महालक्ष्मी हत्याकांड: शरीर के 59 टुकड़ों में काटने का आरोपी कैसे पहुंचा बेंगलुरु से ओडिशा, कौन था मददगार

Mahalakshmi Case: तारीख थी 21 सितंबर 2024 और वक्त था दोपहर लगभग 3 बजे का। कर्नाटक के बेंगलुरु में एक बंद फ्लैट के अंदर 29 साल की महिला सेल्सवूमन महालक्ष्मी की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। लाश के टुकड़े-टुकड़े किए गए और उन टुकड़ों को घर में रखे फ्रिज के अंदर डाला गया। वहीं, कुछ टुकड़ें फर्श पर पड़े थे और खून से फ्लैट के फर्श का रंग लाल हो गया था।

इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद हत्यारोपी मुक्ति रंजन रॉय बेंगलुरु से ओडिशा के भद्रक भाग निकला था। इस बात का खुलासा पुलिस ने अपनी जांच में किया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महालक्ष्मी के हत्यारे मुक्ति रंजन रॉय के मददगार उसके दोनों भाइयों को हिरासत में लिया है। क्योंकि, उन्होंने हत्यारे मुक्ति को बेंगलुरु से ओडिशा के भद्रक तक भागने में मदद की थी।

Mahalakshmi case

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, हत्यारे मुक्ति के सबसे छोटे भाई स्मृति रंजन बेंगलुरु के हेब्बागोडी में काम करता है। उसने मुक्ति को शहर छोड़ने के लिए बाइक उपलब्ध कराई थी। जबकि दूसरे भाई सत्य रंजन रॉय ने मुक्ति को भद्रक भागने में मदद करने से पहले बेहरामपुर स्थित अपने घर में 9 दिनों तक शरण दी। दरअसल, इस बात का खुलासा तब हुआ जब बेंगलुरु और भद्रक जिला पुलिस ने मुक्ति के ओडिशा भागने के रास्ते का पता लगाया।

मामले का खुलासा होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने स्मृति रंजन को हिरासत में लिया है। सबसे छोटे भाई सत्या से ओडिशा और बेंगलुरु पुलिस ने भी पूछताछ की है। खबर के मुताबिक, उसने बताया कि मुक्ति महालक्ष्मी के साथ अपने रिश्ते और अपनी नौकरी से निराश था। उसने बेंगलुरु में टैक्सी चलाने के लिए कार खरीदने के लिए अपनी मां और भाइयों से पैसे भी मांगे थे।

सत्या ने कहा कि हम बहुत गरीब परिवार से हैं और हमारे पास पैसे नहीं हैं। उसने हमसे 1 लाख रुपए मांगे, लेकिन हममें से किसी के पास भी नहीं था। वह महालक्ष्मी से दूर जाना चाहता था। उन्होंने इस मामले की जांच कर रही बेंगलुरु और ओडिशा पुलिस टीमों को यह भी बताया कि मुक्ति ने महालक्ष्मी द्वारा ब्लैकमेल और धमकी दिए जाने की शिकायत की थी। इतना ही नहीं, हत्या के दिन उसने उन्हें चाकू दिखाकर धमकाया भी था।

29 वर्षीय महालक्ष्मी की हत्या 2 या 3 सितंबर को थी और शरीर के टुकड़ें करने के बाद मुक्ति ने अपने छोटे भाई स्मृति के सामने अपना अपराध स्वीकार किया था। स्मृति ने उससे से पुलिस आने के बाद भाग जाने के लिए कहा था। सत्या ने पुलिस को यह भी बताया कि मुक्ति ने ऐसा दावा किया था कि वह दो या तीन महीने बाद शव को ठिकाने लगा देगा।

हालांकि, उसके शरीर को चुपके से ठिकाने लगाने और कानून की गिरफ़्त से बचने की उसकी योजना तब धरी की धरी रह गई जब उसने अपनी मां के सामने अपराध स्वीकार कर लिया। जिसके बाद उसका शव भद्रक इलाके में एक पेड़ पर लटका मिला था। उसके शव के साथ एक सुसाइड नोट भी मिला था।

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