Pawar doing so much buttering? know why?
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