NDA Vs INDIA: वोट प्रतिशत और सीटों के मामले में कौन सा गठबंधन भारी, समझिए आंकड़ों की जुबानी
Lok Sabha Poll 2024 में यूनाइटेड अपोजिशन INDIA नाम के साथ सत्तारूढ़ NDA को चैलेंज करेगा। कांग्रेस समेत 26 दलों के गठबंधन को INDIA नाम दिया गया है। इस समय पांच साल पहले यानी 2019 के वोट शेयर पर नजर डालना बेहद दिलचस्प है।
पांच साल पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में करीब 40 दल शामिल थे। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, NDA को 2019 में 44.4 फीसद वोट मिले थे। 334 सीट पाने वाली एनडीए में कौन से दल शामिल थे, ये जानना भी काफी रोचक है।

भाजपा के अलावा NDA में शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) जैसे दल शामिल हैं। 2019 के आंकड़ों के आधार पर आज के यूनाइटेड अपोजिशन (INDIA) में शामिल दलों के खाते में 144 सीटें आई थीं।
36.53 फीसद सीटें पाने वाले संयुक्त विपक्ष में 25 दल हैं। इसमें सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है। तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दल भी इंडिया को सपोर्ट कर रहे हैं। इन 65 दलों के अलावा 19.07 फीसद वोट अन्य दलों के हिस्से में गए।
लोक सभा की 543 सीटों में 65 सीटें अन्य दलों या निर्दलीय सांसदों के पास हैं। ऐसे में वोट प्रतिशत के लिहाज से NDA के पास 11 फीसद वोट कम हैं। हालांकि, सीटों के मामले में NDA बहुमत के आंकड़े 272 से बहुत आगे है। यहां तक कि अकेले भाजपा के पास 303 सीटें हैं।
भाजपा को 37.3 प्रतिशत वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर 19.46 फीसद वोट कांग्रेस पार्टी को मिले। सीटों के लिहाज से 2014 की तुलना में भाजपा को 21 सीटों का लाभ हुआ तो कांग्रेस को 8 सीटें अधिक मिलीं।
वोट प्रतिशत के मामले में पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। हालांकि, 4.06 प्रतिशत वोट पाने वाली टीएमसी को 12 सीटों का नुकसान हुआ और पार्टी केवल 22 सीटें हासिल कर सकी।
इनके अलावा, 10 या इससे अधिक सीट पाने वाली पार्टियों में आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस (22), तमिलनाडु में सत्ता पर काबिज डीएमके (24) शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) 12 सीट शामिल है। शिवसेना दो फाड़ हो चुकी है। उद्धव ठाकरे गुट के पास फिलहाल 6 सीटें हैं।
ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) के पास 12 सीटें हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पास 16 सीटें हैं। इन दलों के अलावा भी कई छोटे दल ऐसे हैं जो एक साथ आने पर चैलेंजर बन सकते हैं।
फिलहाल, संयुक्त विपक्ष की बैठकों से संकेत मिल रहे हैं कि हर राज्य में जो पार्टी जिस सीट पर मजबूत होगी, उसका उम्मीदवार वहां से चुनाव लड़ेगा। हालांकि, इसकी घोषणा या कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ऐलान अभी बाकी है।
यूनाइटेड अपोजिशन यानी- Indian National Developmental Inclusive Alliance (INDIA) के ऐलान के बाद 2024 का चुनावी चौसर बेहद दिलचस्प होगा, इसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है।
ये भी रोचक है कि बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे) जैसी पार्टियां शामिल हुईं।
हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, महाराष्ट्र में NCP और शिवसेना को जनता की सहानुभूति के कारण समर्थन मिलने की पूरी संभावना है। बिहार में नीतीश भाजपा का साथ छोड़ चुके हैं, ऐसे में 40 लोक सभा सीटों वाला ये प्रदेश भी बेहद निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदेश भाजपा शासित उत्तर प्रदेश है। 80 सीटों वाले यूपी के बाद महाराष्ट्र का नंबर आता है। यहां 48 लोक सभा सीटें हैं, तीसरे नंबर पर 42 सीटों वाला पश्चिम बंगाल है।
तमिलनाडु में 39 और कर्नाटक में 28 सीटें हैं। इन राज्यों का जिक्र इसलिए क्योंकि गैर भाजपा शासित राज्यों का रोल भी निर्णायक होगा। कर्नाटक में हाल ही में चुनाव हुए हैं। कांग्रेस की बड़ी जीत भाजपा को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल में भी भाजपा का जनाधार तुलनात्मक रूप से कमजोर है। ऐसे में गैर-भाजपाई दलों (INDIA) का एक साथ आना NDA के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, इस बात की पूरी गुंजाइश है।
बहरहाल, लोक सभा चुनाव 2024 से पहले कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। 80 से अधिक लोक सभा सीटों वाले प्रदेश- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे प्रदेशों का विधानसभा चुनाव काफी हद तक NDA vs INDIA की तस्वीर पेश कर सकता है।
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