SAPAKS इफेक्ट: क्या बीजेपी को सता रहा है वोट बैंक खिसकने का डर?

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनावी जंग काफी रोचक होने की उम्मीद है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 15 सालों में यहां सबसे कड़ा मुकाबला दिखाई देगा। क्या शिवराज अपना सिंहासन बचा पाएंगे या कांग्रेस उन्हें सत्ता से बेदखल करने में कामयाब होगी? ये आने वाले दिनों में मालूम हो जाएगा लेकिन इसके पहले उन तमाम समीकरणों पर नजरें टिकीं हैं जो इस चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है और उनमें से एक है 'सपाक्स'।

सपाक्स को लेकर बीजेपी परेशान

सपाक्स को लेकर बीजेपी परेशान

SAPAKS का मतलब है-सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक कल्याण समाज। सपाक्स लंबे समय से सवर्ण और गैर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के लिए संघर्ष कर रहा है। सपाक्स समाज पार्टी पर बीजेपी नजदीकी निगाह जमाए हुए है जिसने ऐलान किया था कि वो सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी का दावा है कि उसे 65 फीसदी लोगों का समर्थन प्राप्त है और अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी सरकार बनाने के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। वहीं, उज्जैन में हुई सपाक्स की ब्राह्मण रैली के बाद बीजेपी की चिंताएं बढ़ी नजर आती हैं कि उसका कोर वोटर पार्टी से अलग जा रहा है।

सपाक्स की धार कुंद करने में जुटी बीजेपी

सपाक्स की धार कुंद करने में जुटी बीजेपी

मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से महज दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के 52000 पुजारियों को मिलने वाले मानदेय में 300 फीसदी इजाफे की घोषणा कर उन्हें लुभाने की कोशिश की है। सपाक्स का प्रभाव मध्य प्रदेश में देखा जा सकता है। हालांकि इनके सरकार बनाने के दावे पर यकीन करना मुश्किल है लेकिन कांग्रेस और बीजेपी दोनों परेशान हैं कि इनके कारण जातीय समीकरण गड़बड़ हो गया है। हालांकि बीजेपी को फिर भी यकीन है कि ब्राह्मण वोटर लौट आएंगे और सपाक्स का प्रभाव उस स्तर पर नहीं दिखाई देगा।

ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी नहीं झेलना चाहती बीजेपी

ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी नहीं झेलना चाहती बीजेपी

वहीं बीजेपी इस नए राजनीतिक दल से निपटने के लिए अब पहले से ज्यादा सक्रीय दिखाई दे रही है। इनके प्रभाव को कम करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से विदिशा में मुलाकात भी की। व्यापमं में आरोपों का सामना कर रहे शर्मा की सीएम से दो सालो में ये पहली मुलाकात थी। सीएम ने इसके बाद अनुप मिश्रा और राकेश चतुर्वेदी के साथ भी बैठक की थी। चतुर्वेदी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था और वे मुरैना से सांसद हैं। बीजेपी सपाक्स के प्रभाव को कम करने के लिए पूरी तरह से एक्टिव दिखाई दे रही है खासकर ब्राह्मण वोटरों को अपने तरफ वापस में लाने का प्रयास भी पार्टी द्वारा किया जा रहा है।

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