मध्य प्रदेश में इन 80 सीटों पर उलझेगा कांग्रेस की जीत का गणित!
मध्य प्रदेश की राह कांग्रेस के लिए इतनी आसान नहीं है। प्रदेश के अंदर 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में अपना खोया जनाधार पाने के लिए कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगाकर जुट गई है। इनमें मध्य प्रदेश को कांग्रेस के लिए सबसे अहम माना जा रहा है, जहां पार्टी बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ गठबंधन कर सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। लेकिन... मध्य प्रदेश की राह कांग्रेस के लिए इतनी आसान नहीं है। प्रदेश के अंदर 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जो कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं।

24 सीटों पर 25 साल से नहीं जीती कांग्रेस
द न्यू इंडिया एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 15 साल तक मध्य प्रदेश की सत्ता से दूर रही कांग्रेस के सामने 230 सीटों वाली विधानसभा में 80 से ज्यादा सीटें वो हैं, जो उसके जीत के लक्ष्य में रोड़ा बन रही हैं। इनमें से 50 सीटें ऐसी हैं, जिनपर कांग्रेस पिछले 2-3 विधानसभा चुनावों से लगातार हार का मुंह देख रही है। वहीं, 17 जिलों की 24 ऐसी सीटें हैं, जिनपर कांग्रेस पिछले 25 सालों में एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर पाई है। 1993 और 1998 में जब प्रदेश के अंदर कांग्रेस की सरकार बनी, तब भी पार्टी को इन 24 सीटों पर हार ही मिली।

हरसूद सीट पर 28 साल से भाजपा का कब्जा
जिन 24 सीटों पर कांग्रेस 1993 से जीत का स्वाद चखने में नाकाम रही है, उनमें हरसूद और खांडवा विधानसभा सीट भी शामिल हैं। हरसूद सीट से मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह 1990 से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं। इन 24 सीटों की सूची में भोपाल की गोविंदपुरा सीट भी है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व गृह मंत्री बाबूलाल गौर 1980 से लगातार जीतते हुए आ रहे हैं। इस सूची में इंदौर-2 विधानसभा सीट भी है, जहां से 1993 से 2003 तक कैलाश विजयवर्गीय और उनके बाद लगातार दो विधानसभा चुनावों से रमेश मेंडोला ने जीत का परचम लहराया है।

ये हैं एमपी की वो 24 सीटें
इनके अलावा इंदौर-4 विधानसभा सीट भी इन्हीं 24 सीटों में शामिल है, जहां से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर कैलाश विजयवर्गीय, लक्ष्मण सिंह गौर और उनकी पत्नी मालिनी गौर 1990 से लगातार बारी-बारी जीतते हुए आ रहे हैं। मालिनी गौर वर्तमान में इंदौर शहर की मेयर हैं। इस सूची में भिंड जिले की मेहगांव सीट, मुरैना जिले की अंबाह सीट, शिवपुरी जिले की शिवपुरी और पोहरी सीट, सागर जिले की रेहली और सागर सीट, सतना जिले की रायगांव और रामपुर बघेलान सीट, रीवा जिले की देवतालाब और त्योंथर सीट, सीहोर जिले की आष्टा और सीहोर सीट, अशोक नगर जिले की अशोक नगर सीट, छतरपुर जिले की महाराजपुर सीट, सिवनी जिले की बरघाट सीट, जबलपुर जिले की जबलपुर कैंट सीट और होशंगाबाद जिले की सोहागपुर सीट शामिल है।

जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश में कांग्रेस
इनके अलावा जिन 50 से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस पिछले 2-3 विधानसभा चुनावों से लगातार हार रही है, उनमें से अधिकतर सीटें मालवा-निमर, सेंट्रल मध्य प्रदेश और महाकौशल क्षेत्रों में आती हैं। इन सीटों पर कांग्रेस अलग-अलग रणनीति, जैसे- पिछला चुनाव हारने वाले उम्मीदवार, नए चेहरे, निर्दलीय उम्मीदवार या क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों पर दांव लगाने के बावजूद जीत का स्वाद नहीं चख पाई है। कांग्रेस की नई कमेटी में हाशिए पर चल रहे एक नेता का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इन सीटों पर भाजपा को हराया नहीं जा सकता, लेकिन पिछले सभी चुनावों में पार्टी ने इन सीटों पर कमजोर उम्मीदवारों का चयन कर भाजपा को एक प्रकार से वॉकओवर दे दिया। सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई टीम इन सीटों पर अब केवल जिताऊ उम्मीदवारों की ही चयन करने में जुटी है।












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