भाजपा-शिवसेना में फूट: शिवसेना को बोनसई बनना मंजूर नहीं

गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना खुद को वरिष्ठ मानती है और खुद 171 सीटों पर लड़कर भाजपा को 117 सीटों पर लड़ने के लिए मजबूर करती है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस साझे की सियासत में नुकसान भाजपा को उठाना पड़ रहा है। इसलिए या तो उसे शिवसेना से नाता तोड़ लेना चाहिए या बराबरी की सीटों पर लड़ना चाहिए। लेकिन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फणनवीस ने कार्यकर्ताओं के शिवसेना विरोधी स्वर को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि भाजपा का शिवसेना के साथ वैचारिक गठबंधन है, जिसे सिर्फ सत्ता के लिए नहीं तोड़ा जा सकता। शिकायतों का निपटारा आपस में किया जा सकता है।
मुंबई के अंधेरी स्थित स्टेडियम में दिनभर नेताओं के औपचारिक प्रस्ताव सुन-सुनकर ऊब चुके कार्यकर्ताओं में तब जोश भर गया जब पूर्व विधान परिषद सदस्य मधु चह्वाण ने शिवसेना के साथ चल रहे गठबंधन पर सीधा प्रहार शुरू कर दिया। चह्वाण ने कहा, हमें बोनसई (गमले में लगाए जानेवाले बड़े वृक्ष) बनना मंजूर नहीं है। नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले 272 से अधिक सीटें देने का आह्वान देश की जनता से किया था। जिसका परिणाम है कि जनता ने भाजपा को 282 सीटें देकर पूर्ण बहुमत की सरकार बना दी। महाराष्ट्र में भी यदि भाजपा 145 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चले तो जनता पूर्ण बहुमत के साथ हमारी सरकार बनवा सकती है। भाजपा सिर्फ 40 फीसद की राजनीति कर पहले नंबर पर आने वाले दल का सपना नहीं देख सकती।












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