Covid-19: नोएडा-गाजियाबाद का भी बुरा हाल, कम जांच और रिपोर्ट में देरी ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली: देश में कोरोना की रफ्तार काफी तेज हो गई है। अब रोजाना 17 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है। हालात पर काबू पाने के लिए हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली, हरियाणा और यूपी के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही हैं।

गौतम बुद्ध नगर में कम जांच

गौतम बुद्ध नगर में कम जांच

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 25 जून तक गौतम बुद्ध नगर में कुल 1811 मामले सामने आए थे, जबकि गाजियाबाद में आंकड़ा 1175 था। दोनों ही जिलों में जमीन स्तर पर गृहमंत्री के आदेश का महत्व काफी कम है, क्योंकि जिलों ने राणनीति और ध्यान अपनी सीमाओं के अंदर सीमित कर लिया है। एक ओर जहां दिल्ली में जांच को तीन गुना बढ़ा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जीबी नगर में अभी भी कम जांच हो रही है। मामले में डीएम सुहास ने कहा कि मौजूदा वक्त में उनके जिले में मृत्युदर सिर्फ 2 प्रतिशत है। हम कोरोना टेस्टिंग से कतराते नहीं है, यही वजह है की यूपी में सबसे ज्यादा मामले उनके जिले में सामने आए हैं।

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    मेडिकल बुलेटिन बंद

    मेडिकल बुलेटिन बंद

    वहीं गौतम बुद्ध नगर में जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जहां 20 जून से जिला लेवल पर मेडिकल बुलेटिन जारी करना बंद कर दिया गया। ऐसे में अब ये नहीं पता चलेगा कि कितनी जांच हुई है। प्रशासन की ओर से सिर्फ सक्रिय मामले, मौत और रिकवरी की संख्या बताई जा रही है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन नोएडा की सचिव डॉ. मोहिता शर्मा ने कहा कि निश्चित तौर पर नोएडा में जांच की संख्या जरूरत के हिसाब से कम है। अगर मरीज की जांच नहीं होती या फिर उनकी रिपोर्ट देर से आती है, तो जाहिर सी बात है उनका स्वास्थ्य और ज्यादा बिगड़ेगा।

    जांच के लिए भटकती रही महिला

    जांच के लिए भटकती रही महिला

    नोएडा की स्थिति का अंदाज आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां एक महिला 10 दिन तक इलाज के लिए भटकती रही। रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा सेक्टर 173 में नीलू भाटिया नाम की महिला को एक जून को बुखार आया। इसके बाद 5 जून तक उन्हें आराम नहीं हुआ। जिस पर वो जांच करवाने जेपी अस्पताल पहुंची, लेकिन अप्वाइंटमेंट के एक दिन पहले अस्पताल ने जांच से मना कर दिया। इसके बाद वो शारदा अस्पताल गईं, वहां जांच तो हुई लेकिन रिपोर्ट तीन दिन तक नहीं मिली। जब तक उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तब तक उन्हें काफी आराम हो चुका था। बाद में 12 जून को उन्हें अस्पताल में आइसोलेट किया गया। वहीं मामले में डीएम सुहास ने इस बात से इनकार किया कि जांच के लिए निजी लैब को रोका गया था या परिणाम में देरी संबंधित कोई निर्देश दिए गए थे।

    गाजियाबाद में भी यही हाल

    गाजियाबाद में भी यही हाल

    46.8 लाख की आबादी वाले गाजियाबाद में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां टेस्टिंग रेट सबसे कम है, जबकि पॉजिटिव रेट सबसे ज्यादा। जिससे साफ होता है कि संक्रमण जिले में फैल रहा है, लेकिन पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो पा रही है। मामले में गाजियाबाद के DMO ने कहा कि हमें सर्विलांस बढ़ाना होगा, क्योंकि यही कोरोना को रोकने का सबसे कारगर उपाय है। उन्होंने 441 टीमों की तैनाती की है। आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। DMO के मुताबिक आंकड़ों में असमानता और राज्य सरकार के निर्देशों की वजह से जीबी नगर की तरह गाजियाबाद भी टेस्टिंग डाटा अब प्रकाशित नहीं कर रहा है। वहीं दूसरी ओर हेल्थ सर्वे के नाम पर भी जिले की स्थिति चिंताजनक है। इंदिरापुरम के एक निवासी के मुताबिक इलाके में काफी पॉजिटिव केस हैं, लेकिन मार्च के बाद से वहां पर न तो कांटैक्ट ट्रैसिंग हो रही और न ही सर्विलांस।

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