दिल्ली पुलिस धरने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट, HC और गृह मंत्रालय पहुंचे वकील, RTI में मांगा ये जवाब
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट में 2 नवंबर को हुए झड़प के बाद दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। पहले दिल्ली पुलिस का धरना और फिर वकीलों का दिल्ली पुलिस के धरने के खिलाफ प्रदर्शन, पिछले 5 दिनों से राजधानी का यही हाल है। कानून के दो नुमाइंदों के बीच विवाद का खामियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ रहा है। गुरुवार को भी वकीलों ने कुछ स्थानों पर प्रदर्शन किया और दिल्ली पुलिस के खिलाफ विरोध दर्ज कराया ।

दिल्ली पुलिस के खिलाफ दायर की याचिका
5 नवंबर को दिल्ली पुलिस के जवानों ने पुलिस हेडक्वार्टर के सामने धरना प्रदर्शन किया और वकीलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। पुलिस के धरने से नाराज वकीलों ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर धरने पर बैठने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयान जारी करने का आरोप लगाया। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि वह धरने पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दे।

धरने के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
राजधानी दिल्ली में पुलिस हेडक्वार्टर के सामने धरना देने वाले जवान और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील जीएम मणि सहित कई अन्य वकीलों ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि वह धरने में भाग लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी निर्देश दे।

वकील ने दाखिल की आरटीआई
दिल्ली के वकील विनोद यादव ने गृह मंत्रालय, दिल्ली एलजी और दिल्ली पुलिस के कार्यालय में आरटीआई दाखिल कर पूछा है कि, 5 नवंबर को धरना देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई हो सकती है। आरटीआई में पूछा गया है कि दिल्ली पुलिसकर्मियों का धरना देना कानून के अंतर्गत था या अवैध था। अगर यह अवैध था तो उनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।












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