लोकसभा चुनाव 2019: ममता बनर्जी डर गयी हैं या डरा रही हैं?

ममता बनर्जी

नई दिल्ली। ममता दीदी राजनीति में दबंग रही हैं। सिंगूर और नन्दीग्राम प्रकरण से एक जुझारू और सादगी पूर्ण नेत्री की छवि बनी जो अब तक कायम है। ममता बनर्जी ने बंगाल की जड़ों में समाई वामपंथी राजनीति को 'माँ माटि मानूश' के सहारे चुनौती दी और देखते ही देखते एक प्रमुख ताकत बन गई। उनकी यह ताकत राज्य से लेकर केंद्र तक रही है। हाल के दिनों में हुई घटनाएं एक बार फिर से ममता दीदी के इस दबंग छवि को हवा दे रही है. चाहे बातें नरेन्द्र मोदी को आड़े हाथों लेने की हो, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, स्मृति ईरानी और अब ताजा घटनाक्रम में राहुल गांधी के चुनावी सभा मे हेलीकॉप्टर उतरने से रोक देने की बात हो।

आखिर केंद्र से इस टकराव की शुरुआत कब हुई?

आखिर केंद्र से इस टकराव की शुरुआत कब हुई?

बीते साल के आखिर में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रस्तावित रथ यात्राओं को मंजूरी नहीं दी थी हालांकि बीजेपी ने इसके लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। लगभग इसी समय महागठबंधन की रूप रेखा भी बनने लगी थी। ममता बनर्जी इस महागठबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थी। मोदी सरकार के नोटबन्दी और जीएसटी के विरोध में शुरुआती दौर में सबसे ज्यादा मुखर भी दीदी ही रही थी। फिर सीबीआई ने शारदा चिटफंड घोटाले के संबंध में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ की कोशिश की जिसे लेकर टकराव सतह पर दिखने लगा और यहाँ तक कि ममता बनर्जी इसके विरुद्ध धरने पर बैठ गई।

फिर दीदी ने क्या किया?

फिर दीदी ने क्या किया?

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की पश्चिम बंगाल के मालदा रैली में हेलीकॉप्टर उतारने की इजाज़त शुरूआत में नहीं दी और दी भी गयी तो जिला प्रशासन द्वारा बिल्कुल आखिर में। हालांकि बनर्जी सरकार ने कारण में हेलिपैड तैयारी से संबंधित बातें बताई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को तो उतरने ही नहीं दिया गया। उन्हें झारखंड से पुरुलिया की चुनावी यात्रा सड़क मार्ग से करनी पड़ी। भाजपा को कई सभाएं इस वजह से आगे रद्द भी करनी पड़ी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी पश्चिम बंगाल में यही हुआ। बनर्जी सरकार हर बार सुरक्षा , शांति का हवाला देती रही और साथ ही यह कहने से भी नहीं चुकी की अगर प्रशासन इजाज़त नहीं दे रही है तो भाजपा की इतनी रैली यहाँ कैसे हो रही है।

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इस बार राहुल गांधी भी

इस बार राहुल गांधी भी

ताजा घटनाक्रम में सिलीगुड़ी के स्थानीय प्रशासन ने राहुल गांधी के 14 अप्रैल के पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में प्रस्तावित चुनावी कार्यक्रम में हेलीकॉप्टर उतारने की इजाजत नहीं दी है। स्थानीय प्रशासन ऐसा सुरक्षा कारणों के हवाले से कह रही है। जबकि कांग्रेस इसे ममता बनर्जी की राजनीतिक चाल बता रही है। प्रथम चरण के चुनाव सम्पन्न होने के बाद अभी लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार चरम पर है, ऐसे में चुनावी सभा मे कोई भी रुकावट राजनीति से प्रेरित लगना स्वाभाविक हो जाता है।

दीदी के कांग्रेस से रिश्ते नरम फिर ये तल्ख़ी क्यों?

दीदी के कांग्रेस से रिश्ते नरम फिर ये तल्ख़ी क्यों?

महागठबंधन की कोशिशों में ममता बनर्जी सर्वाधिक सक्रिय नेताओं में से एक थी। ममता बनर्जी के मंच से लेकर शारदा चिटफंड मामले में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई कोशिश के विरोध में ममता बनर्जी के धरने तक के सपोर्ट में कांग्रेस पार्टी रही। यहाँ तक रिश्ते तो सहज थे। लेकिन हाल ही में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की चुनावी रैली थी जिसमें राहुल गांधी ने ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा था।

उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी केवल बोलते हैं, करते कुछ नहीं हैं। राहुल ने सभा को संबोधित करते हुए पूछा था कि बताइए दीदी की सरकार में युवाओं को रोजगार मिला ? क्या किसानों को मदद मिली? मोदी और दीदी दोनों झूठ बोलते हैं, झूठे वायदे करते हैं। आपने बरसों सीपीएम का शासन देखा फिर ममता बनर्जी को चुना। अत्याचार सीपीएम के शासन में भी होता था और ममता बनर्जी सरकार में भी हो रहा है। तब सरकार पार्टी के लिए चलती थी। अब एक शख्स के लिए चलती है। मोदी और ममता बनर्जी किसी की सुनती नहीं हैं अपने मन की करती हैं। हमारी सरकार केंद्र में आ रही है, हम देखेंगे कि आगे क्या कर सकते हैं।

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दीदी डर रही हैं या डरा रही हैं?

दीदी डर रही हैं या डरा रही हैं?

इन सारे घटनाक्रम से ममता बनर्जी असहज जरूर हुई हैं। ममता बनर्जी हर हाल में पश्चिम बंगाल में किसी और पार्टी को पनपने देना नहीं चाहती है। लोकसभा की 42 सीटों में सभी पर उनकी नजर है ताकि चुनाव बाद हुए गठबंधन में मौका मिले तो अपनी दावेदारी सबसे मजबूती से रख सके, इस बहाने साथ ही यह संदेश भी की ममता बनर्जी केंद्र की मोदी सरकार और किसी भी सरकार से टकराने की हिम्मत रखती है। उनकी यह छवि लोकसभा चुनाव बाद के किसी संभावना में अन्य उम्मीदवारों पर उन्हें बढ़त दिलाएगी।

दूसरा पक्ष यह भी है जैसा विपक्ष कह रहा है कि ममता बनर्जी डर गयी है। भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में करीब 22 सीटों पर नज़र रख रही है। ममता बनर्जी को डर है कि भाजपा बंगाल में तेजी से फैल रही है इसलिए वह अवरोध पैदा कर रही हैं। वहीं कांग्रेस फिर से अपना जनाधार बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। तो दीदी किसी कीमत पर नहीं चाहेंगी की कोई और पार्टी उन्हें बंगाल में चुनौती देने की स्थिति में आये।

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