आयकर छापों के बाद मध्यप्रदेश में पलटवार करने के लिए बेताब कांग्रेस सरकार
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के इंदौर, भोपाल और अन्य शहरों में मारे गए छापों के बाद कांग्रेस आक्रामक मोड में आ गई है। प्रवीण कक्कड़ आयकर छापों को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं और उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि केन्द्र सरकार ने राजनैतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर उनके निवास, कार्यालय और व्यावसायिक ठिकानों पर छापे मारे। आधी रात को आयकर विभाग वालों ने गैरकानूनी रूप से घर का दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया और घर में बड़ी मात्रा में तोड़फोड़ की। परिवार के लोगों को भी उन्होंने परेशान किया।

ओएसडी का दावा, आयकर विभाग को मिले 2 लाख
मुख्यमंत्री के ओएसडी का दावा है कि छापे में आयकर विभाग को सभी परिवार जनों के पर्स आदि में से केवल 2 लाख रूपए में ही बरामद हो पाए। उनके बेटे सलिल कक्कड़ को आयकर विभाग पहले सम्मानित कर चुका है, क्योंकि सलिल और उनकी कंपनी ने सर्वाधिक आयकर जमा कराया था। ईमानदारी से आयकर जमा करने के बाद भी इस तरह की छापेमारी की कार्रवाई समझ से परे है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दायर इस याचिका पर पहले चरण का मतदान होने वाले दिन यानि 11 अप्रैल को सुनवाई होगी। प्रवीण कक्कड़ ने इसमें सीबीडीटी के चेयरमैन केन्द्रीय वित्त सचिव, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और डायरेक्टर इनकम टैक्स को पक्षकार बताया। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस एस.सी. शर्मा और जस्टिस वीरेन्द्र सिंह इस मामले में सुनवाई कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश की सरकार भी सक्रिय
आयकर छापों के बाद मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार भी सक्रिय हो गई है और पूर्ववर्तीय भाजपा सरकारों के कार्यों के खिलाफ जांच की तैयारियां चल रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (इकॉनामिक अफेंस विंग) में शिवराज सिंह सरकार के दौरान जारी किए गए ई-टेंडर, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की कथित गड़बड़ियां, फर्जी वेबसाइट्स और सांसद निधि के उपयोग में गड़बड़ी के मामलों की विवेचना का काम तेजी से चल रहा है।
कांग्रेस सरकार सांसद निधि में दुरूपयोग के मामलों को बड़े पैमाने पर उठाना चाहती है। इसके पीछे मंशा यही है कि यह बात साबित की जा सकें कि पूर्ववर्ती सरकार में सांसद निधि का जमकर दुरूपयोग हुआ। मतदाताओं को जो लाभ मिलना चाहिए था, वह लाभ नहीं मिल पाया। इसके माध्यम से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने पक्ष में माहौल बनाना चाहती है। कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में सबसे बड़ा घोटाला ई-टेंडरिंग का हुआ। 9 ऐसे टेंडरों को जांच के लिए चुना गया है, जिनमें अरबों का भुगतान हुआ था। टेंडरों में टेंपरिंग की भी जांच की जा रही है। जांच के लिए केन्द्र सरकार के ही कम्प्यूटर, इमरजेंसी रिस्पांस टीम सीईआरटी से जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ईओडब्ल्यू को कुछ और मामले सौंपे जा सकते हैं। इस बारे में ईओडब्ल्यू को लिखा जा चुका है। कांग्रेस सरकार जल्द ही पूर्ववर्ती सरकार के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज करवाने वाली है।

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में भी अनेक शिकायतें
भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय में भी अनेक शिकायतें कांग्रेस सरकार को मिली है। ये शिकायतें नियुक्तियों में मनमानी, खरीदी में भ्रष्टाचार, मनमाना वेतन देने और बिना काम के वेतन देने के मामलों को लेकर हैं। इन मुद्दों पर भी एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारियां की जा रही है। सांसद निधि में गड़बड़ियों की जांच का काम अभी शुरुआती स्तर पर है। दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। भाजपा के अनेक सांसदों ने सांसद निधि तो खर्च कर दी, लेकिन उसका उपयोग किसी काम में हुआ ही नहीं। इस मामले में भी कई शिकायतें राज्य सरकार के पास है, क्योंकि सांसद निधि को खर्च करने का काम कलेक्टर और जिला योजना समिति के माध्यम से होता है। कांग्रेस चाहती है कि इस मामले में तमाम जांचें शीघ्र से शीघ्र हो। ताकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर उसी तरह का दबाव बने, जैसा की चुनाव के ठीक पहले मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के छापा डालकर किया गया। यह बात और है कि चुनाव आयोग को सीबीडीटी की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि छापे का उद्देश्य आयकर चोरी करने वालों को पकड़ना और कानूनी कार्रवाई करना था। किसी को भी परेशान करना छापों का उद्देश्य नहीं था।












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