लोकसभा चुनाव 2019: दिसंबर के डिनर में ही मिल गए थे संकेत, कांग्रेस के साथ नहीं जाएगी बीएसपी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कुछ समय के लिए साथ नजर आई कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रास्ते अब अलग-अलग हो चुके हैं। गुरुवार को दोनों ने एक दूसरे पर भारतीय जनता पार्टी की बी-टीम होने का आरोप लगाया। हालांकि अभी भी कुछ लोगों को ऐसा लग रहा है कि चुनाव बाद बसपा, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मायावती ने अमेठी और रायबरेली में बसपा समर्थकों से कहा कि वो कांग्रेस को वोट करें।

कांग्रेस की ओर से आया था डीनर का न्योता

कांग्रेस की ओर से आया था डीनर का न्योता

सपा, बसपा और आरएलडी के गठबंधन की घोषणा से और मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के परिणामों की घोषणा से पहले बसपा प्रमुख मायावती के पास कांग्रेस की ओर डीनर करने का न्योता मिला। क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे मिल सकती हैं? मायावती ने एक दिन के भीतर बैठक की पुष्टि की और रात में खाने की तारीख निर्धारित की गई। हालांकि बीएसपी के प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा उनको इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

डीनर में मौजूद नहीं थे बीएसपी नेता एससी मिश्रा

डीनर में मौजूद नहीं थे बीएसपी नेता एससी मिश्रा

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने डीनर की पुष्टि भी की लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि उस दिन नेताओं के बीच में किस बात पर चर्चा हुई। वे कहते हैं कि मायावती के करीबी और विश्वासपात्र बसपा नेता एससी मिश्रा इसमें मौजूद नहीं थे, इसके केवल तीन लोग ही मौजूद थे। बताया गया कि रात्रिभोज लगभग 90 मिनट तक चला। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में सोनिया गांधी ने मायावती से पूछा कि सीट बंटवारे को लेकर उनकी क्या राय है। सूत्रों ने कहा कि लेकिन मायावती ने कुछ भी करने से मना कर दिया, जिसके बाद राहुल गांधी निराश थे।

अंत में प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा

अंत में प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा

इसके बाद ऐसा हो सकता है कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अकेले उतरने का फैसला किया। इस बात की चर्चा भी शुरू हो गई कि पार्टी किस तरह से टर्नअराउंड ट्रैक पर है और उसे खुद की रक्षा करन की आवश्यकता है। जिसके लिए उसने गठबंधन के जरिए चुनाव में उतरने मन बनाया था। लेकिन अंत में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के रूप में मैदान में उतारा।

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