Kuno National Park: चीतों से कूनो फुल, अब और जरूरत नहीं, केन्या आई खेप तो कहां होगा नया ठिकाना?
Kuno National Park: कूनो नेशनल पार्क में चीतों की व्यवस्था अब पार्क प्रबंधन के लिए चुनौती बनने जा रही है। इस बीच अभ्यारण्य में एक चीता शावक के घायल होने और तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि 28 नवंबर को शावक का दाहिना पैर टूट गया था, लेकिन कूनो प्राधिकरण ने इसे छिपा लिया। यह पहली बार नहीं है जब पार्क में अव्यवस्था सामने आई। पिछले साल सात चीतों की मौत हुई थी, जिनमें तीन चीतों की मौत मानसून में हुई थी।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की व्यवस्था अब पार्क प्रबंधन के लिए चुनौती बनने जा रही है। इस बीच अभ्यारण्य में एक चीता शावक के घायल होने और तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

राष्ट्रीय वन्य जीव अभ्यारण्य कूनो में हालात ये हैं कि खुले जंगल में चीतों को छोड़ते ही वह दूसरे जिलों और राज्यों में पहुंच जाते हैं। कूनो के खुले जंगल में चीतों को छोड़ते ही वह दूसरे जिलों और राज्यों में पहुंच जाते हैं। चीते कूनो ही नहीं एमपी की सीमा भी लांघ जाते हैं।
कूनो चीतों की आबादी के अनुकूल
दरअसल, राजस्थान के करौली जिले से वन विभाग की टीम चीता ओमान को पकड़कर लाई थी। इससे पहले चीता 'अग्नि' को राजस्थान से सटे बारां जिले के जंगल से वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइज किया था। वहीं मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से अच्छी खबर है। श्योपुर में चल रहे चीता प्रोजेक्ट को सफल माना जा रहा है। 21 माह में चीतों की मृत्यु की तुलना में शावकों के जन्म का औसत ज्यादा है। संख्या ज्यादा होने के कारण अब बाहर से और चीते लाने की जरूरत नहीं है। हालांकि चीतों की मृत्यु की तुलना में शावकों के जन्म का औसत ज्यादा है।












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