लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस से क्यों डर रही हैं मायावती?
नई दिल्ली। मायावती को कांग्रेस से डर क्यों लगता है?- यह सवाल उन लोगों को नहीं चौंकाता जो शुरू से ही बहुजन समाज पार्टी के विकास पर नज़र रखे हुए हैं। बीएसपी का विकास ही कांग्रेस से लड़कर और कांग्रेस के जनाधार को अपना आधार बनाते हुए हुआ है। एक स्वाभाविक स्पर्धा दोनों में रही है। मगर, बाद के दिनों में जब कांग्रेस की दलितों में कमजोर हुई और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का विकल्प तैयार होने लगा तो बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने पैंतरे बदलने शुरू कर दिए।

बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस, बीजेपी और समाजवादी पार्टी हर किसी के साथ गठबंधन में रही है। बहुजन समाज पार्टी का अनुभव ये रहा है कि कांग्रेस को बीएसपी का फायदा मिल जाता है लेकिन कांग्रेस का फायदा बीएसपी को नहीं मिलता। इस वजह से स्वाभाविक दोस्ती का रास्ता बीएसपी ने अपनी ओर से बंद कर लिया। यूपी में महागठबंधन से कांग्रेस को दूर रखने के पीछे बीएसपी ही रही और समाजवादी पार्टी को मायावती की यह बात माननी पड़ी।

यूपी में महागठबंधन से कांग्रेस को दूर रखने के पीछे बीएसपी ही रही
यूपी में एसपी-बीएसपी महागठबंधन का जन्म ही बीजेपी को हराने के लिए हुआ है। बीजेपी को हराने का मकसद कांग्रेस के पास भी है। ऐसे में वैसे लोग जो बीजेपी को हराने की मानसिकता रखते हैं वे कांग्रेस और महागठबंधन दोनों से लगाव रखते हैं। वोट देने का फैसला मजबूत प्रत्याशी देखकर होता है। कई सीटें ऐसी हैं जहां मतदाताओँ के लिए तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन मजबूत है। वैसी सीटों पर बीएसपी को नुकसान का ख़तरा महसूस होता है। यही वजह है कि बीएसपी प्रमुख मायावती बारम्बार संकेत देती रहती हैं कि कांग्रेस उसकी दुश्मन पार्टी है।

गुना सीट पर बीएसपी प्रत्याशी कांग्रेस में शामिल
मध्यप्रदेश की गुना सीट पर बीएसपी प्रत्याशी का कांग्रेस में शामिल हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है। मगर, बीएसपी ने इसे बहुत गम्भीरता से लेते हुए मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापसी की धमकी दे डाली है। अगर ऐसा होता है तो बीएसपी ही नहीं, एसपी के साथ भी कांग्रेस के संबंध ख़राब होंगे। राष्ट्रीय चुनावी राजनीति में इसका दूरगामी बुरा असर पड़ना तय लगता है।
यूपी के चुनाव में कांग्रेस ने 9 मुस्लिम प्रत्याशी दिए हैं जिनमें से 6 उन सीटों पर हैं जहां बीएसपी के उम्मीदवार हैं। ऐसी सीटों पर बीएसपी की चुनावी सफलता पर बुरा प्रभाव पड़ना तय है। इसे भी बीएसपी अपने लिए कांग्रेस की शत्रुता का उदाहरण मान रही है। इतना ही नहीं नसीमुद्दीन को बिजनौर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाने से भी मायावती नाराज है। नसीमुद्दीन कभी उनके दाहिने हाथ हुआ करते थे।

प्रियंका के चुनाव मैदान में आने से बीएसपी परेशान
कांग्रेस ने जिन 18 सीटों पर यूपी में फोकस किया है उनमें से ज्यादातर सुरक्षित और मुस्लिम बहुल सीटें हैं। इन पर बीएसपी अपना एकाधिकार समझती आयी है। इसलिए भी यह बात उन्हें नागवार गुजर रही है। बीएसपी कांग्रेस से बेपरवाह रह सकती थी अगर प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में कदम नहीं रखा होता। प्रियंका के चुनाव मैदान में कूदने के बाद बीएसपी यह जान रही है कि प्रियंका में अगड़े और पिछड़े सबको समेटने की क्षमता है। ऐसे में नुकसान बीएसपी को होना तय है। यही वजह है कि वह कांग्रेस के प्रति और असहिष्णु होती चली जा रही है।
बाकी 3 चरणों के चुनाव में बीएसपी और कांग्रेस के बीच तनातनी बढ़ने वाली है। इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि कांग्रेस या बीएसपी को इस बात की परवाह है। वे बीजेपी का विरोध तो करना चाहते हैं लेकिन ये नहीं चाहते कि बीजेपी विरोध का फायदा खुद उनके सिवा किसी और को हो। ऐसे में आने वाले दिनों में भी तकरार बने रहने के आसार नज़र आते हैं।
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