Maharashtra Crisis : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, Floor Test ही संकट का समाधान, जानिए शिवसेना ने क्या कहा

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट (maharashtra political crisis) पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट ही गतिरोध खत्म करने का एकमात्र रास्ता है।

नई दिल्ली, 29 जून : महाराष्ट्र में सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा ? इस सवाल का जवाब शायद सुप्रीम कोर्ट के फैसले में छिपा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में शक्ति परीक्षण की तस्वीर साफ होगी। इसी बीच बुधवार को महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट को लेकर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्री कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से ही क्राइसिस का समाधान किया जा सकता है। बता दें कि दर्जनों विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई में शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की महाविकास अघाड़ी सरकार अल्पमत में है, ऐसा दावा बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे एकनाथ शिंदे का है। राज्यपाल पहले ही उद्धव ठाकरे से बहुमत सिद्ध करने को कह चुके हैं। ऐसे में नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।

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सभी मुद्दों का समाधान सदन में

इसी बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पक्ष ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले की निंदा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकरे राज्य में ताजा घटनाक्रम के मद्देनजर कैबिनेट की बैठक कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर अस्तित्व का संकट है। शीर्ष अदालत ने कहा, महाराष्ट्र की राजनीति को उलझाने वाले सभी मुद्दों को निपटाने का एकमात्र तरीका सदन का पटल है।

राज्यपाल ने कहा- बहुमत साबित करें मुख्यमंत्री

शीर्ष अदालत में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से गुरुवार को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जेबी पार्डीवाला की अवकाश पीठ इस केस की सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा, अदालत विधायकों की अयोग्यता संबंधी याचिका पर अलग से विचार करेगी।

फ्लोर टेस्ट नहीं तो आसमान नहीं गिरेगा

महाराष्ट्र सरकार के वकील सिंघवी ने शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु की ओर से बहस करते हुए शक्ति परीक्षण के आदेश में राज्यपाल की 'सुपरसोनिक' (supersonic) गति के खिलाफ शिकायत की थी। सिंघवी ने कहा कि राकांपा के दो विधायक कोविड से पीड़ित हैं, जबकि कांग्रेस के दो विधायक विदेश में हैं। उन्होंने कहा, 'अगर कल फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ तो आसमान नहीं गिरेगा।'

शिंदे गुट की दलील- जल्द हो फ्लोर टेस्ट

सिंघवी ने कहा, स्पीकर के हाथ बांधकर फ्लोर टेस्ट का मार्ग प्रशस्त करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि या तो स्पीकर को अयोग्यता की कार्यवाही तय करने की अनुमति दें या फ्लोर टेस्ट को टाल दें। इस पर एकनाथ शिंदे धड़े की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा कि अयोग्यता की कार्यवाही या विधायकों का इस्तीफा फ्लोर टेस्ट में देरी का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में पहले कहा जा चुका है कि फ्लोर टेस्ट में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।

Floor Test पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल

एलेक्टोरल कॉलेज (electoral college) के बारे में बोलते हुए, सिंघवी ने कहा कि यह घोड़े के आगे गाड़ी रखने जैसा है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे खेमे के खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक फैसला नहीं सुनाया है। सिंघवी ने कहा कि इस समय फैसला अदालत को करना है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट का आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही निष्फल करने का प्रयास किया है। इस पर SC ने पूछा कि फ्लोर टेस्ट का ऑर्डर अदालती कार्यवाही को निष्फल (court proceedings infructuous) कैसे बना देता है ? कोर्ट ने पूछा कि क्या फ्लोर टेस्ट का समय तय करने के लिए कोई न्यूनतम समय सारिणी है?

पीठ ने पूछा कि फ्लोर टेस्ट अयोग्यता की कार्यवाही से कैसे संबंधित है। या अयोग्यता कार्यवाही करने के लिए स्पीकर की शक्तियों में शक्ति परीक्षण कैसे हस्तक्षेप करता है ? सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर सिंघवी ने कहा, "जो सदस्य पहले से ही अयोग्य हैं, उन्हें फ्लोर टेस्ट में भाग लेने की अनुमति कैसे दी जा सकती है ?"

कट जाएंगी लोकतंत्र की जड़ें

सिंघवी ने कहा कि कोई व्यक्ति जो पहले से ही 21 जून को अयोग्य ठहरा हुआ है, उसे कल मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, इस अदालत को ऐसी स्थिति से बचना चाहिए। "यह कुछ ऐसा करने की अनुमति देगा जो लोकतंत्र की जड़ को काटता है।"

संविधान की 10वीं अनुसूची पर सुप्रीम कोर्ट

इस पर SC ने कहा, अलग-अलग परिदृश्य हैं। जब अयोग्य ठहराने की स्पीकर की शक्ति को ही चुनौती दी गई है, तो क्या मानी गई अयोग्यता (deemed disqualificaion) अभी भी काम करेगी? अदालत ने कहा कि सभी एकमत हैं कि लोकतंत्र के हित में 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के उद्देश्य को मजबूत किया जाना चाहिए। इस पर कोई झगड़ा नहीं है। हर कोई इस बात पर सहमत है कि इस अदालत को 10वीं अनुसूची को मजबूत करना चाहिए।

अनिल देशमुख और नवाब मलिक पर सुप्रीम फैसला

इस पर शिवसेना के 34 बागी विधायकों द्वारा राज्यपाल को सौंपे गए एक पत्र का जिक्र करते हुए सिंघवी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार यह स्वयं सदस्यता छोड़ने के बराबर है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद एनसीपी नेताओं अनिल देशमुख और नवाब द्वारा फ्लोर टेस्ट में भाग लेने की अनुमति देने की याचिका पर भी आदेश पारित करेगा।

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