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लिव-इन रिलेशनशिप की वजह से 'संस्कार' शब्द भूल रहे लोग, मद्रास हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

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मद्रास, 02 जून। देश में लिव-इन रिलेशनशिप का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। अगर आप को नहीं पता कि यह लिव-इन किस चिड़िया का नाम है तो आज जान लीजिए। किसी भी जोड़े का बगैर शादी एक छत के नीचे रहने को लिव-इन में रहना कहते हैं। आज कल के जमाने में युवाओं के लिए यह अब आम हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी लिव इन रिलेशन को मान्यता दे दी है। बिना शादी कपल्स के अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को लेकर मद्रास हाई कोर्ट की तरफ से बड़ी टिप्पणी की गई है।

    Madras HC की बड़ी टिप्पणी, live-in relationship के चलते संस्कार शब्द भूल रहे लोग | वनइंडिया हिंदी
    लोग भूलते जा रहे हैं 'संस्कार'

    लोग भूलते जा रहे हैं 'संस्कार'

    मद्रास हाई कोर्ट का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप की मान्यता के कारण देश में शादीशुदा जिंदगी के 'संस्कार' लोग भूलते जा रहे हैं। न्यायालय ने मंगलवार को कहा, लिव-इन-रिलेशनशिप को मंजूरी देने वाले घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की शुरुआत के बाद 'संस्कार' शब्द का अर्थ खो सा गया है। वर्तमान पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि शादी एकदम से टूट जाने वाला कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, यह किसी व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली सांस्कारिक घटना होती है।

    विवाह कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं

    विवाह कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं

    बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई पर दी जिसमें एक सरकारी पशु चिकित्सक ने अपनी पत्नी द्वारा दायर किए गए आपराधिक कार्यवाही के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने अपने आदेश में कहा, 'वर्तमान पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि विवाह कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, बल्कि एक संस्कार है। बेशक घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत लिव-इन-रिलेशनशिप को मंजूरी मिलने के बाद 'संस्कार' शब्द का कोई अर्थ नहीं रह गया है।'

    घर के बाहर छोड़े 'अहंकार'

    घर के बाहर छोड़े 'अहंकार'

    जस्टिस एस वैद्यनाथन ने आगे कहा, 'पति-पत्नी को यह समझना चाहिए कि 'अहंकार' और 'असहिष्णुता' पैर में जूते की तरह हैं जिसे घर में प्रवेश से पहले बाहर उतार देना चाहिए। ऐसा ना करने से बच्चों को भी दयनीय जीवन यापना करना पड़ता है।' बता दें कि पत्नी द्वारा दर्ज घरेलू हिंसा के आरोप का सामने कर रहे पशु चिकित्सक को फिलहाल के लिए पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग से सेवा से निलंबित कर दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने 2015 में अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक का आवेदन दिया क्योंकि उसने उसे छोड़ दिया था।

    यह भी पढ़ें: बेड पर रोमांटिक एडवेंचर पड़ा कपल को भारी, संबंध बनाते वक्त सोया पति, महिला की हो गई मौत

    English summary
    Madras High Court announces live-in relationship says Marriages lost sacrament
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