मध्यप्रदेश में भाजपा-कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकता है सपा-बसपा गठजोड़

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की 29 सीटों में से 26 पर बहुजन समाज पार्टी अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। प्रदेश के 3 बची हुई सीटों पर सपा के उम्मीदवार मैदान में होंगे। उत्तरप्रदेश की तरह ही मध्यप्रदेश में भी सपा-बसपा का गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा और उत्तरप्रदेश की सीमाओं से लगे संसदीय क्षेत्रों में सपा-बसपा के प्रत्याशी चुनाव को प्रभावित करेंगे।

 1998 में बसपा ने जीती थी 11 विधानसभा सीटें

1998 में बसपा ने जीती थी 11 विधानसभा सीटें

1998 में बहुजन समाज पार्टी मध्यप्रदेश में एक ताकत हुआ करती थी, जिसकी विधानसभा में 11 सीटें थी। 2003 में दो सीटें जीती, 2008 में 7 और फिर 2013 में 4 सीटों पर सिमट गई। हाल के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का दावा था कि वह कम से कम 35 सीटें जीतेगी, लेकिन वह जीत सकी केवल दो। बसपा को उत्तरप्रदेश से सटे मध्यप्रदेश के जिलों में अच्छे समर्थन की उम्मीद थी। छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, श्योपुर, बालाघाट, सिंगरौली, दमोह, कटनी आदि इलाकों में उसे खाता खोलने की उम्मीद थी, लेकिन दो सीटों से ही उसे संतोष करना पड़ा। भिंड और पथरिया में जीतने के अलावा बसपा का दायरा सिमट गया। 11 दूसरी सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही। सीटें कम होने के साथ ही बसपा का वोट प्रतिशत भी घट गया। 2018 में उत्तरप्रदेश के गोरखपुर और फुलपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत में सबसे बड़ा योगदान बसपा का ही माना जाता है। मायावती ने कहा था कि भाजपा और दूसरी सांप्रदायिक पार्टियों से निपटने के लिए वह सपा के साथ आएगी।

2014 के लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की 29 सीटों में से 27 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और 2 पर कांग्रेस जीती थी। 2009 में मध्यप्रदेश से बसपा ने एक लोकसभा सीट जीती थी। उत्तरप्रदेश से सटे इलाकों में बसपा की शक्ति का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि 1996 में सतना लोकसभा सीट पर बसपा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह को हराया था। रीवा में बसपा 1991, 1996 और 2009 में जीत चुकी है। ये सब बातें बसपा के नेताओं के लिए उत्साहवर्धक मानी जाती है। इसलिए इस बार भी बसपा मध्यप्रदेश में अच्छे प्रदर्शन की अपेक्षा कर रही है।

 एमपी में बसपा 26 , सपा तीन सीटों पर लड़ रही

एमपी में बसपा 26 , सपा तीन सीटों पर लड़ रही

सपा और बसपा का समझौता उत्तरप्रदेश के साथ ही मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के लिए भी हुआ है। मध्यप्रदेश में 29 में से 26 सीटों पर बसपा अपने उम्मीदवार खडे़ कर रही है। तीन सीटों पर सपा के उम्मीदवार होंगे। इतने उम्मीदवारों को खड़ा करने के पीछे पार्टी का उद्देश्य वोट का प्रतिशत बढ़ाना है। ताकि पार्टी की मान्यता अखिल भारतीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनी रहे। बालाघाट, टीकमगढ़ और खजुराहो को छोड़कर सभी सीटों पर बसपा अपने उम्मीदवार खडे़ कर रही है। बसपा ने विधानसभा में कमलनाथ की सरकार को समर्थन दिया है, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से दूरी बना रही है और अपने उम्मीदवार खड़े कर रही है। इससे कांग्रेस के सामने परेशानी बढ़ सकती है।

सपा-बसपा बिगाड़ेगी भाजपा-कांग्रेस का खेल

सपा-बसपा बिगाड़ेगी भाजपा-कांग्रेस का खेल

मध्यप्रदेश में बसपा के उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कुछ उम्मीदवार चुने भी जा चुके है, लेकिन उम्मीदवारों के नाम की घोषणा अभी नहीं की गई है। मध्यप्रदेश में जो जनाधार बसपा का है, लगभग वैसा ही जनाधार सपा का भी है। इसलिए दोनों पार्टियों को तालमेल में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बालाघाट से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों ने ही अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। सपा की प्रत्याशी अनुभा मुंजारे को 99 हजार 392 वोट मिले थे, जबकि बसपा के उम्मीदवार योगेश समरीते को उससे आधे वोट भी नहीं मिले। उन्हें 46 हजार 345 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस बार यहां बसपा-सपा प्रत्याशी को समर्थन दे रहा है।

दोनों ही पार्टियों के नेता को उम्मीद है कि वे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों को कड़ी टक्कर देंगे। टीकमगढ़ में पिछले चुनाव में सपा के डॉ. अमरीश अहिरवार को 47 हजार 497 और बसपा के सेवकराम अहिरवार को 23 हजार 975 वोट मिले थे। इसी तरह खजुराहो में पिछले चुनाव में बसपा उम्मीदवार रामलखन सिंह को 60 हजार से अधिक और समाजवादी पार्टी के सुखलाल कुशवाह को 40 हजार से अधिक वोट मिले थे। इसीलिए इन तीनों सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन को अच्छे वोट मिलने की आशा है। बची हुई 26 सीटों पर बसपा के पास टिकट चाहने वालों की लंबी सूची है। बसपा भले ही चुनाव में बहुत सीटें न जीते लेकिन चुनाव को प्रभावित करने की शक्ति तो उसके पास है ही।

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