टूटा गठबंधन, भाजपा और शिवसेना को होंगे ये नुकसान
[अंकुर सिंह] सीटों के बंटवारे के चलते महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन आखिरकार टूट गया। अटल बिहारी बाजपेयी और बाला साहब ठाकरे के दौर में शुरु हुए इस रिश्तें में यूं तो कई बार मनमुटाव आए लेकिन इस बार सीटों के बंटवारे को लेकर आया यह मनमुटाव गठबंधन के अंत की ओर बढ़ चुका है। लेकिन इन सब के बीच यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि महाराष्ट्र में तीर कमान चलेगा या फिर कमल खिलेगा।

देश में बदलाव और विकास एजेंडा लेकर केंद्र में भाजपा सरकार जिस तरह से आगे बढ़ रही है उससे क्या यह कहना सही होगा कि गठबंधन की राजनीति अब बीते समय की बात हो गयी है। महाराष्ट्र में कई दशकों से मराठा वोटरों के बीच जबरदस्त पैठ बना चुकी शिवसेना के लिए अकेले चुनाव लड़ना फायदेमंद होगा या नहीं यह भी देखने वाली बात होगी। शिवसेना की कट्टर मराठी मानुस राजनीति युवा वोटरों को रास आएगी या नही इसका फैसला आगामी चुनाव में होगा। आइये गठबंधन के टूटने के बाद दोनों पार्टियों को होने वाले नुकसान पर एक नजर ड़ालते हैं।
महाराष्ट्र चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने पर राज्यसभा में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- महाराष्ट्र में गठबंधन टूटने पर केंद्र सरकार में भी शिवसेना को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- केंद्र सरकार में मंत्री का पद संभाल रहे अनंत गीते को मंत्री के पद से हाथ धोना पड़ सकता है।
- जिस प्रकार केंद्र में भाजपा सरकार तेजी से विकास के एजेंडे लेकर योजनाए बना रही है उससे मतदताओं का भाजपा की रुझान बढ़ेगा।
- युवा मतदाताओं की कट्टर मराठी मानुस की राजनीति से कम होता लगाव शिवसेना के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
गठबंधन टूटने से भाजपा के नुकसान
शिवसेना गठबंधन टूटने से भाजपा की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
महाराष्ट्र में लोकप्रिय नेता के अकाल के चलते भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गठबंधन के टूटने से राज्यसभा में एनडीए के नंबर में कमी आ सकती है।
ऐसा हुआ तो भाजपा को महत्पपूर्ण विधेयकों को पास कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।












Click it and Unblock the Notifications