ग्रामीण इलाकों में बने सीएससी के माध्यम से वैक्सीनेशन के लिए 0.5% से भी कम लोगों ने कराया पंजीकरण
ग्रामीण इलाकों में स्थित 3 लाख सीएससी में 0.5 प्रतिशत से भी कम लोगों ने टीकाकरण के लिए पंजीकरण कराया है।
नई दिल्ली, 15 जून। सुप्रीम कोर्ट को यह सूचित किए जाने कि को-विन पोर्टल पर टीकाकरण के लिए ग्रामीण आबादी को पंजीकृत करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को शामिल किया जाएगा, के एक महीने बाद 3 लाख सीएससी में 0.5 प्रतिशत से भी कम लोगों ने टीकाकरण के लिए पंजीकरण कराया है। एक मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक 12 जून तक 28.5 करोड़ लोगों ने वैक्सीन के लिए टीकाकरण कराया था, जिनमें से मात्र 14.25 लाख लोगों ने सीएससी के जरिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

हालांकि सीएससी द्वारा किए गए पंजीकरणों की कुल संख्या में महीने-दर-महीने मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन यह अभी भी ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की खाई को उजागर करता और वैक्सीन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। 11 मई तक 54,460 सीएससी सक्रिय थे और उनमें 1.7 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया था। जोकि पूरे भारत में उस समय तक वैक्सीनेशन के लिए पंजीकरण किए गए लोगों का मात्र 0.1 प्रतिशत था।
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वैक्सीनेशन की इतनी धीमी गति के लिए हरियाणा में एक सीएससी का संचालन करने वाले ग्राम स्तरीय उद्यमी ने कहा जब हम लोगों से टीकाकरण के लिए कहते हैं तो वे हमसे कहते हैं कि क्या वैक्सीन उपलब्ध हैं और जब वैक्सीन नहीं होती तो वे हमसे कहते हैं कि वैक्सीन उपलब्ध होने पर वे लगवाने आएंगे। हमें उनके साथ रहना है इसलिए हम उनपर पंजीकरण के लिए दबाव नहीं डालते।
वैक्सीन की कमी को लेकर सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि गामीण इलाकों में वैक्सीन की कमी काफी निचले स्तर तक पहुंच गई है और वैक्सीन की आपूर्ति बहाल हो जाने के बाद वहां पंजीकरण फिर से शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट टीकाकरण के लिए पंजीकरण की कमी का एक प्रमुख कारण है। वैक्सीन को लेकर तरह तरह के मिथक फैलाए जा रहे हैं। कई लोगों में ऐसा भी भ्रम है कि वो वैक्सीन लेने के बाद नपुंसक हो जाएंगे।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 12 जून तक उत्तर प्रदेश की सीएससी में अभी तक टीकाकरण के लिए सर्वाधिक पंजीकरण हुए हैं। सबसे अधिक गांव वाले इस प्रदेश में अभी तक 5,18,422 लोगों ने को-विन पोर्टल पर वैक्सीन के लिए पंजीकरण कराया है। इसके बाद पंजाब का नंबर आता है जहां की सीएससी में 77,303 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।केंद शासित प्रदेशों में स्थित गांवों में स्थित इससे भी ज्यादा बुरी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लद्दाख में सीएससी ने क्रमशः केवल 57, 10, 39, 58 और 68 लोगों को पंजीकृत किया।
इस मामले में गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड जैसे छोटे राज्यों ने भी खराब प्रदर्शन किया। उनके यहां स्थित सीएससी में सिर्फ क्रमश: 65, 1,165, 1,350, 1,258, और 1,582 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।












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