रामविलास पासवान ने मायावती को नहीं कहा 'बहन जी', तो सदन में मांगनी पड़ी माफी

नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने बुधवार को आर्थिक आधार पर आरक्षण के बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान ऐसा कुछ कुछ कह दिया कि, उन्हें उसके लिए सदन के सामने माफी मांगनी पड़ गई। बुधवार को सवर्णों को आरक्षण बिल पर चर्चा के सभी राजनीतिक दलों के सांसदों ने अपने-अपने विचार रखे। लेकिन चर्चा के दौरान लोकजन शक्ति पार्टी(लोजपा) प्रमुख रामविलास पासवान और बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश चंद्र मिश्र के बीच तकरार हो गई। पासवान के नाम लेने की शैली पर बसपा के नेता नंबर दो और राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने सवाल उठाया।

पासवान ने सीधे मायावती कहकर संबोधित किया था

पासवान ने सीधे मायावती कहकर संबोधित किया था

रामविलास पासवान सामान्य श्रेणी के गरीबों को आरक्षण पर बोल रहे थे कि उच्च जाति के लोगों ने हम जैसे तमाम नेताओं को आगे बढ़ाया है। इस दौरान उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का भी नाम लिया, जिस पर सांसद सतीश मिश्रा ने ऐतराज जताया। उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम लेते हुए बहनजी या सुश्री शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और सीधे मायावती कहकर संबोधित किया।

मायावती का नाम अदब से लें

मायावती का नाम अदब से लें

इस पर ऐतराज जताते हुए बसपा राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि, मान्यवर मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि जो सदन में नहीं हैं उनका नाम ले रहे हैं तो अदब से नाम लें। श्रीमान आपको मालूम होना चाहिए की बहन मायावती जी...और अगर आप इस तरह से बात कर रहे हैं तो जरा सोच समझ कर बात करिए। मिश्रा ने बताया कि आप बहन मायावती जी कहकर उन्हें संबोधित करें। सतीश मिश्रा के यह तेवर देखकर रामविलास पासवान ने तुरंत सदन के सामने माफी मांगी।

पासवान ने मायावती को 'मेरी प्यारी बहन मायावती जी' कहकर संबोधित किया

पासवान ने मायावती को 'मेरी प्यारी बहन मायावती जी' कहकर संबोधित किया

इसके बाद पासवान ने मायावती को 'मेरी प्यारी बहन मायावती जी' कहकर संबोधित किया। हालांकि इस दौरान कुछ सदस्यों ने सदन में हंगामा भी किया। सतीश मिश्रा यहीं नहीं रुके इशके बाद उन्होंने कहा कि, आज आप लोग जहां बैठे हैं, वो बहन मायावती जी की वजह से हैं। इस बात पर रामविलास पासवान थोड़ा मुखर हो गए। रामविलास पासवान ने कि मैं यह कहना नहीं चाहता हूं कि मैं पहली बार एमएलए संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से साल 1969 में बना था और यह रिकॉर्डेड है और यह पचासवां साल है। अब अगर इसके बाद भी कोई यह कहता है कि फलां की वजह से मैं राजनीति में आया तो मैं इसपर कुछ नहीं कह सकता।

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