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लाल बहादुर शास्त्री: सिर्फ 5 फीट थी ऊंचाई, लेकिन इन पांच वजहों से भारतीय राजनीति में पाया सबसे ऊंचा कद

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नई दिल्ली, 11 जनवरी: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज 56वीं पुण्यतिथि है। उनके बारे में हमने एक बात बचपन से सुनी और पढ़ी है कि किस तरह से उन्होंने 1956 में तमिलनाडु में हुए एक रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रेल मंत्री के पद से त्याग पत्र दे दिया था। लेकिन, शास्त्री जी ने अपने जीवन में कम समय के लिए ही सही, लेकिन बड़े पदों पर रहते हुए एक से बढ़कर एक मिसाल कायम किए थे, जो आज भी उदाहरण हैं। उनमें हम यहां उन्हीं खास चुनिंदा घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं, जो शास्त्री जी के व्यक्तित्व को और चार चांद लगा देता है।

शास्त्री जी की 56वीं पुण्यतिथि

शास्त्री जी की 56वीं पुण्यतिथि

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री शारीरिक रूप से तो महज 5 फीट एक या दो इंच के थे, लेकिन भारतीय राजनीति में उन्होंने बहुत ही कम समय में जो उच्चता स्थापित की थी, उसे आजतक कोई नहीं तोड़ पाया है। देश के नए-पुराने लगभग हर बड़े नेताओं के साथ कभी ना कभी कोई विवाद जरूर जुड़ा रहा है। लेकिन, शास्त्री जी की शख्सियत अकेली ऐसी है, जिनकी छवि आमतौर पर पूरी तरह से विवादों से परे रही है। राजनीति में रहकर किसी भी राजनेता को इतनी महानता यूं ही नहीं मिली है। आज देश उनकी 56वीं पुण्यतिथि मना रहा है, लेकिन उन्होंने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में ही ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की पराकाष्ठा कायम की थी, उसे लोग आज भी महससू करते हैं। हम यहां सिर्फ पांच उदाहरण पेश करेंगे कि क्यों उन्हें आज भी सबसे विनम्र राजनेता के रूप में याद दिया जाता है।

जब सायरन वाली गाड़ी लेने से किया इनकार

जब सायरन वाली गाड़ी लेने से किया इनकार

यह उस वक्त की बात है जब शास्त्री जी के पास देश के गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी थी। वह आधिकारिक दौरे पर कोलकाता (तब कलकत्ता) में थे। उन्हें शाम की फ्लाइट से दिल्ली लौटना था। काम में इतने उलझे कि विमान पकड़ने के लिए निकलते-निकलते देर हो गई। लग रहा था कि वह जबतक दमदम एयरपोर्ट पहुंचेंगे विमान के उड़ान भरने का वक्त निकल जाएगा। देश के गृहमंत्री कलकत्ता में शाम की ट्रैफिक में थे। पुलिस कमिश्नर ने तय किया कि उनकी कार के आगे एक सायरन वाला वाहन लगा दें तो गृहमंत्री समय रहते एयर पोर्ट पहुंच जाएंगे। लेकिन, शास्त्री जी ने इस विचार को फौरन मना कर दिया। उन्हें लगा कि ऐसा किया गया तो लोग समझेंगे कि सड़क से कोई बड़ा आदमी गुजर रहा है।

जब एक मुख्यमंत्री को कर दिया 'हैरान'

जब एक मुख्यमंत्री को कर दिया 'हैरान'

देश के प्रधानमंत्री के तौर पर एक बार लाल बहादुर शास्त्री को किसी प्रदेश के सरकारी दौरे पर जाना था। आखिरी वक्त में किसी बहुत ही अहम वजह से उन्हें वह दौरा रद्द करना पड़ा। संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री ने उन्हें फोन किया और गुजारिश की कि 'सर कृप्या करके अपनी यात्रा रद्द मत कीजिए।' मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा कि उन्होंने उनकी यात्रा के लिए फर्स्ट क्लास का इंतजाम कर रखा है। तो शास्त्री जी ने ऐसा जवाब दिया कि वह मुख्यमंत्री हैरान हो गए। प्रधानमंत्री बोले- 'आपने एक थर्ड क्लास व्यक्ति के लिए फर्स्ट क्लास का इंताम क्यों किया है?'

जब एक शाम का खाना छोड़ दिया

जब एक शाम का खाना छोड़ दिया

1965 में भारत, पाकिस्तान के साथ युद्ध में उलझा हुआ था और उस समय देश बहुत बड़े खाद्य संकट में फंस गया था। ऊपर से अमेरिका सप्लाई रोकने की धौंस दिखा रहा था। प्रधानमंत्री शास्त्री ने अपने परिवार से कहा कि 'कल से एक सप्ताह तक शाम को चूल्हा नहीं जलेगा।' उन्होंने साफ किया कि बच्चों को दूध और फल दिए जाएं, लेकिन बड़े एक शाम भूखे रहें। जब उन्हें तसल्ली हो गई कि उनका परिवार एक शाम न खाकर भी रह सकता है, तब जाकर उन्होंने रेडियो पर देशवासियों से कम से कम सप्ताह में एक बार एक शाम का खाना त्यागने की अपील की। अगले कुछ हफ्ते तक होटलों और रेस्टोरेंट ने भी इसपर कड़ाई से अमल किया।

जब परिवार ने इस्तेमाल किया सरकारी कार

जब परिवार ने इस्तेमाल किया सरकारी कार

एक बार की बात है कि प्रधानमंत्री के बेटों ने उनकी सरकारी कार का निजी कार्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया। शास्त्री जी को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने अगले दिन ही परिवार की ओर से निजी इस्तेमाल के लिए कार से तय की गई दूरी के हिसाब से सरकारी खजाने में भुगतान कर दिया। ऐसी सादगी और ईमानदारी के इतने ऊंचे मानदंड ने उन्हें हमेशा ऊंचाइयों पर बनाए रखा है।

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लोन लेकर खरीदी कार, पेंशन से उतारा कर्ज

लोन लेकर खरीदी कार, पेंशन से उतारा कर्ज

जानकारी के मुताबिक, 1966 में रूस के ताशंकद शहर में उनकी जब कथित रूप से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तो उनके नाम पर ना कोई अपना घर था और ना ही कोई जमीन। उनके नाम पर सिर्फ एक सेकंडहैंड फिएट कार थी, जिसके लिए उन्होंने सरकार से लोन ले रखा था। यह कार भी उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद इसलिए खरीदी थी कि परिवार वालों की उनकी आधिकारिक कार इस्तेमाल करने की नौबत ही ना आए। जब उनका निधन हो गया तब बैंक ने उनकी पत्नी ललिता शास्त्री से लोन चुकाने को कहा और उन्होंने भी फैमिली पेंशन से बैंक का सारा कार लोन चुका दिया। (पुरानी तस्वीरें- वायरल फोटो और अखबारों की कटिंग से)

English summary
Lal Bahadur Shastri death anniversary:Five acts of former PM Lal Bahadur Shastri, which made him the most respected leader of Indian politics
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