मुलायम का पॉलीटिकल गेम, मुख्‍तार अंसारी और उनके भाई को सपा में लाने की कोशिश

mulayam singh yadav
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) 2014 आम चुनाव से पहले अल्पसंख्यक वोटों को अपने पाले में करने के लिए जल्द ही मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी को पार्टी में शामिल कर सकती है। इससे पहले पार्टी बाहुबली नेता अतीक अहमद को सुल्तानपुर से लोकसभा का टिकट देने का फैसला कर चुकी है। सपा के वरिष्ठ नेता ओर सांसद रामगोपाल यादव की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। इससे पहले अल्पसंख्यक समुदाय के शकील अहमद को यहां से प्रत्याशी घोषित किया गया था।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में इलाहाबाद की फूलपुर लोकसभा सीट से सपा के सांसद रह चुके अतीक अहमद पर विधायक राजू पाल की हत्या सहित दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। माफिया सरगना से नेता बने अतीक को सपा ने वर्ष 2009 में पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद अतीक ने पिछला लोकसभा चुनाव अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। बहरहाल, अतीक के सपा खेमे में शामिल होने के बाद अब चर्चा है कि आपराधिक प्रवृति के बाहुबली नेता और विधायक मुख्तार अंसारी और गाजीपुर से पूर्व सांसद अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का जल्द ही सपा में विलय हो सकता है।

सपा सूत्रों की मानें तो अंसारी बंधुओं और सपा मुखिया मुलायम सिंह के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। मुलायम, अंसारी बंधुओं पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि वे अपनी पार्टी का सपा में विलय कर अगला लोकसभा चुनाव लड़ें जबकि अंसारी बंधु फिलहाल सपा में पार्टी के विलय की बजाए सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं। सपा और अंसारी बंधुओं के बीच इस बात पर भी सहमति बनी है कि मुख्तार जहां सपा के टिकट पर वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में होंगे, वहीं पूर्व सांसद अफजाल गाजीपुर की बजाए घोषी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

बदले में अंसारी बंधुओं को बलिया लोकसभा सीट और गाजीपुर लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशियों नीरज शेखर और शिवकन्या को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। नीरज शेखर जहां पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र हैं, वहीं शिवकन्या बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार के पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा की पत्नी हैं। सपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने हालांकि, दबे सुर में यह स्वीकार किया कि अंसारी बंधुओं की पार्टी के सपा में विलय की बातचीत चल रही है लेकिन बड़े नेता इस मुद्दे पर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।

बाहुबली छवि के लिए चर्चित मुख्तार और अफजाल भी कभी सपा में रह चुके हैं, लेकिन परिस्थतियां ऐसी बनी कि उन्हें सपा छोड़कर अलग पार्टी बनानी पड़ी। कौमी एकता दल का गठन करने वाले अंसारी बंधुओं ने पिछला चुनाव अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से लड़ा था लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हो पाई थी। गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का भी गंभीर आरोप है। इसके अलावा दर्जन भर मामले मुख्तार के खिलाफ दर्ज हैं। इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि सपा अतीक अहमद को टिकट देकर सुल्तानपुर को सांप्रदायिकता की भट्टी में झोंकना चाहती है।

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