Lok Sabha Election: 6 साल बाद TDP की NDA में वापसी तय, फिर सीट बंटवारे में कहां फंस रहा है पेच?
Lok Sabha Election News: संयुक्त आंध्र प्रदेश (जब तेलंगाना नहीं बना था) के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू फिर से एनडीए में वापसी के लिए तैयार हो गए हैं। 6 साल बाद उनकी तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) का फिर से बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा बनना लगभग फाइनल है।
आंध्र प्रदेश में टीडीपी पहले से ही तेलगू अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना के साथ गठबंधन कर चुकी है। वहीं जन सेना पहले से ही एनडीए का हिस्सा है।

चंद्रबाबू नायडू की एनडीए में वापसी तय!
ऐसे में गठबंधन टीडीपी और बीजेपी के बीच होना है और सूत्रों के मुताबिक इसको लेकर नायडू शुक्रवार को फिर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने वाले हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले गुरुवार रात को शाह के घर हुई बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर टीडीपी के एनडीए में शामिल होने और आंध्र प्रदेश में भाजपा के टीडीपी-जन सेना गठबंधन का हिस्सा बनने की डील फाइनल हो गई।
सीटों के बंटवारे में चर्चा जारी!
लेकिन, जानकारी के मुताबिक इन दलों के बीच सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला अभी फाइनल नहीं हुआ है, जिसको लेकर आगे की बातचीत होनी है और एक-दो दिनों में ये चीजें भी स्पष्ट हो जाएंगी। शाह के घर हुई बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पवन कल्याण भी शामिल हुए थे।
भाजपा को टीडीपी ने इन लोकसभा सीटों का दिया ऑफर!
जानकारी के मुताबिक टीडीपी राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 6 सीटें देने को तैयार है। ये सीटें राजमुंदरी, नरसापुरम, अराकू, एलुरु, तिरुपति और राजमपेट बताई जा रही हैं।
सीट बंटवारे में कहां फंस रहा है पेच?
जानकारी के मुताबिक बीजेपी कम से कम 10 सीटें मांग रही है, जिनमें विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और हिंदूपुरम की सीटें भी शामिल हैं।
जहां तक 175 विधानसभा सीटों की बात है तो वहां टीडीपी सहयोगियों के लिए सिर्फ 30 सीटें ही छोड़ने को तैयार है, जिनमें से जन सेना को वह पहले ही 24 का ऑफर दे चुकी है।
2018 में एनडीए से निकल गए थे नायडू
टीडीपी 2018 में एनडीए से बाहर हो गई थी और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए लगभग पूरा भारत नाप दिया था।
एनडीए से निकलने से नायडू को हुआ था नुकसान
लेकिन, एनडीए से निकलने से उन्हें फायदा नहीं हुआ और विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी बाजी मार ले गई।
भाजपा को गठबंधन में क्या फायदा?
भाजपा को टीडीपी से गठबंधन में इसलिए फायदा दिख रहा है, क्योंकि सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी 5 साल की एंटी-इंकंबेंसी झेल रही है।
जबकि, कुछ समय के लिए जेल में रहने के बाद हाल ही में छूटकर निकले नायडू के पास अभी भी ठोस जनाधार है और उन्हें सत्ताधारी दल के खिलाफ एंटी--इंकंबेंसी के साथ-साथ सहानुभूति वोट मिलने की भी उम्मीद है। इससे बीजेपी को 'अबकी बार, 400 पार' का लक्ष्य प्राप्त करने की भी उम्मीद दिख रही है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के साथ जुगलबंदी कैसे करेगी बीजेपी?
जहां तक वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की बात है तो वह एनडीए में तो नहीं है, लेकिन बीते पांच वर्षों में राज्यसभा में जब भी मोदी सरकार को उसके समर्थन की जरूरत पड़ी है तो जगन मोहन रेड्डी, ओडिशा के नवीन पटनायक की तरह ढाल बनकर खड़े रहे हैं।
ऐसे में टीडीपी के साथ दोस्ती बीजेपी के लिए आंध्र प्रदेश से लेकर दिल्ली तक दिलचस्प चुनौती बनकर उभर सकती है। क्योंकि, जगन और चंद्रबाबू नायडू दोनों को साथ लेकर चलना फिलहाल आंध्र प्रदेश की राजनीति में बहुत टेढ़ी खीर है।












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