Maharashtra Election Result 2024: बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में झटके के बाद कैसे हासिल की ऐतिहासिक जीत

Maharashtra Election Results 2024 in Hindi: लोकसभा चुनावों में निराशा हाथ आने के बाद बीजेपी ने जिस तरह से महाराष्ट्र और हरियाणा में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, वह लाजवाब है। सिर्फ 6 महीनों में ही इतना व्यापक परिवर्तन राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए एक केस स्टडी की तरह है। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 400 पार का नारा दिया था, लेकिन सिर्फ 240 पर सिमट गई और अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा भी नहीं जुटा सकी। लोकसभा में सीटों की उसकी संख्या भी 303 से गिर गई।

लेकिन, पहले हरियाणा और अब महाराष्ट्र में पार्टी की बड़ी जीत से सत्ता में वापसी ने उसे फिर से पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर सेट कर दिया है। नतीजों से पता चलता है कि पार्टी स्थानीय मतदाताओं की भावनाओं को समझकर विरोधियों के एजेंडे को कुंद करना सीख चुकी है।

Maharashtra Election Result 2024

प्रदेश नेतृत्व पर फोकस
बीजेपी ने अपनी रणनीति में सबसे बड़ा बदलाव ये किया है कि उसने सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर दांव लगाना कम कर दिया है। वह पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं और उनके नाम पर पार्टी को वोट मिल रहे हैं, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र दोनों जगहों से उसने स्थानीय नेतृत्व को भी प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है।

हरियाणा में प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ चार रैलियां की थीं, वहीं महाराष्ट्र में 288 सीटों के बावजूद उनकी सिर्फ 10 रैलियां आयोजित की गई। सबसे बड़ी बात ये है कि 20 नवंबर के चुनाव के समय प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों के दौरे पर निकल गए थे।

विकास और योजनाओं को तरजीह
बीजेपी ने अपने प्रचार अभियान के दौरान विकास के कार्यों पर पूरा ध्यान लगाया है। हरियाणा से महाराष्ट्र तक वह इसी रणनीति पर चलती दिखी है। जैसे हरियाणा में कुछ ही महीने पहले सीएम बने नायब सिंह सैनी के नेतृत्व और उनके काम को सामने रखा, उसी तरह से महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुति की सरकार के कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा दिखाया।

आरएसएस का सहयोग
लोकसभा चुनाव में भाजपा को अच्छे परिणाम नहीं मिलने के पीछे आरएसएस की उससे दूरी बताई जाती है। लेकिन, इस चुनाव में पार्टी ने अपने वैचारिक संगठन के साथ बहुत ही सधे हुए अंदाज में पूरे तालमेल के साथ काम किया है और उसका परिणाम नतीजों में नजर आया है। हरियाणा में भी यही हुआ था।

महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पार्टी की भूल सुधार के सबसे बड़े अगुवा रहे, जिससे संघ ने पार्टी के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करना शुरू किया। महायुति के खिलाफ विपक्षी महा विकास अघाड़ी के नैरेटिव के खिलाफ 'सजग रहो' तरह के अभियान चलाने में इससे काफी सहायता मिली है।

पीटीआई सूत्रों के अनुसार आरएसएस स्वयंसेवकों की छोटी-छोटी टोलियों ने इसमें बहुत बड़ा योगदान दिया और गठबंधन अपनी बातों को राज्य के कोन-कोने तक पहुंचाने में सफल रहा। ये टोलियां छोटी-छोटी बैठकों के माध्यम से और स्थानीय नेटवर्क के जरिए घर-घर तक संदेश पहुंचाने में सफल रही है।

कोर एजेंडे पर भी रहा जोर
इनके दम पर बीजेपी अपने कोर एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में सफल रही, विकास के मुद्दे को भी आगे बढ़ाया और विपक्ष के अपने खिलाफ प्रचार की हवा भी कुंद करने में सफलता हासिल कर ली। इस दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के 'बटेंगे तो कटेंगे' और प्रधानमंत्री मोदी के 'एक हैं तो सेफ हैं' के नारों ने भी मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने का काम कर दिया।

चुनावी 'रेवड़ियों' ने भी कर दिया काम
पिछले साल नवंबर में कोई नहीं कह रहा था कि बीजेपी मध्य प्रदेश में सत्ता में लौट सकती है। लेकिन, लाडली बहन योजना ने उसे धमाकेदार जीत दिलाने में मदद की। महाराष्ट्र में भी चुनावों से कुछ समय पहले शिंदे सरकार ने माझी लाडकी बहिन योजना लॉन्च करके सियासी हवा का रुख ही मोड़ दिया। इस योजना की अनुमानित लाभार्थियों में 2.55 करोड़ या 55% महिलाएं हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार वोटरों को यह समझाने में सफल रहे कि अगर एमवीए की सरकार बनती है तो वह इन योजनाओं पर ताला लगा देगी। इस तरह से सूझबूझ के साथ तैयार की गई रणनीति ने भाजपा को लोकसभा चुनाव के बाद वाले माहौल से उबरने में बहुत सहायता की है और आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के तेवरों में भी इसका असर नजर आ सकता है।

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