• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

चुनाव से 10 दिन पहले, जानिए वेस्ट यूपी की 8 सीटों पर किसका पलड़ा भारी

|

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब महज 10 दिनों का ही वक्त बचा है। पहले चरण के तहत कुल 91 सीटों पर होने वाले मतदान में 8 सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भी हैं, जिनपर इस समय सियासी दलों के अलावा देशभर की निगाहें लगी हुई हैं। वेस्ट यूपी की ये 8 सीटें इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले उत्तर प्रदेश में 71 सीटों पर जीत हासिल की थी और इस जीत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अहम रोल था। 2014 में इन आठों सीटों पर भी भाजपा ने जीत का परचम लहराया था, लेकिन इस बार यूपी में सपा-बसपा और आरएलडी का गठबंधन होने के कारण भाजपा के लिए चुनौती कठिन हो गई है। आइए जानते हैं कि इस बार क्या हैं इन आठों सीटों पर सियासी समीकरण?

मुजफ्फरनगर में क्या है माहौल?

मुजफ्फरनगर में क्या है माहौल?

सबसे पहले बात करते हैं मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट की। जाट बाहुल्य सीट मुजफ्फरनगर पर महागठबंधन की तरफ से आरएलडी के मुखिया अजीत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि भाजपा ने यहां अपने मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को टिकट दिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में संजीव बालियान ने बीएसपी के कादिर राणा को 4 लाख वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि इस बार परिस्थितियां अलग हैं। संजीव बालियान सवर्ण और अति पिछड़ी जातियों के बीच अभी भी पहली पसंद बने हुए हैं और पीएम मोदी की लोकप्रिय छवि के सहारे चुनाव मैदान में हैं। इसके बावजूद इस सीट पर अजीत सिंह का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। सपा-बसपा और आरएलडी के संयुक्त उम्मीदवार होने के कारण अजीत सिंह को दलित-मुस्लिम और जाट वोटों का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा गन्ना किसानों की नाराजगी भी यहां बड़ा मुद्दा है, जिसे भुनाने में अजीत सिंह जुटे हुए हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर महागठबंधन के समर्थन में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, जिसका सीधा असर अजीत सिंह के हक में पड़ सकता है।

ये भी पढ़ें- केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने 'निभाया वादा', पूरे पांच साल बाद पहुंचे चाय पीने

बागपत में रोमांचक हुई चुनावी जंग

बागपत में रोमांचक हुई चुनावी जंग

वेस्ट यूपी की दूसरी चर्चित सीट बागपत पर अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की तरफ से इस सीट पर मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह चुनाव मैदान में हैं। यहां भी महागठबंधन के समर्थन में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। बागपत में सवर्ण जातियों के अलावा जाटों के भी एक बड़े वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखने वाले सत्यपाल सिंह विकास योजनाओं और पीएम मोदी की छवि के सहारे फिर से इस सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, जयंत चौधरी चार दलों का साथ (सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन और कांग्रेस का समर्थन) लेकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। इस सीट पर भी जयंत को दलित-मुस्लिम और जाट वोटों का फायदा मिल सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी से छिटके जाट वोट बैंक को फिर से पाना जयंत चौधरी के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि कैराना सीट पर जयंत ने अपनी मेहनत और कुशल रणनीति के जरिए से आरएलडी प्रत्याशी को जीत दिलाई थी और काफी हद तक जाट वोटों को आरएलडी के पाले में लाने में कामयाब रहे थे। जयंत चौधरी अपनी सभाओं में आवारा पशुओं से फसलों के नुकसान और गन्ना किसानों के भुगतान को प्रमुखता से मुद्दा बना रहे हैं।

क्या कैराना में फिर बदलेंगे समीकरण?

क्या कैराना में फिर बदलेंगे समीकरण?

अब बात करते हैं कैराना सीट की। 2018 के उपचुनाव में आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने यहां सपा-बसपा और कांग्रेस के समर्थन से भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह को हराया था। गठबंधन के तहत इस बार यह सीट सपा के खाते में है, लेकिन उम्मीदवार तमस्सुम हसन ही हैं। भाजपा ने यहां पिछली बार की उम्मीदवार मृगांका सिंह का टिकट काटकर गंगोह के विधायक प्रदीप चौधरी को मैदान में उतारा है। मृगांका सिंह का टिकट कटने से नाराज हुए उनके समर्थकों को मनाना भाजपा उम्मीदवार के लिए पहली बड़ी चुनौती है। कांग्रेस ने कैराना सीट पर पश्चिमी यूपी के कद्दावर जाट नेता हरेंद्र मलिक को टिकट दिया है। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस की तरफ से दो बड़े गुर्जर और जाट उम्मीदवार उतरने से इन दोनों समुदायों के वोटों में बंटवारा हो सकता है। वहीं सपा-बसपा और आरएलडी के गठबंधन की वजह से तबस्सुम हसन के खाते में दलित-मुस्लिम वोटों के साथ-साथ जाट वोट भी जा सकते हैं।

मेरठ में दिग्गजों के बीच मुकाबला

मेरठ में दिग्गजों के बीच मुकाबला

मेरठ सीट पर भाजपा ने फिर से अपने मौजूदा सांसद राजेंद्र अग्रवाल को टिकट दिया है। राजेंद्र अग्रवाल को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी की खबरें आती रही हैं। वहीं, कांग्रेस ने भी यहां वैश्य उम्मीदवार उतारकर भाजपा की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दरअसल कांग्रेस ने यहां प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल को टिकट दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा के परंपरागत सवर्ण वोटों का बंटवारा हो सकता है। सपा-बसपा और आरएलडी महागठबंधन की तरफ से मेरठ में हाजी याकूब कुरैशी हाथी के निशान पर चुनाव मैदान में हैं। इस सीट पर निर्णायक दलित-मुस्लिम वोटों की जुगलबंदी और भाजपा प्रत्याशी के प्रति नाराजगी का फायदा याकूब कुरैशी को मिल सकता है।

कांग्रेस की एंट्री से बिजनौर में त्रिकोणीय मुकाबला

कांग्रेस की एंट्री से बिजनौर में त्रिकोणीय मुकाबला

बिजनौर में भाजपा ने एक बार फिर अपने मौजूदा सांसद कुंवर भारतेंदु सिंह पर भरोसा जताया है। वहीं, सपा-बसपा और आरएलडी महागठबंधन की तरफ से मलूक नागर बीएसपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां नसीमुद्दीन सिद्दीकी को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कुंवर भारतेंदु सिंह को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी की खबरें आती रही हैं। उन्हें फिर से इस सीट से प्रत्याशी बनाने का भी विरोध हुआ था। ऐसे में भारतेंदु सिंह के लिए इस बार जीत की राह आसान नहीं है। कांग्रेस उम्मीदवार नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुस्लिम नेताओं में बड़ा चेहरा हैं, लेकिन जिले में कांग्रेस का कमजोर संगठन और खुद उनकी बाहरी उम्मीदवार की छवि उनके लिए बड़ी चुनौती है। गठबंधन के बसपा प्रत्याशी मलूक नागर गुर्जरों के बड़े नेताओं में से एक हैं। इस सीट पर गुर्जर वोट निर्णायक भूमिका में है। इसके अलावा दलित और मुस्लिम वोट भी गठबंधन के पक्ष में जा सकते हैं। हालांकि बाहरी प्रत्याशी होने की चुनौती मलूक नागर के सामने भी है। वोटों के गणित के हिसाब से देखें तो मलूक नागर का पलड़ा यहां भारी नजर आता है।

दलित और मुस्लिम तय करेंगे सहारनपुर का माहौल

दलित और मुस्लिम तय करेंगे सहारनपुर का माहौल

सहारनपुर में भाजपा, कांग्रेस और महागठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां कांग्रेस के टिकट पर इमरान मसूद और भाजपा से मौजूदा सांसद राघवलखन पाल शर्मा चुनाव मैदान में हैं। एयर स्ट्राइक के बाद भाजपा के पक्ष में बने माहौल और सवर्ण मतदाओं में अच्छी पैठ के चलते राघवलखन पाल मजबूती से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं, कांग्रेस के इमरान मसूद 2014 के बाद से ही लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले चुनाव के बाद काजी परिवार का एक होना भी इमरान मसूद को मुस्लिम वोटों का फायदा दिला सकता है। इस सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में है। इसके अलावा भीम आर्मी से जुड़ाव के चलते दलित वोट भी इमरान को मिल सकते हैं। वहीं, महागठबंधन की तरफ से हाजी फजलुर्रहमान बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। दलित और मुस्लिम वोटों के साथ जाट वोट महागठबंधन के प्रत्याशी का ताकत हैं। इस सीट पर जीत काफी हद तक दलित और मुस्लिम वोटों में बिखराव से तय होगी।

महागठबंधन को मिल सकती है 6-2 की लीड

महागठबंधन को मिल सकती है 6-2 की लीड

गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद शहरी सीटें हैं और दोनों सीटों पर भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद व केंद्रीय मंत्रियों महेश शर्मा और वीके सिंह को दोबारा टिकट दिया है। इन दोनों सीटों पर ही भाजपा प्रत्याशियों को लेकर वोटरों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर में कांग्रेस की तरफ से ठाकुर प्रत्याशी और गाजियाबाद में महागठबंधन की तरफ से वैश्य उम्मीदवार उतरने के बाद दोनों सीटों पर समीकरण बदल गए हैं। गौतम बुद्ध नगर में महागठबंधन ने सतवीर नागर को टिकट दिया है। इन दोनों सीटों पर भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने परंपरागत वोटों में विपक्ष की सेंधमारी को रोकना है।

वेस्ट यूपी की इन 8 सीटों के आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा यहां 'मोदी मैजिक' के सहारे ही है। कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों के प्रति कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। इसके मुकाबले महागठबंधन की तरफ से आठों सीटों पर जातीय गणित के आधार पर उम्मीदवार उतारे गए हैं। अभी तक के चुनावी माहौल को देखकर कहा जा सकता है कि महागठबंधन 8 में से 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।

ये भी पढ़ें- मायावती के आरोपों पर अब चंद्रशेखर का पलटवार, कह दी बड़ी बात

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Lok Sabha Elections 2019: Political Equations On 8 Seats Of West UP In First Phase Polling.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more