• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

लोकसभा चुनाव 2019: 'बेटा गया तो मेरा गया, सरकार का क्या गया?'

By सलमान रावी
मंदसौर किसान स्मारक
BBC
मंदसौर किसान स्मारक

वर्ष 2017 के जून माह की पहली तारीख़ से ही मंदसौर के पिपलिया तक आने वाली हर सड़क और पगडंडी पर हज़ारों की संख्या में किसान जमा हो रहे थे.

ये किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य और पाने उत्पाद की उचित क़ीमत को लेकर आन्दोलन कर रहे थे. फिर छह तारीख़ को कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे भारत के किसानों को आक्रोश से भर दिया और उन्हें सड़कों पर आने को मजबूर कर दिया.

जून की छह तारीख़ को किसानों पर हुई 'पुलिस फायरिंग' में छह लोग मारे गए थे.

इस घटना के बाद किसानों का आन्दोलन और भी ज्यादा उग्र और हिंसक बन गया.

उस वक़्त की शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार ने किसानों के आक्रोश को ठंडा करने के लिए फ़ायरिंग में मारे जाने वालों के परिजनों को एक करोड़ रूपए बतौर मुआवज़ा देने की घोषणा की.

तभी राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस ने भी किसानों के इस आन्दोलन को समर्थन दिया. यहाँ तक कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी फ़ायरिंग में मारे गए किसान के घर गए.

उन्होंने किसानों के क़र्ज़ माफ़ी का वायदा किया और साथ में पुलिस फ़ायरिंग के दोषियों पर कार्यवाई का आश्वासन भी दिया.

विधानसभा के चुनाव भी राज्य में दस्तक दे रहे थे और किसानों के आक्रोश को राजनीतिक दलों में भुनाने की होड़ लग गयी.

चुनाव हुए और भारतीय जनता पार्टी सत्ता से बेदख़ल हो गई.

मारे गए किसानों के परिजनों को भाजपा की सरकार के रहते मुआवज़ा मिल चुका था, कांग्रेस की सरकार ने आते ही किसानों का क़र्ज़ एक-एक कर माफ़ करना शुरू किया.

$arr_item.
अभिषेक पाटीदार की तस्वीर
BBC
अभिषेक पाटीदार की तस्वीर

मंदसौर में हुई फ़ायरिंग की घटना के अब दो साल होने को हैं और आज पिपलिया की तरफ़ आने वाली ज़्यादातर सड़कों और पगडंडियों पर सन्नाटा ही देखने को मिलता है.

यहीं पर अभिषेक का भी घर है.

उम्र सिर्फ़ 18 की हुई तो क्या हुआ, पारिवारिक परिस्थितियों ने अभिषेक को अपने खेतों में काम करने पर मजबूर कर दिया था.

'रॉक-स्टार' माइकल जैक्सन की तस्वीर अपनी बाइक के पीछे लगा कर सड़कों पर फ़र्राटे भरने वाले इस नौजवान की तस्वीर अब घर की दीवारों पर टंगी हुईं हैं.

अभिषेक उन छह लोगों में से एक थे जो मंदसौर में 2017 के छह जून को किसान आन्दोलन के दौरान पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए थे.

'जय जवान जय किसान' का नारा बुलंद करते रहने वाले लोगों को अब समझ नहीं आ रहा है कि आख़िर जवानों ने किसानों पर गोलियां कैसे चलाईं.

मोदी के ख़िलाफ़ चुनावी जंग से क्यों हटे 111 किसान

अभिषेक पाटीदार की मोटर साइकिल
BBC
अभिषेक पाटीदार की मोटर साइकिल

अभिषेक की माँ अलका बाई को बेटे के मौत का मलाल रह-रह कर कचोटता तो है मगर गोली चलाने वालों पर कार्यवाही नहीं होने की वजह से उनका दिल ही टूट गया है.

बेटे की मौत के बाद अलका बाई और उनके पति दिनेश ने गाँव का अपना घर छोड़ दिया है. अभिषेक उनके बच्चों में सबसे छोटे थे.

बीबीसी से बात करते हुए अलका कहती हैं, "गया तो मेरा गया. मेरा बेटा गया. सरकार का क्या गया."

वो कहती हैं, "राहुल गाँधी जब आए थे तो उन्होंने वादा किया था कि राज्य में अगर उनकी सरकार बनती है तो गोली चलाने वालों पर कार्यवाई होगी. मगर सरकार बनने के बाद कांग्रेस भी मुकर गयी और घटना को अंजाम देने वालों को निर्दोष बता दिया."

अभिषेक पाटीदार की मां अलका बाई
BBC
अभिषेक पाटीदार की मां अलका बाई
$arr_item.

मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्य के गृह मंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि घटना के सम्बन्ध में जो जांच की गई है उसमें मौक़े पर तैनात अनुमंडल अधिकारी को निर्दोष पाया गया जिनके आदेश पर पुलिस के जवानों ने गोलियां चलाईं थीं.

दो सालों में कुछ हुआ हो या नहीं है. जानकारों को लगता है कि इस दौरान किसानों का आन्दोलन राजनीति की भेंट चढ़ गया.

भाजपा की राज्य सरकार ने मारे गए लोगों को एक करोड़ रूपए का मुआवज़ा दिया तो कांग्रेस की सरकार ने आते ही किसानों के क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा कर दी.

लेकिन, गोली चलाने के दोषी, क़ानून के कठघरे तक कभी ना आ सके. इसी आंदोलन के दौरान मारे गए कन्हैया लाल के भाई जगदीश अब अदालतों का चक्कर काट-काट कर थक गए हैं.

कन्हैया लाल के भाई जगदीश
BBC
कन्हैया लाल के भाई जगदीश

जगदीश कहते हैं कि सरकार में ऐसे प्रावधान रखे गए हैं जिनके तहत अगर कोई मुआवज़ा लेता है तो फिर वो इस तरह के मामलों में दोषियों के ख़िलाफ़ कोई क़ानूनी कार्यवाई नहीं कर सकता.

जगदीश ने मध्यप्रदेश के उच्च न्यायलय तक का दरवाज़ा खटखटाया मगर उनकी याचिका वहां भी ख़ारिज हो गई.

कन्हैया लाल की बेटी पूजा कहती हैं कि कोई भी मुआवज़ा चाहे वो कितना ही क्यों न हो, इंसान की कमी को पूरा नहीं कर सकता.

वो कहती हैं कि उनके मन को दिलासा तब मिलेगा जब उनके पिता पर गोली चलाने वाले सलाखों के पीछे नहीं चले जाते.

बनारस में मोदी के ख़िलाफ़ 111 किसान लड़ेंगे चुनाव

गुजरात के किसानों पर दर्ज़ केस वापस लेगी पेप्सिको इंडिया

पूजा
BBC
पूजा

मंदसौर में हुए किसानों के आन्दोलन की सबसे ख़ास बात ये थी कि यह स्वतःस्फूर्त था जिसका कोई नेतृत्व नहीं कर रहा था.

मगर बाद में कुछ किसान संगठनों की इस आंदोलन में भूमिका पर उंगलियाँ उठने लगीं.

वल्लभ, राष्ट्रीय किसान संगठन की सचिव हैं. उनका आरोप है कि राजनीतिक दलों ने अपने अपने लाभ के लिए किसानों के संघर्ष को ख़ूब भुनाया तो था ही, कुछ किसान संगठन भी इसमें कहीं से भी पीछे नहीं थे.

उनका कहना है, "हमेशा धोखा ही मिला है किसानों को, चाहे वो राजनीतिक दल हों या फिर किसान संगठन."

"जब किसी राजनीतिक दल या किसान संगठन का वर्चस्व बढ़ने लगता है तो वो आगे चल कर किसी न किसी के साथ समझौता कर लेता है. किसान वहीं का वहीं रह जाता है और उसकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं रहता. मंदसौर के किसान आन्दोलन के साथ भी ऐसा ही हुआ है."

किसान नेता वल्लभ
BBC
किसान नेता वल्लभ

तो क्या राजनीतिक दलों ने जिस तरह से किसानों को रिझाने की कोशिश की है उससे उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा?

कृषि मामलों के जानकार वेद प्रकाश शर्मा को ऐसा नहीं लगता.

वो कहते हैं कि किसानों की समस्या एक दिन की नहीं है, ना ही ये सिर्फ़ मंदसौर की है. पूरे भारत में किसानों की स्थिति बहुत ही ज़्यादा ख़राब है.

उन्हें अफ़सोस है कि किसानों के मुद्दों पर कभी चुनाव नहीं लड़े जाते जबकी देश की 60 प्रतिशत आबादी किसानों की ही है.

छत्तीसगढ़ के किसान क्यों चाहते हैं पाक से अच्छे रिश्ते

फिर सड़कों पर उतरेंगे महाराष्ट्र के 50 हज़ार किसान

कृषि मामलों के जानकार वेद प्रकाश शर्मा
BBC
कृषि मामलों के जानकार वेद प्रकाश शर्मा

चुनावों में मंदसौर के किसानों के आन्दोलन को भुनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और फिर राज्य की नई कांग्रेस की सरकार ने लाई लोकलुभावन वायदे ज़रूर किये थे. मगर मतदान के क़रीब आने तक ये मुद्दे गौण होते चले गए.

फिर जातीय समीकरणों का बोलबाला शुरू हो गया है. वोट के गणित में किसान नहीं बल्कि जातियों के आधार पर चुनावी सभाओं के भाषण लैस होते जा रहे हैं.

ये सब कुछ तब हो रहा है जब मध्यप्रदेश के मालवा के इलाक़े के किसानों को ज़िन्दगी के हर मोड़ पर एक नए संघर्ष का सामना पड़ रहा है.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Lok Sabha Elections 2019: I lost my son but what lost the government?

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X