हार के बाद सपा दफ्तर में अखिलेश-मुलायम की पहली मीटिंग, अब ये होगा अगला कदम

हार के बाद अखिलेश-मुलायम की पहली मीटिंग, कार्यकर्ताओं ने बताया- क्यों हारे लोकसभा चुनाव

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जहां कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व को लेकर हड़कंप मचा हुआ है, तो वहीं यूपी में तीन दलों (सपा-बसपा-आरएलडी) का महागठबंधन फेल हो जाने के बाद समाजवादी पार्टी में भी हार को लेकर हलचल का माहौल है। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को महज 5 सीटें मिली हैं और उसके कई मजबूत गढ़ मोदी की आंधी में ढह गए हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव और राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को भी हार का सामना करना पड़ा है। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की पहली बैठक हुई।

कार्यकर्ताओं ने बताया- क्यों हारे चुनाव

कार्यकर्ताओं ने बताया- क्यों हारे चुनाव

महागठबंधन के बावजूद यूपी में मिली हार के बाद सोमवार को लखनऊ के पार्टी दफ्तर पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अलावा सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी शामिल हुए। बैठक में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि पार्टी के अंदर से ऐसे नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाए, जो बड़े पदों पर बैठे हैं और जिनका जमीनी आधार जीरो है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि चापलूसी के जरिए पद पाने वाले नेता सपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी करते हैं। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं की अनदेखी किए जाने की कई शिकायतें सपा मुखिया अखिलेश यादव तक पहुंचीं हैं, जिन्हें देखते हुए आने वाले दिनों में संगठन में बड़ा बदलाव किया जा सकता है। बैठक के दौरान मुलायम ने भी कार्यकर्ताओं की बातें सुनीं।

अब मुलायम का फॉर्मूला अपनाएंगे अखिलेश

अब मुलायम का फॉर्मूला अपनाएंगे अखिलेश

वहीं, इस बैठक को लेकर सूत्रों के हवाले से खबर है कि अब अखिलेश यादव पार्टी में मुलायम सिंह यादव की रणनीति पर काम करते हुए संगठन में फेरबदल करेंगे। यानी जातियों के बड़े नेताओं को पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। मुलायम सिंह यादव के अध्यक्ष रहते हुए सपा में बेनी प्रसाद वर्मा, जनेश्वर मिश्र और आजम खान जैसे दिग्गज नेताओं को पार्टी के बड़े चेहरों के तौर पर जिम्मेदारियां दी गईं थी। अखिलेश यादव अब इसी तर्ज पर संगठन में परिवर्तन करने के मूड में हैं। लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में होने वाले उपचुनाव और 2022 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन की रणनीति में बड़ा बदलाव किया जा सकता है। हालांकि बैठक में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

'2022 की तैयारी में जुटें कार्यकर्ता'

'2022 की तैयारी में जुटें कार्यकर्ता'

आपको बता दें कि इससे पहले बीते शनिवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी का हर कार्यकर्ता अब 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट जाए और यह काम आज से ही शुरू कर दें। सपा कार्यकर्ता घर-घर जाएं और अभियान चलाकर प्रदेश व केंद्र सरकार की जन-विरोधी नीतियों के बारे में लोगों को बताकर उन्हें जागरुक करें। देश और प्रदेश में महापरिवर्तन लाने के लिए हमारी कोशिशें जारी रहेंगी। पार्टी के कार्यकर्ता समाज के हर वर्ग, खासकर गरीब और कमजोर तबके तक पहुंचे और उन्हें जागरूक करें। आज प्रदेश के युवा गंभीर संकट में हैं। इसके लिए हमें कॉलेज, यूनिवर्सिटी हर जगह जाना होगा, उनकी बातें सुननी होंगी।'

रक्षात्मक नहीं, आक्रामक रवैया अपनाएं: अखिलेश

रक्षात्मक नहीं, आक्रामक रवैया अपनाएं: अखिलेश

हार के बाद अखिलेश यादव ने अपने पहले संदेश में आगे कहा, 'भाजपा झूठ की राजनीति करती है, लोगों को बरगलाती है। ऐसे में हमें अपनी विचारधारा ने उनका मार्गदर्शन करना होगा। हमें ऐसी ताकतों से सावधान रहना होगा। पार्टी से जुड़े हुए युवा भाजपा के दावों की पोल खोलते हुए रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रवैया अपनाएं। सबसे पहले आप सभी तथ्यों और आंकड़ों की सही जानकारी रखें और इसके बाद भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए उन्हें बहस की चुनौती दें। सपा की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा विकास किया और विकास के दम पर 2022 में हम फिर से सत्ता में लौटेंगे। जिन लोगों ने 2017 में भाजपा को वोट दिया, वो सभी आज दुखी हैं, पछता रहे हैं। हम जनता के बीच जाकर कड़ी मेहनत करनी है और प्रदेश में फिर से सपा की सरकार बनानी है।'

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