महाराष्ट्र विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर कालिदास कोलंबकर का शिवसेना-कांग्रेस से भी है पुराना नाता
मुंबई। महाराष्ट्र में चल रहे सियासी ड्रामे पर आज उस वक्त पूरी तरह से पूर्ण विराम लग गया जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के साथ ही प्रदेश में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया और उद्धव ठाकरे के नाम पर एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस की साझा बैठक के दौरान मुहर लगा दी गई। बैठक में उद्धव ठाकरे को विधायक दल का नेता चुना गया, जिसके बाद वह 1 दिसंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इन सब के बीच आज भाजपा नेता कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है, जिन्होंने राजभवन में आज प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ ली।

तीनों ही दलों में रह चुके हैं
दरअसल इससे पहले मांग उठ रही थी कि कांग्रेस के नेता को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए, लेकिन देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया। इसके पीछ की वजह काफी दिलचस्प है। कालिदास भाजपा में आने से पहले शिवसेना में थे और उसके बाद वह कांग्रेस में गए थे। इन दोनों दलों में रहने के बाद वह भाजपा में आए थे, लिहाजा उनकी पैठ तीनों ही दलों में हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि बतौर प्रोटेम स्पीकर वह काफी प्रभावी तौर सदन को चला सकते हैं।

8 बार के विधायक
कालिदास आठ बार के विधायक हैं, जिन्होंने कांग्रेस का दामन थामने के लिए शिवसेना का हाथ छोड़ दिया था। इसी वर्ष वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। बता दें कि प्रोटेम लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है अस्थायी। प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति उस समय तक के लिए होती है जबतक कि विधानसभा के स्थायी स्पीकर व डेप्युटि स्पीकर का चयन ना हो जाए। इनके चयन से पहले प्रोटेम स्पीकर ही सदन के कामकाज को देखते हैं। यह पद अस्थायी होता है। प्रोटेम स्पीकर तमाम नवनियुक्त विधायकों को शपथ ग्रहण और स्पीकर के चयन में अहम भूमिका निभाते हैं। कालिदास कोलंबकर वडाला विधानसभा सीट से आते हैं, उन्हें एक बार राज्यपाल पद का भी उम्मीदवार बनाया गया था।

उद्धव ठाकरे बनेंगे सीएम
बता दें कि आज तीनों दलों की बैठक में उद्धव ठाकरे को एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना के विधायक दल का नेता चुना गया। महाविकास अघाड़ी के नेता और मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव ठाकरे के नाम के प्रस्ताव के पास होने के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि, राज्य में बदलाव की जरूरत थी। बालासाहेब ठाकरे का जिक्र करते हुए शरद पवार ने कहा- बालासाहेब काफी हाजिर जवाब थे। अगर आज वह होते तो बहुत ज्यादा खुश होते। सर्वसम्मति से उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है।












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