Lok Sabha Election: Article 370 हटने के बाद कश्मीर की कौन सी पहली सीट जीतने की उम्मीद में है बीजेपी?
Lok Sabha Election News: जम्मू और कश्मीर से 2019 के लोकसभा चुनावों के दो महिने बाद ही आर्टिकल 370 हटा दिया गया था। उसके बाद वहां पहली बार कोई बड़ा चुनाव होने जा रहा है। तब से लेकर अबतक कश्मीर की राजनीतिक फिजा पूरी तरह से बदल चुकी है।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में लोकसभा की कुल 5 सीटें हैं। जम्मू रीजन में तो पिछले दो लोकसभा चुनावों से भारतीय जनता पार्टी की बादशाहत कायम है। लेकिन, कश्मीर रीजन में चुनाव जीतने का सपना उसके लिए कुछ वैसा ही है, जैसा कि दक्षिण में केरल राज्य में 'कमल' खिलाना।

कश्मीर की 3 सीटों पर एनसी और जम्मू की 2 सीटों पर बीजेपी का कब्जा
अभी जम्मू और कश्मीर की 5 लोकसभा सीटों में से 3 पर फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस का कब्जा है और 2 सीटें बीजेपी के पास हैं। जून 2018 से जम्मू और कश्मीर केंद्र के शासन के अधीन है और यहां 2014 के बाद विधानसभा का चुनाव नहीं हुआ है।
परिसीमन से चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं में परिवर्तन
लेकिन, इस दौरान वहां 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 खत्म किया जा चुका है। जम्मू और कश्मीर एक राज्य से दो केंद्र शासित प्रदेश (दूसरा-लद्दाख) बन गया है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत मई 2022 में परिसीमन का काम पूरा हो गया। इससे 90 विधानसभा क्षेत्रों और पांच संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल गईं।
जम्मू और कश्मीर में पहले पांच चरणों में चुनाव
जम्मू और कश्मीर में सात चरणों में से पहले पांच चरणों में लोकसभा चुनाव होने हैं। 19 अप्रैल को उधमपुर, 26 अप्रैल को जम्मू (दोनों जम्मू रीजन का हिस्सा हैं, जहां अबतक बीजेपी जीतती रही है), 7 मई को अनंतनाग-राजौरी, 13 मई को श्रीनगर और 20 मई को बारामूला लोकसभा सीट पर वोट पड़ेंगे।
अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट से बीजेपी को उम्मीद
परिसीमन के बाद अनंतनाग-राजौरी संसदीय सीट के तहत दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम जिले शामिल हैं तो जम्मू रीजन के राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती जिलों के अधिकतर भाग भी इसमें आ गए हैं।
भाजपा को बदली हुई परिस्थितियों में इस बार अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट जीतने की बड़ी उम्मीद दिख रही है। केंद्र सरकार ने यहां की एक बड़ी पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा भी दिया है और यह भी उसकी उम्मीद की बड़ी वजह है। पुंछ और राजौरी में इस समुदाय का अच्छा-खासा दबदबा है।
पहाड़ी और हिंदू वोटों के भरोसे अटकी बीजेपी की जान!
पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा मिलने के बाद इनके कुछ बड़े चेहरे बीजेपी में शामिल भी हुए हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि पहाड़ी और हिंदू वोटों के समर्थन से वह पहली बार कश्मीर घाटी में भी 'कमल' खिला सकती है।
इनके अलावा बारामूला में भी पहाड़ी समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी है। पार्टी 20 मई को यहां होने वाले मतदान में भी अपने प्रदर्शन के सुधरने की उम्मीद कर रही है।
अनंतनाग में अभी है नेशनल कांफ्रेंस का कब्जा
अभी अनंतनाग सीट नेशनल कांफ्रेंस के कब्जे में है। पार्टी के सांसद और पूर्व जज हसनैन मसूदी ने 2019 में यह सीट पीडीपी से उसकी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को हराकर जीत ली थी।
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