Rohith Vemula मामला तेलंगाना में क्यों बिगाड़ सकता है कांग्रेस का गणित? लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिला वरदान!
Rohith Vemula Death Case Closure Report amid Lok Sabha Elections: रोहित वेमुला दलित नहीं था। तेलंगाना पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर कहा है कि उसने कई वजहों से आत्महत्या की थी, जिसमें यह बात भी शामिल है कि वह दलित नहीं है, और इसका खुलासा होने पर उसे काफी नुकसान हो सकता है।
इस क्लोजर रिपोर्ट के साथ ही तेलंगाना पुलिस ने इस केस में सिकंदराबाद के तत्कालीन बीजेपी सांसद बंडारू दत्तात्रेय, एमएलसी एन रामचंद्र राव,वाइस-चांसलर अप्पा राव, एबीवीपी के नेताओं और तत्कालीन केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

क्लोजर रिपोर्ट कांग्रेस के लिए नई मुसीबत!
तेलंगाना में अभी कांग्रेस की सरकार है और यह क्लोजर रिपोर्ट तेलंगाना पुलिस ने ही अदालत में दायर की है। ऐसे में यह कांग्रेस पार्टी के लिए तेलंगाना ही नहीं, देश में भी उसके लिए नई सियासी मुसीबत खड़ी कर सकती है। तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों के लिए 13 मई को मतदान होना है।
बीजेपी के लिए साबित हो सकता है वरदान!
तेलंगाना में पिछले साल नवंबर तक के चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली बीआरएस सरकार थी। अभी कांग्रेस के रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में उस मामले का पूरी तरह से झूठा साबित हो जाना, जिसे कांग्रेस और बीजेपी-विरोधी पार्टियों ने 2016-17 में बहुत बड़ा सियासी मुद्दा बनाया था, भाजपा के लिए किसी चुनावी वरदान से कम नहीं है।
रोहित वेमुला पर क्लोजर रिपोर्ट क्या है?
पहले तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट की कुछ बड़ी बातों पर गौर करना जरूरी है। इसमें कहा गया है, 'मृतक की पढ़ाई देखी गई तो मालूम हुआ कि वो अपने पढ़ाई से ज्यादा कैंपस में छात्र राजनीति से जुड़े मुद्दों में उलझा रहता था। 2 साल तक पहली पीएचडी करने के बाद उसे छोड़कर उसने दूसरी पीएचडी ज्वाइन की और उसमें भी पढ़ाई से अलग गतिविधियों की वजह से ज्यादा प्रगति नहीं कर सका।'
रिपोर्ट के अनुसार वेमुला को यह मालूम था कि उसकी मां ने उसके लिए अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट जुटाया है और इस वजह से चिंतित था कि अगर यह बात किसी को पता चल गई तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 'मृतक को खुद भी पता था कि वह अनुसूचित जाति का नहीं है और एससी सर्टिफिकेट उसकी मां ने दिया है। यह निरंतर डर की एक वजह हो सकता है, क्योंकि इसके उजागर होने से उसे सालों से जुटाई गई अपनी शैक्षणिक डिग्रियां खोनी पड़ेंगी और उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।'
विपक्ष ने बनाया था रोहित वेमुला के दलित होने को बड़ा मुद्दा
रोहित वेमुला की दुखद मौत को उस समय विपक्ष ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ बहुत बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल किया था। यह साबित करने की कोशिश की गई थी कि केंद्र सरकार दलित-विरोधी है। कांग्रेस के साथ-साथ कई विपक्षी पार्टियां, जिसमें वामपंथी दल और उनसे जुड़े संगठनों ने राजनीतिक तौर पर इसपर खूब बवाल काटा था। विपक्ष के निशाने पर खास तौर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी थीं।
21 जुलाई, 2017 को ट्विटर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक पोस्ट लिखा था, 'वे कहते हैं कि रोहित वेमुला ने आत्महत्या की। मैं इसे हत्या कहता हूं। उसे जिस तरह से अपमानित पड़ा उसने उसकी हत्या की। उसकी हत्या की गई, क्योंकि वह एक दलित था।'

बीजेपी के राष्ट्रीय आईटी विभाग के इंचार्ज अमित मालवीय ने तेलंगाना पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर एक्स पर लिखा है, 'सत्य की जीत होती है।'












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