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रेप के एक मामले में अदालत की टिप्पणी, सहमति से बने संबंध बलात्कार नहीं

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र के ठाणे में रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने कहा है कि सहमति से हुए सेक्स को रेप नहीं कहा जा सकता है। सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि इस केस में ये बात सामने आई है कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच संबंध सहमति से बने, बाद में उसने रेप की शिकायत दर्ज करा दी। ऐसे में इसे रेप नहीं कहा जाएगा। अदालत ने ये टिप्पणी करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

Maharashtra thane court statement rape case consensual relation is not rape

ठाणे के 56 साल के शख्स पर अपने ड्राइवर की पत्नी से बलात्कार का आरोप था। शिकायत में महिला ने 2014 में रेप का मामला दर्ज कराया था। उसने आरोप लगाया था कि उसे एक लॉज में बुला कर उससे बलात्कार किया गया। इसके बाद भी कई मौकों पर उसके साथ रेप हुआ। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि 2014 में महिला के पति की मौत के बाद भी आरोपी ने कई बार उससे बलात्कार किया, जिसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई स्थानीय अदालत में चल रही थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरआर वैष्णव ने बीते गुरुवार अपने आदेश में कहा कि आरोपी दिलीप श्रीधर पाटिल के खिलाफ लगे बलात्कार के आरोप साबित नहीं होते हैं।अभियोजन पक्ष के मुताबिक महिला का पति आरोपी के ड्राइवर के तौर पर काम करता था। आरोपी घर पर आता जात था, इसी के चलते महिला की उससे दोस्ती हो गई।

बचाव पक्ष के वकील की ओर से सवाल होने पर महिला ने ये स्वीकार कर लिया कि उसकी आरोपी से जान पहचान हो गई थी और उनके बीच सहमति से संबंध बने थे। महिला ने माना कि जब उसकी भाभी को इन संबंधों की जानकारी हुई तो उसने खुद के बचाने के लिए शिकायत दर्ज कराई। न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता के बयान से साफ है संबंध सहमति से बने, ऐसे में अदालत आरोपी को रिहा करती है।

कुछ समय पहले कुछ इसी तरह की टिप्पणी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन पार्टनर पर रेप का आरोप लगाने वाली महाराष्ट्र की एक नर्स के केस को खारिज करते हुए कहा था कि अपने नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में पुरुष के महिला से शादी करने में विफल रहने पर लिव-इन पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं है।

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English summary
Maharashtra thane court statement rape case consensual relation is not rape
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