Lok Sabha Election: इस बार तीन तरीके से होगी वोटिंग, पहली बार 1.74 करोड़ वोटरों को क्या नई सुविधा मिलेगी?

Lok Sabha Election News: देश में यह पहला आम चुनाव है, जिसमें मतदाताओं के लिए तीन तरह से वोटिंग करने की व्यवस्था की गई है। चुनाव आयोग की इस पहल से 1.74 करोड़ बुजुर्गों और दिव्यांगों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

इस बार के लोकसभा चुनाव में देश में 96.9 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं। इनमें से अधिकांश वोटिंग के परंपरागत तरीके, मतलब ईवीएम के माध्यम से ही वोटिंग करेंगे। इनके लिए इस बार 55 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल किया जाएगा।

three way of voting

19.1 लाख वोटर पोस्टल बैलेट से करेंगे मतदान
वहीं देश में करीब 19.1 लाख वोटरों के लिए पोस्टल बैलेट का इंतजाम होगा। ये सुरक्षा कार्यों में लगे सर्विस पर्सनल या फिर चुनाव ड्यूटी में लगे मतदाता हैं। यह पहले के चुनावों की तरह पोस्टर बैलेट के माध्यम से अपना मत डाल सकेंगे।

घर बैठे मतदान की सुविधा पहली बार
लेकिन, चुनाव आयोग ने पहली बार लोकसभा चुनावों में घर बैठे मतदान की भी सुविधा दी है। मतदान की यह सुविधान पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से शुरू की गई है। लेकिन, लोकसभा चुनाव में इस प्रक्रिया को पहली बार अपनाया जा रहा है।

85 साल से ज्यादा के बुजुर्गों, दिव्यांगजनों को घर से वोटिंग की सुविधा
घर से मतदान की सुविधा का इस्तेमाल वे मतदाता कर सकेंगे, जिनकी उम्र 85 वर्ष से अधिक है या फिर दिव्यांगजनों के लिए भी इस सुविधा का इंतजाम किया गया है।

1.74 करोड़ वोटर घर से कर सकेंगे मतदान
घर से मतदान की सुविधा की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों से हुई थी। इस बार लोकसभा चुनाव में 82 लाख से ज्यादा 85 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों और 88.4 लाख दिव्यांगजनों को घर से मतदान करने की सुविधा मिलेगी।

घर से वोटिंग की क्या है प्रक्रिया?
इस प्रक्रिया के तहत चुनाव अधिकारी प्रत्येक मतदाता के घर जाएंगे और पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान सुनिश्चित करवाएंगे, जिसकी प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय होगी।

घर से मतदान करवाने के लिए 4 से 5 मतदानकर्मी संबंधित मतदाताओं के घर पहुंचते हैं। इनमें चुनाव अधिकारियों के अलावा एक वीडियोग्राफर और पुलिस वाले भी होती है।

ये अपने साथ बैलेट बॉक्स और गोपनीयता सुनिश्चित करने वाली चीज लेकर पहुंचते हैं, ताकि मतदान को पूरी तरह से गोपनीय बनाए रखा जा सके।

पोस्टल बैलेट के साथ ही होती है घर वाले बैलेट की गिनती
मतदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और इसमें करीब 20 मिनट लगते हैं। इन मतपत्रों की गिनती भी पोस्टल बैलेट के साथ ही की जाती है।

घर से मतदान की कब हुई शुरुआत?
2020 में संशोधित किए गए कंडक्ट ऑफ इलेकश्न रूल्स 27ए के मुताबिक 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों और दिव्यांगजनों (40% बेंचमार्क दिव्यांगजनों के रूप में परिभाषित) और कोविड-संक्रमित व्यक्तियों के लिए इस सुविधा की शुरुआत की गई थी।

80 से 85 साल की गई घर से मतदान करने की सीमा
लेकिन, करीब पखवाड़े भर पहले सरकार ने इस नियम में संशोधन कर दिया है और वरिष्ठ नागरिकों की योग्यता के लिए उम्र की सीमा बढ़ाकर 85 साल कर दी है।

18वीं लोकसभा के लिए इस बार 19 अप्रैल से लेकर 1 जून के बीच सात चरणों में चुनाव होने हैं। मतों की गिनती 4 जून को होगी। 1951-52 के पहले आम चुनाव के बाद यह सबसे लंबा चुनाव है। इसमें डेढ़ महिने (44 दिन) लगेंगे, जबकि पहला चुनाव चार महिने से भी ज्यादा चला था।

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