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Lockdown: ऐसा पहली बार है जब अयोध्या में रामनवमी पर सड़कें वीरान हैं और मंदिरों में सन्नाटा पसरा है!

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नई दिल्ली। राम जन्मभूमि विवाद पर रामलला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या के बड़े पर्व के रुप में शुमार रामनवमी पर्व को शहर में एक विहंगम पर्व के रूप में मनाने की योजना थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के बीच सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं है। इसका नजारा गुरूवार को रामनवमी पर्व पर अयोध्या में दिखा, जहां लॉकडाउन के चलते शहरों की सड़कें और मंदिरों पर अजीब सन्नाटा पसरा हुआ है।

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गत 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा के बाद जब कोरोना वायरस के मामले भारत में बढ़ने लगे तो 25 मार्च आधी रात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों लॉकडाउन की घोषणा करके सब कुछ रोक दिया गया था। इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब रामनवमी पर्व के दिन अयोध्या की सड़कें वीरान हैं और वहां मौजूद 36000 से अधिक मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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गुरुवार, 2 अप्रैल की सुबह अयोध्या में पहली बार ऐसा देखा गया कि रामनवमी पर्व के दिन सड़कें खाली पाई गई, सरयू के घाट सूने मिले और मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग बाग अपने घरों में दुबके रहे। यहां तक के लोग अपने घरों से बाहर झांकते हुए भी नहीं पाए। बताया जाता है लॉकडाउन को लेकर अयोध्या प्रशासन काफी सख्त हैं।

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गौरतलब है गत नवंबर में रामजन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के रामलला के पक्ष में दिए फैसले के बाद विवादित भूमि पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया था। मंदिर में भव्य मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन कर दिया गया।

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हाल ही में राम लला की मूर्ति को एक नए अस्थायी ढांचे में स्थानांतरित कर दिया गया है ताकि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके, लेकिन कोरोना वायरस के डर और फिर 21 दिनों की लॉकडाउन के चलते रामनवमी पर्व की सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिया है।

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रिपोर्ट कहती है कि प्रशासन द्वारा अयोध्या जिले में लॉकडाउन को सख्ती से लागू किया गया था, जिससे अधिकांश निवासी शारदीय 'नवरात्रि' के आखिरी दिन यानी नवमी को अनिवार्य 'कन्या पूजन' भी नहीं कर सके। घातक महामारी से सावधानी के चलते लड़कियों को उनके माता-पिता द्वारा घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।

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लगभग 7 दशकों से अयोध्या में रह रहे एक स्थानीय के मुताबिक उन्होंने कभी भी अयोध्या में रामनवमी पर्व के दिन शहर को इतना उजाड़ नहीं देखा, ऐसा नजारा तब भी नहीं दिखा था, जब विवादित परिसर के विध्वंस के बाद अयोध्या में दंगे हुए थे।

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उन्होंने बताया कि तब लोग कम से कम अपनी छतों पर बैठे थे और खिड़कियों से बाहर झांक रहे थे, लेकिन आज सभी मंदिरों को सार्वजनिक रूप से बंद कर दिया गया है, हालांकि अंदर 'आरती' हो रही है। हम 'आरती' की आवाज़ सुन सकते हैं, लेकिन बाहर नहीं जा सकते, क्योकि पुलिस आज अतिरिक्त सतर्क है।

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उल्लेखनीय है लॉकडाउन से ठीक पहले राज्य सरकार ने पवित्र शहर की सीमाओं को सील कर दिया था और संतों ने सभी भक्तों को नवरात्रि और राम नवमी के दौरान अयोध्या नहीं आने के लिए आह्वान किया था। यहां तक ​​कि प्रशासन द्वारा स्थानीय लोगों को पवित्र सरयू नदी में डुबकी लगाने के लिए सरयू के घाटों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई है।

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रिपोर्ट के मुताबिक रामनवमी के दो दिन पहले सआदतगंज और देवकली में प्रवेश मार्गो पर बैरिकेड्स लगाए गए थे हनुमान गढ़ी के एक कनिष्ठ पुजारी ने बताया कि किसी ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि राम नवमी के दिन अयोध्या में इतना सन्नाटा पसरा रह सकता है।

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बकौल हनुमान गढ़ी कनिष्ठ पुजारी, "यह भगवान की इच्छा है और हम इसका पालन करते हैं। उम्मीद है कि चीजें जल्द ही सामान्य हो जाएंगी और तब हम रामनवमी पर्व का भव्य समारोह आयोजित करेंगे।"

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English summary
For the first time in Ayodhya on the morning of Thursday, 2 April, it was seen that on the day of Ramnavami festival, the roads were found empty, the ghats of Saryu were heard and there was silence in the temples. People stayed in their homes in the garden. Even people could not get a peek outside their houses. It is said that the Ayodhya administration is very strict about the lockdown.
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