महायुति की तीनों पार्टियों अलग-अलग सर्वे करने की क्यों बना रही हैं योजना? क्या काम करेगी इनकी ये रणनीति

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति को लोकसभा चुनावों में तो झटका लगा है, लेकिन इससे आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर उनका हौसला टूटा नहीं है। गठबंधन के तीनों ही दल बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी इसके लिए विस्तृत सर्वे की तैयारी शुरू कर चुकी है, लेकिन अपने-अपने स्तर से।

महायुति गठबंधन के एक बड़े नेता ने कहा है कि तीनों ही पार्टियां राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों का अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग सर्वे करवाएंगी। इस सर्वे का मकसद संबंधित विधानसभा सीटों पर जमीनी स्थिति का आकलन करना होगा।

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सर्वे के नतीजों के आधार पर सीट बंटवारे की योजना
लेकिन, सत्ताधारी गठबंधन में शामिल तीनों दलों की ओर से स्वतंत्र सर्वेक्षण करवाने के पीछे एक खास रणनीति बताई जा रही है। महायुति के एक नेता का कहना है, 'यह सर्वे प्रत्येक विधानसभा सीट पर उनकी अपनी-अपनी (तीनों दलों की) जीत की संभावनाओं को समझना है। इसके बाद तीनों सर्वे के नतीजों की तुलना की जाएगी और आने वाले विधानसभा चुनावों में इसी आधार पर सीटों का बंटवारा किया जाएगा।'

सहयोगी दलों में सीटों की अदला-बदली की चर्चा
उस नेता की मानें तो सीटों के आवंटन में 'जीत की संभावना ही मानदंड होगी।' महायुति के ही एक सांसद का कहना है कि गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए सहयोगी दलों के बीच सीटों की अदला-बदली भी की जाएगी।

उसी सांसद का कहना है, 'इस समय हमारे पास करीब 200 सीटिंग एमएलए हैं। अगर कोई यह भी कहता है कि सीटिंग विधायकों को उनकी सीटें दी जाएं, तब भी हमारे पास 88 के लगभग सीटें बचती हैं, जिनपर फैसला लेना होगा।'

सहयोगी दलों के लिए सीटें छोड़ने को राजी होंगी पार्टियां?
इससे तो यही लगता है कि सर्वे करवा लेने के बावजूद भी कोई पार्टी अपनी सीट सहयोगी दलों को देने के लिए राजी हो जाएंगी, यह कहना मुश्किल है।

उदारहण के लिए अजित पवार की एनसीपी को लिया जा सकता है। लोकसभा चुनाव में पार्टी महज एक ही सीट जीती है, लेकिन विधानसभा में उसे ठोस संख्या में सीटें मिले, इसको लेकर वह अभी से माहौल बना रही है।

जैसे एनसीपी के एक नेता का कहना है, 'अगर हमें अहमदनगर और माढा सीटें (लोकसभा चुनाव में) मिलतीं तो हम जीत गए होते। नीलेश लंके अहमदनगर से लड़ना चाहते थे.....उन्होंने यह सीट अपने लिए या अपनी पत्नी के लिए मांगी थी, लेकिन यह सीट हमें नहीं मिल सकी।' लंके शरद पवार गुट में शामिल हो गए और बीजेपी यह सीट नहीं बचा सकी।

लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र की 48 सीटों में से महायुति गठबंधन सिर्फ 17 सीटें जीत सका है। भाजपा को 9, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 7 और अजित पवार की एनसीपी को 1 सीट मिली है।

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