Maharashtra Assembly से लोकायुक्त विधेयक 2022 पारित, अन्ना हजारे की 11 साल पुरानी डिमांड पूरी
Maharashtra Lokayukta Bill 2022 महाराष्ट्र विधानसभा से पास हो गया है। बता दें कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में भाजपा के समर्थन वाली सरकार सत्ता में है।

महाराष्ट्र विधानसभा से महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराया गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना-भाजपा सरकार ने Maharashtra Lokayukta Bill 2022 पारित कराने में कामयाबी पाई है। बता दें कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के मामलों के लिए अहम संवैधानिक पद के रूप में जाना जाता है। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक समेत कई राज्यों में लोकायुक्त पहले से हैं। अब महाराष्ट्र में भी लोकायुक्त की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

अन्ना हजारे की 11 साल पुरानी डिमांड पूरी
यह भी दिलचस्प है कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे गत 11 साल से लोकपाल की तर्ज पर लोकायुक्त की डिमांड कर रहे थे। उनकी अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों के आधार पर महाराष्ट्र लोकपाल विधेयक 2022 तैयार किया गया। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लोकायुक्त करप्शन से लड़ाई में अहम हथियार के रूप में काम करेगा।
लोकपाल के दायरे में मुख्यमंत्री और कैबिनेट
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक 2022 सोमवार को पेश किया गया था। बुधवार को ये अहम बिल महाराष्ट्र विधानसभा से पारित हो गया। कैबिनेट मंत्री दीपक केसरकर ने विधेयक पेश किया। विधेयक में मुख्यमंत्री और कैबिनेट को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के दायरे में लाने का प्रावधान है।
कैसे जांच करेगा लोकायुक्त
विधेयक के अनुसार, मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी जांच शुरू करने और सदन के सत्र से पहले प्रस्ताव लाने से पहले लोकायुक्त को विधानसभा की मंजूरी लेनी होगी। विधेयक के प्रावधानों में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के प्रस्ताव के लिए महाराष्ट्र विधानसभा के कुल सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के अनुमोदन अनिवार्य होगा।
सीएम से जुड़ी जांच की डिटेल नहीं मिलेगी
विधेयक में यह भी कहा गया है कि लोकायुक्त मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े ऐसे मामलों की जांच नहीं करेगा, जो आंतरिक सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित होंगे। Maharashtra Lokayukta Bill 2022 में यह भी प्रावधान है कि ऐसी किसी भी जांच को गुप्त रखा जाएगा और यदि लोकायुक्त इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शिकायत खारिज करने योग्य है, तो जांच के रिकॉर्ड प्रकाशित नहीं किए जाएंगे। किसी को भी ऐसी जांच के विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे।
लोकायुक्त में पदाधिकारी
प्रावधान के अनुसार, लोकायुक्त में एक अध्यक्ष होगा। अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति होगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट या बॉम्बे हाई कोर्ट का कोई जज होगा। लोकायुक्त में अधिकतम चार सदस्य होंगे, जिनमें दो न्यायपालिका से होंगे।
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नियुक्ति पैनल में कौन लोग होंगे
लोकायुक्त अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए चयन समिति में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधान सभा अध्यक्ष, विधान परिषद अध्यक्ष, विधान सभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता शामिल होंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित एक न्यायाधीश भी इस पैनल में शामिल होंगे।
अनुपस्थिति पर भी नियुक्ति अमान्य नहीं
विधानसभा में पेश विधेयक में यह भी कहा गया है कि चयन समिति में शामिल लोगों में अगर कोई भी अनुपस्थित रहता है तो लोकायुक्त अध्यक्ष या किसी सदस्य की कोई भी नियुक्ति अमान्य नहीं होगी।











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