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कोरेगांव: संभाजी भिडे पर क्या बोले थे प्रधानमंत्री मोदी?

By Bbc Hindi

कोरेगांव हिंसा के अभियुक्तों में से एक संभाजी भिडे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्रशंसक रहे हैं.

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की वह बात भी साझा की जा रही है जो उन्होंने संभाजी भिडे के बारे में कही थी.

2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी की इन आरोपियों में से एक संभाजी भिडे से रायगढ़ किले पर मुलाक़ात हुई थी. इस दौरान प्रधानमंत्री ने मंच से संभाजी भिडे की प्रशंसा की थी.

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'कई साल से जानता हूं भिडे को'

तीन साल पहले रायगढ़ में पीएम मोदी ने भिडे के बारे में कहा था, "मैं भिडे गुरु जी का बहुत आभारी हूं क्योंकि उन्होंने मुझे निमंत्रण नहीं दिया बल्कि उन्होंने मुझे हुक्म दिया था. मैं भिडे गुरु जी को बहुत सालों से जानता हूं और हम जब समाज जीवन के लिए कार्य करने के संस्कार प्राप्त करते थे तब हमारे सामने भिडे गुरु जी का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता था."

उन्होंने कहा था, "अगर कोई भिडे गुरु जी को बस पर या रेल के डिब्बे में मिल जाए तो कल्पना नहीं कर सकता कि ये कितने बड़े महापुरुष हैं, कितने बड़े तपस्वी हैं. अंदाज़ा नहीं कर सकता है."

कोरेगांव में 200 साल पहले पेशवाओं और अंग्रेज़ों के बीच लड़ाई हुई थी जिसकी याद में आयोजित समारोह में अचानक हिंसा भड़क उठी जिसमें एक शख़्स की मौत हो गई.

इसके बाद दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया कि 'यह हिंसा दलितों के ख़िलाफ़ की गई'. जिसके बाद पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई थी.

कौन हैं संभाजी भिडे?

सांगली ज़िले के रहने वाले संभाजी भिडे 80 साल के हैं और महाराष्ट्र के वरिष्ठ हिंदू कार्यकर्ता माने जाते हैं. संभाजी आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं. संभाजी खुद भी आरएसएस से जुड़े थे लेकिन बाद में विवाद होने पर उन्होंने सांगली में एक समानांतर आरएसएस का गठन किया.

संभाजी ने 1984 में श्री शिव प्रतिष्ठान की स्थापना की जिसकी वेबसाइट में बताया गया है कि उनका लक्ष्य हिंदुओं को शिवाजी और संभाजी के ब्लड ग्रुप का बनाना है.

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कौन हैं मिलिंद एकबोटे?

वहीं हिंदू एकता अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे भी एक जाने माने हिंदूवादी नेता हैं.

उनके भाई डॉक्टर गजानन रमाकांत एकबोटे ने बीबीसी को बताया कि '61 साल के मिलिंद बाबासाहेब आंबेडकर और मतंग समाज के क्रांतिवीर लहुजी वस्ताद को अपना आदर्श मानते हैं. बीजेपी के कॉरपोरेटर रहे मिलिंद आरएसएस के स्वंयसेवक भी रहे हैं. मिलिंद एकबोटे ने शादी नहीं की.'

गजानन एकबोटे का कहना है कि 'मिलिंद दलितों की लड़ाई के लिए पूरी तरह समर्पित रहे हैं. उनके समर्थकों में से 60-70 फ़ीसदी दलित हैं. दलितों में उनकी बढ़ती लोकप्रियता की वजह से कुछ लोग उनसे जलने लगे हैं.'

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'माहौल बिगाड़ रहे हैं कुछ संगठन'

संभाजी के प्रवक्ता नितिन चौगले को भी लगता है कि "महाराष्ट्र में कुछ संगठन पिछले तीन-चार साल से जानबूझकर जातीयता को लेकर समाज का वातावरण बिगाड़ने का काम कर रहे हैं."

संगठन का नाम पूछने पर चौगले कहते हैं, "प्रकाशजी आंबेडकर नाम के एक दलित नेता ने ऐसा आरोप लगाया है कि मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे गुरूजी इस दंगल के सूत्रधार हैं लेकिन ये बिल्कुल सही नहीं है. प्रकाश आंबेडकर के पीछे कोई है. हम सरकार से मांग करते हैं कि उनके पीछे जो भी है उनकी पूरी शिनाख़्त हो और जो सच है वो पूरे देश के सामने आए."

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'भिडे के कामों से मोदी को फ़ायदा हो सकता है'

लेकिन अगर ऐसा हो तो इसके पीछे प्रकाश आंबेडकर का क्या मक़सद हो सकता है?

यह पूछने पर नितिन चौगले कहते हैं, "मोदी जी हिंदुत्व की वजह से ही आज प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं. इन लोगों को लगता है कि भिडे गुरूजी जो भी हिंदुत्व का काम कर रहे हैं इसका फ़ायदा नरेंद्र मोदी जी और हिंदू संगठनों को जा सकता है. इन्हें ऐसी आशंका है. हमें लगता है यही उनका उद्देश्य है."

संभाजी भिडे ने सरकार से घटना की पूरी जांच कराने की मांग की है.

लग रहे थे जय भवानी, जय शिवाजी के नारे?

सोमवार को भीमा-कोरेगांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा के चश्मदीद सामने आने लगे हैं.

दलित आंदोलन से जुड़ी महिला निहाली उपश्याम ने बीबीसी को बताया कि 'हाथों में भगवा झंडे लिए हमलावर आगजनी कर रहे थे और 'जय भवानी, जय शिवाजी' के नारे लगा रहे थे. खुलेआम आसमान में गोलियां चलाई जा रही थीं और हमलावर तलवारें लहरा रहे थे. मुंबई की रहने वाली इस महिला ने दावा किया कि जान बचाने के लिए जब उन्होंने पास के एक गांव में छिपना चाहा तो उन्हें शरण भी नहीं दी गई.''

ग़ौरतलब है कि निहाली का परिवार दलित आंदोलन से जुड़ा रहा है. हालांकि बीबीसी उनके दलित कार्यकर्ता होने की पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता.

BBC Hindi
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English summary
Koregaon What was said on Sambhaji Bhide Prime Minister Modi
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