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एक कोरोना मरीज से 1 से भी कम व्यक्ति हो रहा है संक्रमित, पहली बार इतना कम हुआ R count

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नई दिल्ली, 17 मई: एक कोरोना मरीज कितने लोगों को संक्रमित कर रहा है, इस आंकड़े को रिप्रोडक्शन नंबर या आर-काउंट के नाम से जाना जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि कोरोना वायरस कितनी तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है। भारत के लिए राहत की बात है कि दूसरी लहर की तबाही के बीच प्रभावी आर काउंट पहली बार फरवरी के स्तर से भी नीचे चला गया है। यह विश्लेषण अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी और भारत की एक संस्थान ने किया है, जो कि विपरीत हालातों के बावजूद कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बहुत ही सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

एक संक्रमित 1 से कम व्यक्ति को कर रहा है इंफेक्टेड-स्टडी

एक संक्रमित 1 से कम व्यक्ति को कर रहा है इंफेक्टेड-स्टडी

इस साल जब कोरोना की दूसरी लहर ने तबाही मचानी शुरू की थी तो राष्ट्रीय आर-काउंट बढ़कर 1 अप्रैल को 1.61 तक चला गया था। यानी तब एक मरीज से 1.61 लोग संक्रमित हो रहे थे। बीते 6 मई को राष्ट्रीय आर-काउंट 1.18 पर था, लेकिन अब यह महत्वपूर्ण काउंट '1' अंक से भी नीचे आ गया है। राहत कि बात यह है कोरोना के सबसे ज्यादा केस लोड वाले 9 राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, दिल्ली , उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना में भी यह आंकड़ा '1' से नीचे गिर गया है। यह आंकड़े अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के एक एक्सपर्ट ग्रुप (सीओवी-आईएनडी-19 स्टडी ग्रुप) ने भारत में कोविड-19 महामारी से जुड़े डेटा के विश्लेषण के बाद जारी किया है। इसके अनुसार 15 मई को भारत का आर काउंट 0.99 था।

जून में काफी सुधार दिखने की उम्मीद- लीड रिसर्चर

जून में काफी सुधार दिखने की उम्मीद- लीड रिसर्चर

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर-काउंट को 1 से नीचे ही रहना चाहिए, ताकि ऐक्टिव केसों की संख्या में कमी आ सके। एक से नीचे रहने से संक्रमण पर लगाम कसने में भी मदद मिलती है। हालांकि, 9 राज्य अभी भी चिंता का कारण बने हुए हैं, जहां आर-काउंट अभी भी 1 से ऊपर है। ये राज्य हैं- असम, उत्तराखंड, तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक। मिशीगन के शोधकर्ताओं के स्टडी ग्रुप की लीड रिसर्चर भ्रमर मुखर्जी ने शनिवार को ट्वीट करके मौजूदा डेटा एसेस्टमेंट और जारी नीतियों के आधार पर उम्मीद जताई है कि, 'जून के आसपास बहुत ज्यादा सुधार देखने को मिलेगा।'

कई वजहों से आती है आर-काउंट में कमी

कई वजहों से आती है आर-काउंट में कमी

प्रभावी रिप्रोडक्शन नंबर से पता चलता है कि किसी आबादी में कितने लोग हैं, जो किसी व्यक्ति से संक्रमित हो सकते हैं। यह नंबर तब घटता है, जब लोग तेजी से रोग-प्रतिरोधक होने लगते हैं, चाहे वह संक्रमित होने की वजह से हों या फिर वैक्सीनेशन की वजह से और चाहे लोगों की मौत होने से। इस बीच चेन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज की रिसर्चर सिताभरा सिन्हा भी भारत के आर-काउंट को ट्रैक कर रही हैं। उनका कहना है, निश्चित तौर पर अच्छी स्थिति के लिए 1 से कम का आंकड़ा लंबे वक्त तक रहना चाहिए। उन्होंने ईटी से कहा है, 'यह सिर्फ 1 से नीचे है, लेकिन अभी 1 के काफी करीब है। इसलिए अच्छा यह रहेगा कि यह लंबे समय तक रहे, जिससे ज्यादा स्पष्ट रीडिंग मिल सके। क्योंकि, बीच में इसमें काफी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं।...'

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पहली से दूसरी लहर तक के आर-काउंट के आंकड़े

पहली से दूसरी लहर तक के आर-काउंट के आंकड़े

अगर कोरोना की पिछली लहर से लेकर अबतक के आर-काउंट को मोटे तौर पर देखें तो 25 मार्च, 2020 को यह 3.75 था। पिछले साल सितंबर से इस साल जनवरी तक यह नवंबर में कुछ समय छोड़कर अधिकतर वक्त में 1 से नीचे रहा। इस साल 16-17 फरवरी को बढ़ना शुरू हुआ और 1.01 पर पहुंच गया। 14 मार्च को 1.38, 21 मार्च को 1.65, 4 अप्रैल को 1.53, 19 अप्रैल को 1.6, 1 मई को 1.23 और 6 मई को 1.18 था। लेकिन, 15 मई को 0.99 तक गिर गया।

English summary
In India, a Covid patient is currently infecting less than one person, according to data from the University of Michigan, the reproduction count fell below 1 for the first time
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