मध्य प्रदेश संकट पर SC में सुनवाई जारी, कांग्रेस ने कहा- राज्यपाल कैसे कह सकते हैं कि हमारे पास बहुमत नहींं
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश संकट पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हो रही है। इस दौरान कोर्ट में कांग्रेस और बीजेपी के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस की तरफ से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि आज एक अजीब सी स्थिति है, मध्य प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और सबसे बड़ी पार्टी ने उस दिन विश्वास मत जीता था। उन्होंने राज्यपाल के आदेश पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि गवर्नर कैसे कह सकते हैं कि हमारे पास बहुमत नहीं है जबकि फ्लोर टेस्ट हुआ ही नहीं है।
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कांग्रेस की तरफ से दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि स्पीकर को देखना है कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक हैं या नहीं। कांग्रेस के वकील ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट का जो आदेश दिया वो असंवैधानिक है। उन्होंने इस मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजने की मांग की। साथ ही दिग्विजय सिंह को बेंगलुरु में हिरासत में लिए जाने का मामला भी उठाया।
दुष्यंत दवे ने कहा कि आज सुबह दिग्विजय सिंह वहां गए तो उनको हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया मानवता के सबसे बड़े संकट कोरोना वायरस से जूझ रही है, क्या इस वक्त फ्लोर टेस्ट कराना जरूरी है। कांग्रेस के वकील ने कहा कि स्पीकर सदन के मास्टर हैं जबकि राज्यपाल स्पीकर को नजरअंदाज कर रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि 16 बागी विधायक अभी भी बेंगलुरु में हैं और वे वापस नहीं आए हैं।
कांग्रेस की दलीलों पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब स्पीकर ने 6 लोगों का इस्तीफा स्वीकार किया तो क्या उन्होंने सभी 22 विधायकों पर अपने विवेक का इस्तेमाल किया, इसपर कांग्रेस के वकील ने कहा कि बुनियादी सवाल ये है कि राज्यपाल फ्लोर टेस्ट के लिए कैसे निर्देश दे सकते हैं। दुष्यंत दवे ने कहा कि इस्तीफे पर निर्णय लेने के लिए राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं है। बता दें कि मध्य प्रदेश के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और वे फिलहाल बेंगलुरु में हैं।












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